उत्तराखंड रोडवेज में महिला कंडक्टर का बढ़ता दबदबा, इनकम में हो रही बढ़ोतरी
उत्तराखंड रोडवेज में महिला परिचालकों की संख्या बढ़ रही है, खासकर हल्द्वानी और काठगोदाम डिपो में। पहले स्थानीय मार्गों तक सीमित, अब वे दिल्ली जैसे महत् ...और पढ़ें

हल्द्वानी रोडवेज स्टेशन में कार्यरत महिला परिचालक कविता जोशी। जागरण

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जागरण संवाददाता, हल्द्वानी। उत्तराखंड रोडवेज में धीरे-धीरे ही सही महिला परिचालकों की संख्या बढ़ रही है। पांच साल पहले तक हल्द्वानी और काठगोदाम डिपो में तीन-चार महिलाएं ही नजर थीं। अब इनकी संख्या बढ़कर 15 हो चुकी है।
पहले इन्हें स्थानीय मार्ग पर भेजा जाता था, ताकि सुबह जाकर शाम तक वापसी हो सके। मगर अब आय के लिहाज से रोडवेज के सबसे अहम स्टेशन दिल्ली के लिए इनकी ड्यूटी लग रही है। खास बात यह है कि अन्य के मुकाबले महिला परिचालकों की बसों में सवारियों का लोड फैक्टर ज्यादा ही रहता है।
काठगोदाम डिपो में वर्तमान में आठ और हल्द्वानी में सात महिला परिचालक तैनात हैं। पहले इन्हें 100 किमी दूरी तक रूटों पर भेजा जाता था। लेकिन सहमति व्यक्त करने पर अब दिल्ली रूट पर भी ड्यूटी लग रही है। हल्द्वानी डिपो की पांचों वाल्वो (सुपरडीलक्स) में महिलाएं ही परिचालक की जिम्मेदारी निभा रही हैं। कोई मृतक आश्रित कोटे तो कोई आउटसोर्स के माध्यम से रोडवेज में सेवा दे रही हैं।
वहीं, एआरएम संजय पांडे ने बताया कि समय से ड्यूटी पर पहुंचना महिला परिचालकों की खासियत है। इसके अलावा बेहतर लोड फैक्टर यानी सवारियों की संख्या बढ़ाने को लेकर भी इनके स्तर से प्रयास किए जाते हैं। यही वजह है कि तय स्टाप पर गाड़ी न रोकने को लेकर अब तक किसी यात्री ने शिकायत भी नहीं की।
परिवार और ड्यूटी के बीच संतुलन जरूरी: कविता
पति अनूप जोशी की मौत के बाद कविता जोशी को हल्द्वानी डिपो में बतौर परिचालक नियुक्ति मिली थी। ड्यूटी दिल्ली की वाल्वो में है। वापसी दूसरे दिन होती है। पूछने पर कविता ने बताया कि विभागीय अधिकारियों और कार्मिकों के सहयोग से उन्हें ड्यूटी में किसी तरह की दिक्कत नहीं होती। रोडवेज की आय बढ़ाने को हरसंभव प्रयास किया जाता ह।