भरत तिवारी के स्मारक पर भोजपुर प्रशासन ने क्यों लगाई रोक? इस नियम का दिया हवाला
भोजपुर जिले के बिलौटी गांव में एनकाउंटर के बाद भरत भूषण तिवारी का स्मारक बनाने को लेकर विवाद बढ़ गया है। प्रशासन ने नियमों का हवाला देकर निर्माण रुकवा ...और पढ़ें

भोजपुर में भरत तिवारी के स्मारक पर प्रशासन ने लगाई रोक। जागरण ग्राफिक्स

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डिजिटल डेस्क, बिलौटी (शाहपुर)। बिहार के भोजपुर जिले में हुआ भरत तिवारी एनकाउंटर इन दिनों काफी चर्चा में है। पुलिस पर आरोप लगे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने तुरंत सुनवाई के बाद सीबीआई जांच कराने से भी इनकार करते हुए याचिकाकर्ता को हाईकोर्ट जाने की सलाह दी है।
इस बीच इस मामले से जुड़ा एक और विवाद उभरकर सामने आया है। यह विवाद भरत तिवारी का स्मारक बनाए जाने को लेकर है। स्मारक बनाए जाने की भनक लगते ही भोजपुर प्रशासन हरकत में आया और इसका काम रुकवा दिया गया।
ऐसे में यह जानना भी जरूरी है कि सोशल मीडिया से लेकर राष्ट्रीय मीडिया तक सुर्खियां बटोरने वाले भरत तिवारी एनकाउंटर से जुड़ा यह विवाद आखिर क्या है? क्यों और किस नियम का हवाला देकर प्रशासन ने स्मारक बनाने पर रोक लगा दी है। आइए इसे विस्तार से जानते हैं...
भरत तिवारी का स्मारक बनाने का फैसला
- भोजपुर में पुलिस ने करीब 13 दिन पहले 17 जून को भरत तिवारी का एनकाउंटर किया था। इससे पहले भरत तिवारी का वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वह पुलिस कर्मियों को पिस्टल दिखाते हुए नजर आया था।
- जिले के बिलौटी गांव के रहने वाले भरत की मौत के बाद विरोध-प्रदर्शन तेज हुआ। परिवार ने न्याय की मांग की। कई नेताओं से लेकर अभिनेता तक भरत के घर पहुंचे थे।
- बीती 24 जून को गांव में भरत तिवारी एनकाउंटर को लेकर महापंचायत भी हुई। इसी क्रम में लोगों की ओर से कथित एनकाउंटर स्थल पर भरत का स्मारक बनाने का फैसला लिया गया था।
कैसा स्मारक बनना था?
भरत तिवारी के स्मारक को लेकर जो जानकारी सामने आई थी उसके अनुसार, कथित एनकाउंटर स्थल पर चबूतरा बनाने का काम शुरू किया गया था। इससे जुड़ी कुछ तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर वायरल हैं।
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परिजनों और स्थानीय लोगों का कहना था कि इस स्मारक के निर्माण का पूरा खर्च उत्तराखंड स्थित एक मठ के स्वामी आनंद स्वरूप महाराज उठा रहे थे।
वह करीब एक सप्ताह पहले भरत के परिवार से मिलने बिलौटी गांव भी गए थे। बताया गया है कि पहले चरण में आठ गुणा आठ वर्ग फीट का संगमरमर का चबूतरा बनना था।
इसके बाद इसी चबूतरे पर भरत भूषण तिवारी की सफेद संगमरमर से बनी आदमकद प्रतिमा स्थापित करने की भी योजना बनाई गई थी।
इसके साथ ही स्मारक परिसर को आकर्षक स्वरूप देने की भी तैयारी की जा रही थी, ताकि लोग वहां पहुंचें और श्रद्धांजलि अर्पित कर सकें। इसके लिए पहली ईंट भी रख दी गई थी।

स्मारक को लेकर क्या हुआ विवाद
भरत भूषण तिवारी का स्मारक निर्माण फिलहाल विवादों में है। मुख्य रूप से देखा जाए तो इसे लेकर 2 आपत्तियां सामने आई हैं। पहली जिला प्रशासन और दूसरी एनकाउंटर वाली जगह के बगल में मौजूद निजी जमीन के मालिक की ओर से आई है।
जिला प्रशासन की ओर से शाहपुर के अंचलाधिकारी आनंद प्रकाश ने इस संबंध में कहा है कि जिस भूमि पर स्मारक निर्माण शुरू हुआ था, उसे रुकवा दिया गया है।
स्मारक को लेकर क्या हैं आपत्तियां
- पहली आपत्ति: शाहपुर के अंचलाधिकारी ने स्मारक का काम रुकवाने के पीछे नियम का हवाला दिया है। उनका कहना है कि वह बिहार सरकार की भूमि है। नियम के तहत किसी भी सरकारी भूमि पर बिना अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) के कोई निर्माण नहीं कराया जा सकता।
- दूसरी आपत्ति: स्मारक बनाए जाने वाली जगह से सटी हुई एक निजी भूमि है। इस जमीन के रैयत ने अपनी आपत्ति में कहा है कि स्मारक सड़क के बीच में बनाया जाए, फिर सड़क का विस्तार उनकी जमीन की ओर नहीं किया जाए।
बहारहाल, भूमि संबंधी इन दोनों आपत्तियों का हल निकलने तक भरत तिवारी के स्मारक का काम ठप रहेगा।
स्मारक निर्माण के लिए क्या कहते हैं नियम?
- किसी भी व्यक्ति का सार्वजनिक स्मारक स्थापित करने के लिए निर्धारित प्रशासनिक प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य होता है।
- सबसे पहले स्थानीय प्रशासन या जिलाधिकारी के समक्ष इससे जुड़ा प्रस्ताव प्रस्तुत करना पड़ता है, जिसमें स्मारक का उद्देश्य, आकार, डिजाइन और स्थान का पूरा विवरण देना होता है।
- यदि भूमि सरकारी है तो राजस्व विभाग या संबंधित विभाग से अनुमति लेनी होती है। सड़क, चौराहे या सार्वजनिक स्थल पर स्मारक स्थापित करने की स्थिति में यातायात पुलिस अथवा सड़क निर्माण विभाग से अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) लेना भी आवश्यक होता है।
- प्रशासन यह भी सुनिश्चित करता है कि स्मारक से यातायात, आमजन की आवाजाही या सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित न हो। साथ ही स्मारक के रखरखाव की जिम्मेदारी किसकी होगी, इसका स्पष्ट उल्लेख भी प्रस्ताव में करना होता है।
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