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    उत्तराखंड: रामनगर के फाटो जोन में घायल भोला बाघ का सफल रेस्क्यू, इलाज के लिए कॉर्बेट भेजा गया

    Updated: Fri, 26 Jun 2026 08:03 PM (IST)

    रामनगर के फाटो जोन में घायल घूम रहे प्रसिद्ध 'भोला बाघ' को वन विभाग ने रेस्क्यू कर लिया है। गंभीर पैर की चोट के कारण कमजोर हुए बाघ को इलाज के लिए कॉर् ...और पढ़ें

    HighLights

    1. घायल 'भोला बाघ' को फाटो जोन से सुरक्षित रेस्क्यू किया गया

    2. गंभीर पैर की चोट के कारण शिकार करने में असमर्थ था

    3. इलाज के लिए कॉर्बेट के ढेला रेस्क्यू सेंटर में भर्ती

    जागरण संवाददाता, रामनगर। तराई पश्चिमी वन प्रभाग के फाटो पर्यटन जोन में पिछले कई दिनों से घायल घूम रहे प्रसिद्ध 'भोला बाघ' को आखिरकार वन विभाग की टीम ने गुरुवार रात सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया।

    पैर में गंभीर चोट और असहनीय पीड़ा के कारण बाघ काफी कमजोर हो चुका था। उसे इलाज के लिए कॉर्बेट नेशनल पार्क के ढेला स्थित रेस्क्यू सेंटर में भर्ती कराया गया है।

    शिकार न करने से हो गया था बेबस

    अधिकारियों के मुताबिक, बाघ के आगे के दाएं पैर के पंजे में गंभीर चोट थी, जिससे खून बह रहा था। इस चोट के कारण वह शिकार करने में पूरी तरह असमर्थ और बेबस हो गया था।

    भोजन न मिलने की वजह से उसके शरीर में काफी कमजोरी आ गई थी। घाव गहरा होने के कारण उसे पूरी तरह ठीक होने में लंबा समय लग सकता है।

    रात में ऐसे किया गया ट्रैंकुलाइज

    डीएफओ प्रकाश चंद्र आर्या के निर्देशन में कॉर्बेट के पशु चिकित्साधिकारी डॉ. दुष्यंत शर्मा की टीम ने रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। जंगल में एक वाहन के भीतर पूरा सेटअप लगाकर टीम बाघ का इंतजार कर रही थी।

    रात के समय जैसे ही भोला बाघ घूमता हुआ वहां पहुंचा, डॉ. शर्मा ने ट्रैंकुलाइज गन से सटीक निशाना लगाकर उसे बेहोश कर दिया। इसके बाद रात में ही उसे ढेला रेस्क्यू सेंटर शिफ्ट किया गया।

    संघर्ष या कांटा चुभने से लगी चोट

    वन विभाग के अनुसार, करीब एक महीने पहले भी इस बाघ को लंगड़ाकर चलते हुए देखा गया था, लेकिन बाद में वह सामान्य हो गया था। पिछले 3-4 दिनों से उसकी समस्या अचानक फिर बढ़ गई।

    बाघ के पैर के पंजे में या तो कोई बड़ा कांटा चुभा है या फिर किसी अन्य वन्यजीव के साथ संघर्ष में वह घायल हुआ है। बार-बार चलने के कारण पंजे का निचला हिस्सा (हथेली) बुरी तरह चोटिल हो गया है। पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद ही उसे वापस प्राकृतिक आवास (जंगल) में छोड़ा जाएगा।
    -डॉ. दुष्यंत शर्मा, पशु चिकित्साधिकारी (कॉर्बेट)

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