यमुनोत्री हाईवे पर मानसून की आफत: स्याना चट्टी और हनुमान चट्टी के पास लगातार भूस्खलन
मानसून की हल्की बारिश में यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्याना चट्टी और हनुमान चट्टी के पास भूस्खलन से यातायात बाधित हो रहा है। ...और पढ़ें

भूस्खलन के चलते यमुनोत्री हाईवे पर गिरा बड़ा बोल्डर। स्रोत आपदा प्रबंधन विभाग
HighLights
मानसून में यमुनोत्री हाईवे पर भूस्खलन से यातायात बाधित
स्याना चट्टी और हनुमान चट्टी पर मलबा गिरने से मार्ग बंद
स्थानीय लोगों ने स्थायी सुरक्षा उपायों और जांच की मांग की
संवाद सूत्र, बड़कोट (उत्तरकाशी)। यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग मानसून की दस्तक के साथ हो रही हल्की वर्षा में स्याना चट्टी और हनुमान चट्टी के पास नासूर बनने लगा है।
दोनों स्थानों पर पहाड़ी से लगातार मलबा और बड़े-बड़े पत्थर गिरने के कारण हाईवे पर आए-दिन यातायात बाधित हो रहा है।
शनिवार और रविवार दोनों ही दिन हाईवे खुलने और बंद होने की सूचनाएं आती रही, जहां शनिवार को स्याना चट्टी के पास मार्ग करीब आठ घंटे बंद रहा।
वहीं, रविवार को हनुमान चट्टी के पास हाइवे में बड़े पत्थर गिरने से मार्ग करीब दो घंटे बंद रहा, जिसके कारण दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और श्रद्धालुओं, पर्यटकों तथा स्थानीय लोगों को सड़क खुलने का इंतजार करना पड़ा।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यमुनोत्री हाईवे के चौड़ीकरण के दौरान कई स्थानों पर अत्यधिक कटान किया गया, जिससे पहाड़ी की स्थिरता प्रभावित हुई है।
स्थानीय निवासी शैलेन्द्र राणा, बलदेव सिंह और चित्र मोहन सिंह ने आरोप लगाया कि निर्माण कार्य के दौरान ढलानों का वैज्ञानिक उपचार नहीं किया गया और सुरक्षा मानकों का समुचित पालन नहीं हुआ।
उनका कहना है कि हल्की वर्षा होते ही पहाड़ी से मलबा गिरने लगता है, जिससे स्याना चट्टी क्षेत्र लगातार भूस्खलन की चपेट में आ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि बार-बार हाईवे बंद होने से चारधाम यात्रा के साथ-साथ स्थानीय व्यापार, पर्यटन और क्षेत्रवासियों की दैनिक आवाजाही भी प्रभावित हो रही है।
उन्होंने प्रशासन और संबंधित विभागों से मांग की है कि स्याना चट्टी और हनुमान चट्टी जैसे अतिसंवेदनशील क्षेत्रों में स्थायी सुरक्षा कार्य कराए जाएं।
साथ ही ढलानों का वैज्ञानिक उपचार, मजबूत रिटेनिंग वाल, प्रभावी ड्रेनेज व्यवस्था और चौड़ीकरण कार्य की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाए, ताकि मानसून के दौरान यात्रियों और स्थानीय लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।