उत्तराखंड में छह हजार की सालाना इनकम वाला सरकारी शिक्षक! चौंक गए ना, ये है सच
ऊधम सिंह नगर में एक सरकारी शिक्षक पर 2013 में 6,000 रुपये वार्षिक आय का फर्जी प्रमाण पत्र बनवाने का आरोप है। ...और पढ़ें

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समय कम है?
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जागरण संवाददाता, रुद्रपुर। सरकारी सेवा में रहते हुए कथित रूप से कम आय का प्रमाण पत्र बनवाने का मामला ऊधम सिंह नगर में जांच के दायरे में आ गया है। जसपुर निवासी रवि दास की शिकायत पर तहसील प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
शिकायत के अनुसार, जसपुर ब्लाक में तैनात एक सरकारी शिक्षक ने वर्ष 2013 में अपनी वार्षिक आय मात्र 6,000 रुपये दर्शाते हुए आय प्रमाण पत्र बनवाया। जबकि उस समय उनकी वास्तविक वार्षिक आय छह लाख रुपये से अधिक होने का दावा किया गया है।
सेल्फ डिक्लेरेशन में गलत तथ्य
आरोप है कि आय प्रमाण पत्र के लिए दिए गए स्व-घोषणा पत्र (सेल्फ डिक्लेरेशन) में संबंधित शिक्षक ने अपनी आय 6,000 रुपये वार्षिक बताई, जो वास्तविक तथ्यों के विपरीत थी। शिकायतकर्ता का कहना है कि गलत जानकारी देकर प्रमाण पत्र हासिल किया गया।
मामले की जांच के दौरान तहसीलदार की ओर से शिक्षा विभाग से संबंधित शिक्षक की सेवा संबंधी जानकारी मांगी गई। मुख्य शिक्षा अधिकारी कार्यालय की ओर से उपलब्ध कराई गई रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि वर्ष 2013 में संबंधित व्यक्ति परिषदीय विद्यालय में सहायक शिक्षक के पद पर कार्यरत था।
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अब विभागीय अधिकारी यह पता लगाने में जुटे हैं कि आय प्रमाण पत्र का उपयोग किस उद्देश्य से किया गया। जांच में यह देखा जा रहा है कि कहीं इसका इस्तेमाल आरटीई के तहत प्रवेश, किसी सरकारी योजना, छात्रवृत्ति अथवा अन्य किसी वित्तीय लाभ प्राप्त करने के लिए तो नहीं किया गया। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
मुख्य शिक्षा अधिकारी हरेंद्र मिश्रा ने बताया कि शिकायत के आधार पर संबंधित अभिलेखों का परीक्षण किया गया है। जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि संबंधित व्यक्ति वर्ष 2013 में सहायक शिक्षक के पद पर कार्यरत था। अब सक्षम स्तर पर यह भी जांच की जा रही है कि आय प्रमाण पत्र का उपयोग किस उद्देश्य से किया गया। यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता या नियमों का उल्लंघन सामने आता है, तो नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
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