उत्तरकाशी के स्यानाचट्टी में फिर मंडराया कृत्रिम झील का खतरा, स्थानीय लोग चिंतित
मानसून की दस्तक के साथ स्यानाचट्टी में यमुना नदी का जलस्तर बढ़ने से फिर कृत्रिम झील बनने का खतरा मंडरा रहा है, जिससे होटल और घरों तक पानी पहुंच गया है ...और पढ़ें

स्यानाचट्टी में यमुना नदी में जलमग्न नदी तट से लगे एक होटल का भूतल। वहीं, स्यानाचट्टी में नदी के तटवर्ती ढाबे तक पहुंचा नदी का पानी। फोटो ओंकार बहुगुणा
HighLights
स्यानाचट्टी में यमुना नदी में कृत्रिम झील बनने का खतरा
बढ़ते जलस्तर से होटल, घरों के भूतल तक पहुंचा पानी
स्थानीय लोगों ने नदी चैनलाइजेशन और मलबा हटाने की मांग की
संवाद सूत्र, बड़कोट (उत्तरकाशी)। मानसून की दस्तक के साथ यमुनोत्री धाम के प्रमुख पड़ाव स्यानाचट्टी में एक बार फिर कृत्रिम झील बनने का खतरा मंडराने लगा है।
यमुना नदी में बढ़े जलस्तर के कारण नदी किनारे स्थित कई होटल, होमस्टे और आवासीय भवनों के भूतल तक पानी पहुंच गया है।
इससे स्थानीय लोगों और कारोबारियों में भय का माहौल है। उनका कहना है कि यदि अगले कुछ दिनों तक इसी तरह वर्षा का सिलसिला जारी रहा तो पिछले वर्ष जैसे हालात दोबारा पैदा हो सकते हैं।

बता दें कि स्यानाचट्टी वही स्थान है, जहां पिछले वर्ष गढ़गाड़ (कुपड़ा गाड़) से भारी मात्रा में मलबा और बोल्डर यमुना नदी में आने से नदी का प्राकृतिक प्रवाह अवरुद्ध हो गया था।
इससे नदी पर कृत्रिम झील बन गई थी, जिसने होटल, घर, जीएमवीएन परिसर, पुलिस चौकी और मोटर पुल तक को अपनी चपेट में ले लिया था।

स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि 300 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना पड़ा था। बाद में सिंचाई विभाग, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और अन्य एजेंसियों ने कई दिनों तक अभियान चलाकर नदी का प्रवाह बहाल किया था।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि पिछले वर्ष की घटना के बाद नदी में जमा मलबा (आरबीएम) पूरी तरह नहीं हटाया गया और न ही स्थायी चैनलाइजेशन का कार्य समय पर किया गया।
उनका कहना है कि समय रहते प्रभावी सुरक्षात्मक कार्य होते तो आज फिर इस तरह का खतरा उत्पन्न नहीं होता।

विशेषज्ञों ने भी पहले चेताया था कि गढ़गाड़ क्षेत्र से लगातार आने वाला मलबा भविष्य में भी यमुना का प्रवाह रोककर झील बनने की स्थिति पैदा कर सकता है, इसलिए नियमित मलबा हटाने और निगरानी की आवश्यकता है।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से तत्काल नदी की चैनलाइजेशन, आरबीएम हटाने और तट सुरक्षा कार्यों में तेजी लाने की मांग की है, ताकि स्यानाचट्टी को दोबारा किसी बड़ी आपदा का सामना न करना पड़े।
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