उत्तराखंड के इस रिंग रोड प्रोजेक्ट का काम अटका, वन विभाग ने कंपनी को जंगल से निकाला
हल्द्वानी रिंग रोड के सर्वे का काम वन विभाग ने रोक दिया है। कंपनी को आरक्षित वन क्षेत्र में बिना अनुमति सर्वे करने से रोका गया, हालांकि लोनिवि जल्द का ...और पढ़ें

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गोविंद बिष्ट, हल्द्वानी। नौ साल बाद रिंग रोड के सर्वे के लिए शासन से बजट जारी होने के बाद हल्द्वानी के लोगों की उम्मीदें फिर जगीं थी। लेकिन विवाद के चलते पहले दिन ही मामला अटक गया। वन विभाग ने जंगल में घूम रही निजी कंपनी की टीम को अनुमति न होने का हवाला देकर सर्वे से रोक दिया।
इसके बाद कंपनी के लोगों को आरक्षित वन क्षेत्र से बाहर जाना पड़ा। रेंजर से पूछने पर पता चला कि अभी तक उच्चधिकारियों का पत्र नहीं पहुंचा। इसलिए सर्वे की प्रक्रिया रोकी गई है। जबकि ईई लोनिवि का कहना है कि डीएफओ को पत्र भेज दिया है। एक-दो दिन में काम पुन: शुरू हो जाएगा। मामला डीएम तक पहुंच चुका है।
2024 में लोनिवि ने फिर से शुरू किए प्रयास
अप्रैल 2017 में तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने हल्द्वानी के लोगों को जाम से मुक्ति दिलाने के लिए रिंग रोड प्रोजेक्ट की घोषणा की थी। लेकिन धीरे-धीरे मामला ठंडे बस्ते में चला गया। इसके बाद 2024 में लोनिवि ने फिर से प्रयास शुरू किए। इस बार भाखड़ा पुल से रिंग रोड को रामपुर रोड पर बेलबाबा के पास जोड़ने की योजना बनाई गई। लेकिन रिंग रोड के निजी भूमि से गुजरने की बात पता चलते ही ग्रामीण विरोध में उतर आए।
दूसरी तरफ राजस्व रिकार्ड खंगालने पर पता चला कि आबादी क्षेत्र से रिंग रोड बनाने पर 19 हेक्टेयर भूमि और 105 भवनों का मुआवजा देना पड़ेगा। मुआवजे की राशि ही करीब 700 करोड़ पहुंच जाएगी। निर्माण पर अलग से बजट खर्च करना पड़ेगा। इसके बाद प्रस्ताव में फिर से बदलाव किया गया।
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भाखड़ा पुल से फायर लाइन होते हुए जंगल क्षेत्र से रिंग रोड निकाली जाएगी। विभागीय अनुमान के अनुसार 18 किमी लंबा बाईपास बनाने के लिए 56 हेक्टेयर वनभूमि का अधिग्रहण करने के साथ ही 4280 पेड़ों का कटान भी करना होगा। लेकिन अंतिम रिपोर्ट तैयार करने के लिए विशेषज्ञ कंपनी की जरूरत थी। जो जमीनी सर्वे कर बता सके कि असल में कितनी वनभूमि की जरूरत पड़ेगी। पेड़ों की संख्या, डिजाइन और खर्चे का आकलन भी कंपनी को करना थ।
इस साल 31 जनवरी को शासन ने 26.35 लाख का बजट भी जारी कर दिया। टेंडर के बाद दिल्ली की एक कंपनी को यह जिम्मा सौंपा गया, जिसे नौ महीने के अंदर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करनी थी। 25 अप्रैल को पहली बार कंपनी के लोग भाखड़ा रेंज से जुड़े जंगल में पहुंचे थे। लेकिन बगैर अनुमति जंगल क्षेत्र में सर्वे करने पर वन विभाग ने आपत्ति जता दी, जिसके बाद से रिंग रोड का सर्वे बंद पड़ा है।
कंपनी के लोग बगैर अनुमति आरक्षित क्षेत्र में पहुंचे थे। इसलिए रोका गया। मौके पर पहुंचे लोनिवि अफसर कहना था कि उच्चधिकारियों से पत्राचार किया जा रहा है। विभागीय निर्देश मिलने के बाद ही सर्वे शुरू होगा। मगर पिलर गाड़ना या कोई पक्का निर्माण मान्य नहीं होगा। - नवीन रौतेला, रेंजर भाखड़ा
वन विभाग की आपत्ति की जानकारी मिलने पर रुद्रपुर स्थित डीएफओ कार्यालय संपर्क किया गया। साथ ही अनुमति को लेकर पत्र भी भेज दिया गया था। एक-दो दिन में रेंज स्तर पर पत्र आ जाएगा। इसके बाद कंपनी सर्वे का काम शुरू कर देगी। - प्रत्यूष कुमार, ईई लोनिवि
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