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    नैनीताल में हर दूसरे दिन लापता हो रही महिला और किशोरी, जांच में जुटी पुलिस

    Updated: Wed, 05 Aug 2026 03:57 PM (IST)

    नैनीताल जिले में जुलाई से अब तक 18 महिलाएं और किशोरियां लापता हुई हैं, औसतन हर दूसरे दिन एक गुमशुदगी दर्ज हो रही है। ...और पढ़ें

    इस तस्वीर का उपयोग सांकेतिक रूप में किया गया है।

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    जागरण संवाददाता, हल्द्वानी। नैनीताल जिले में महिलाओं और किशोरियों की गुमशुदगी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। जुलाई 2026 से अब तक जिले में करीब 18 महिलाएं और किशोरियां लापता हुई हैं। यानी औसतन हर दूसरे दिन एक गुमशुदगी दर्ज हुई। हालांकि पुलिस का दावा है कि आपरेशन मिलाप के तहत अधिकांश मामलों में 24 से 72 घंटे के भीतर सकुशल बरामदगी कर ली गई।

    बीते सोमवार को मुखानी थाने में एक युवती के लापता होने की गुमशुदगी पंजीकृत हुई है। लालडांठ क्षेत्र में रहने वाले एक व्यक्ति ने बताया कि उनकी 22 वर्षीय बेटी 27 जुलाई को दोपहर करीब 12:50 बजे बिना बताए घर से चली गई थी। रिश्तेदारी और परिचितों के यहां काफी तलाश के बाद भी उसका पता नहीं चला। पुलिस युवती की तलाश में जुटी है।

    बीते दिन हल्द्वानी में नाबालिग किशोरी संग हुई घटना ने हर किसी को चिंता में डाल दिया। हालांकि नैनीताल पुलिस और एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (एएचटीयू) का दावा है कि 85 से 90 प्रतिशत मामलों में त्वरित कार्रवाई कर महिलाओं और किशोरियों को सुरक्षित स्वजन तक पहुंचाया जा रहा है।

    इसलिए बढ़ रहे हैं मामले

    आइजी कुमाऊं मंडल निवेदिता कुकरेती के अनुसार मोबाइल और सोशल मीडिया का बढ़ता उपयोग, आनलाइन दोस्ती, पढ़ाई का दबाव, पारिवारिक तनाव और बच्चों से संवाद की कमी ऐसे मामलों की प्रमुख वजह बन रही है। उन्होंने अभिभावकों से बच्चों के साथ खुलकर बातचीत करने और उनकी आनलाइन गतिविधियों पर संतुलित नजर रखने की अपील की।

    डा. सुशीला तिवारी अस्पताल के मनोविज्ञानी डा. युवराज पंत का कहना है कि 11 से 18 वर्ष की उम्र में हार्मोनल बदलाव के कारण बच्चे भावनात्मक रूप से जल्द प्रभावित होते हैं। सही-गलत का आकलन पूरी तरह विकसित नहीं होने से वे आवेश में घर छोड़ने जैसे कदम उठा लेते हैं। ऐसे में परिवार का सहयोग, संवाद और भरोसे का माहौल सबसे प्रभावी बचाव है।

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