30 की उम्र तक नहीं होता इन मूलांक वालों को जिम्मेदारी का अहसास, लगती है ठोकर तब आती है समझ
अंकशास्त्र के अनुसार, मूलांक 8 और 4 वाले जातकों को जीवन के शुरुआती वर्षों में संघर्ष का सामना करना पड़ता है। ये 30 वर्ष की उम्र के बाद अनुभवों से सीखकर अधिक जिम्मेदार और समझदार बनते हैं।

मूलांक 8 और 4 वालों को क्यों देर से मिलती है सफलता। (Picture Credit- AI Generated)मिल

समय कम है?
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धर्म डेस्क, नई दिल्ली। अंकशास्त्र में जन्म की तारीख से निकलने वाले मूलांक को व्यक्ति के लिए बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण माना जाता है। इससे व्यक्ति का स्वभाव और भविष्य दोनों ही पता लग जाते हैं। यहां तक कि मूलांक देखकर अंकशास्त्र से यह भी पता लागाया जा सकता है कि किस उम्र में व्यक्ति को ठोकर मिलेगी और किस में सफलता।
अंकशास्त्र में कुछ मूलांक ऐसे बताए गए हैं, जिनके जातकों को जीवन के शुरुआती वर्षों में संघर्ष, असफलताओं और कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। वहीं इन अनुभवों से सीख लेकर वे उम्र बढ़ने के साथ अधिक जिम्मेदार और समझदार बनते हैं। चलिए इन मूलांकों के बारे में जानते हैं।
मूलांक 8 वालों को देर से आती है समझ
जिन लोगों का जन्म किसी भी महीने की 8, 17 या 26 तारीख को हुआ है, उनका मूलांक 8 माना जाता है। अंक ज्योतिष में इस अंक का संबंध शनि देव से माना जाता है। शनि को कर्म, न्याय और अनुशासन का कारक माना गया है।
ऐसे में मूलांक 8 वाले लोगों को जीवन के शुरुआती दौर में कई बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है। कई बार ये लोग काम को लेकर धीमे और लापरवाह हो जाते हैं। अपनी जिम्मेदारियों के प्रति भी यह कम गंभीर होते हैं।
30 की उम्र के बाद आता है बड़ा बदलाव
अंक ज्योतिष के अनुसार शनि का प्रभाव व्यक्ति को समय के साथ मिच्योर बनाता है। यही वजह है कि मूलांक 8 वालों में 30 वर्ष की उम्र के बाद जिम्मेदारी और गंभीरता बढ़ने लगती है।
जीवन में मिली असफलताएं और संघर्ष इन्हें अपनी गलतियों को समझने का मौका देते हैं। धीरे-धीरे ये अपने काम, परिवार और भविष्य के प्रति अधिक जिम्मेदार हो जाते हैं।
मूलांक 4 वालों का स्वभाव
4, 13, 22 या 31 तारीख को जन्म लेने वाले लोगों का मूलांक 4 माना जाता है। अंक ज्योतिष में इस अंक का संबंध राहु से होता है। ऐसे लोगों को अपनी धुन में रहने वाला और अलग तरीके से सोचने वाला माना जाता है।
शुरुआती उम्र में मूलांक 4 वाले कई बार जल्दबाजी में निर्णय लेते हैं। उनकी योजनाएं हमेशा व्यवस्थित नहीं होतीं और कुछ फैसलों के कारण उन्हें नुकसान या असफलता का सामना करना पड़ सकता है।
ठोकरों से सीखते हैं सही रास्ता
मूलांक 4 वालों के बारे में माना जाता है कि जीवन जब उन्हें कोई बड़ा झटका लगता है और परिस्थितियां खराब होती हैं, तब उन्हें सही और गलत का अंतर समझाते हैं। कई अनुभवों के बाद इनके निर्णय लेने का तरीका बदलने लगता है। 30 की उम्र के बाद इनके जीवन में स्थिरता और जिम्मेदारी बढ़ने की बात कही जाती है।
अत: अंक ज्योतिष की मान्यता के अनुसार, मूलांक 8 और 4 वालों कोसफलता जल्दी नहीं मिलती, बल्कि कई तरह के अनुभव होने के बाद मिलती है।
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