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    उत्तराखंड में 10 हजार फीट की ऊंचाई पर भी लगता है कुंभ, 12 साल बाद हो रहा 'जुम्ली हया सामो' उत्सव

    Updated: Thu, 06 Aug 2026 03:52 PM (IST)

    गुंजी गांव में 10,500 फीट की ऊंचाई पर 12 साल बाद 'जुम्ली हया सामो' उत्सव 8 से 10 अगस्त तक मनाया जाएगा। ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. गुंजी में 12 साल बाद 'जुम्ली हया सामो' उत्सव

    2. 10,500 फीट ऊंचाई पर 8 से 10 अगस्त तक आयोजन

    3. अत्याचारी जुम्ली राजा के पुतले पर तलवारों से प्रहार

    तेज सिंह गुंज्याल, धारचूला। व्यास घाटी में 12 साल बाद मनाए जाने वाले जुम्ली हया सामो आठ से 10 अगस्त तक मनाया जाएगा। चीन और नेपाल सीमा से लगे 10500 फीट की ऊंचाई पर स्थित कैलास मानससरोवर यात्रा के प्रमुख पड़ाव एवं भारत चीन व्यापार की भारतीय मंडी गुंजी में महाकुंभ की तरह यह उत्सव बारह साल बाद मनाया जाएगा।

    तीन दिवसीय इस उत्सव को लेकर देश, विदेश में नौकरी करने वाले ग्रामीण अपने गांवों को पहुंचने लगे हैं। गुंजी गांव में चहल-पहल बढ़ चुकी है। वहीं पर्यटक व अन्य लोग भी पहुंचने वाले हैं।

    उत्सव के दौरान जुल्मी जुमली राजा का पलथी  आटे का बुत बनाया जाएगा। इस बुत पर सदियों पुराने अत्याचार का बदला सैकड़ों तलवारों के प्रहार से लिया जाएगा। इसके बाद गांव में जश्न मनाया जाएगा और सामूहिक भोज होंगे, जिसमें अतिथियों और आगंतुक भी शामिल होंगे। तलवारों के प्रहार से बुत से निकले खून का तिलक लगाकर विजय पर्व मनाया जाएगा। यह सब गुंजी के ग्रामीणों सहित क्षेत्र के लोगों को आने वाले 12 साल के लिए सुख और शांति का एहसास कराएगा।

    इस कारण बारह वर्षों बाद मनाया जाता है जुम्ली हया सामो

    सदियों पूर्व यहां पर भी कुटुंबों का समूह रहता था। उसमें जो सबसे बलशाली और ज्ञानवान होता था उसे मुखिया बनाया जाता था। भारत में काली नदी किनारे स्थित गुंजी गांव का मुखिया काफी लोकप्रिय था। इसी दौरान काली नदी के दूसरी तरफ नेपाल के कौआकोट नामक तोक में बलशाली जुम्ली रहता था। जिसके अत्याचारों का दंश पूरा क्षेत्र झेलता था। उसके आतंक से तंग आकर कुछ लोगों ने उसकी हत्या कर दी थी। उसके हाथ लूटी संपत्ति लेकर हत्यारे वहां से फरार हो गए थे।

    कौआकोट के लोगों के साथ गुंजी के लोगों के संबंध मधुर थे। उनके गांव छोड़ देने से उनकी भूमि पर भी गुंज्याल लोगों का ही कब्जा हो गया। लंबे समय बाद इस क्षेत्र में एक लूटमार दल का अभ्युदय हुआ। इस दल ने जुम्ली राजा के नाम पर हलचल पैदा कर दी। लूटमार के लिए धोखे से अमयरपा रांठ के मुखिया को मार दिया।

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    मुखिया के मारे जाने की बात सुनकर गांव के लोग उनको पकड़ने दौड़े लूटमार दल कालापानी की तरफ भाग गया था। लूटमार तथा अन्याय के चलते इस देवभूमि पर प्रकृति कुपित होने लगी। निरंतर जन धन की हानि होने लगी। खेत -खलिहान सूखने लगे। इससे परेशान लोगों ने लामा धर्मगुरुओं की शरण ली।

    बताया जाता है कि गुंजी के धर्मगुरु लामा ने बताया कि काली मां कुपित हैं। पूर्व में भ्रष्ट हो चुकी कौआकोट की भूमि पर गुंजी वालों का अधिकार मां काली को पसंद नहीं है। माटी बिगड़ चुकी है। इसके लिए प्रति कुंतल पक्ष में मां काली की पूजा का विधान बताया।

    इसके अलावा अत्याचारी जुम्ली राजा का पुतला बनाकर उसके पुतले में काली बकरी का वध कर उसका खून और आंत डालने के आदेश दिए। इस क्षेत्र में उत्पादित पलती के आटे के बुत के प्रत्येक अंग में बकरी का खून और अंग डालने को कहा। बुत को उस स्थान पर मारने को कहा जहां पर जुम्ली लुटेरे ने मुखिया को मारा था। यह सब प्रति 12 वर्षों में करने को कहा।

    इस तरह मनाया जाता है जुम्ली हया सामो

    प्रति 12 वर्षों बाद गुंजी में जुम्ली हया सामो मनाया जाता है। आटे से बने जुम्ली राजा के बुत में काली बकरी का खून और अंग भर कर उसमें तलवारों से सैकड़ों प्रहार किए जाते हैं। बुत के प्रत्येक अंग से खून और मांस निकलता है। इस खून से विजयी कुंटुब तिलक लगाते हैं। इस अवसर पर महिलाएं सगुन गाकर उनका स्वागत करती हैं। मुखिया के आंगन में उत्सव की धूम रहती है सामूहिक भोजन होता है। इस उत्सव के सम्पन्न होने पर सभी अपने सुखी होने का अहसास करते हैं।

    12 वर्षों बाद इस बार 8 अैर 9 अगस्त को जुम्ली हया सामो महोत्सव मनाया जा रहा है। 8 अगस्त को सायं से कार्यक्रम शुरू हो जाएंगे। 9 अगस्त को जुम्ली राजा के बुत का अंत करने के बाद दूसरे दिन भी गांव में उत्सव रहेगा। इस कार्यक्रम में भाग लेने देश विदेश में नौकरी करने वाले भी गुंजी पहुंचने शुरू हो चुके हैं। समुद्र तल से लगभग साढ़े दस हजार फिट की ऊंचाई में बसे उच्च हिमालयी गुंजी गांव में उत्सव का माहौल आरंभ हो चुका है।

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