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    बेंगलुरु का 30 लाख सैलरी वाला सॉफ्टवेयर इंजीनियर बना साइबर ठग, 636 लोगों से ठगे 100 करोड़; बना रखा था कॉलसेंटर

    Updated: Mon, 11 May 2026 08:00 PM (IST)

    सालाना 30 लाख रुपये कमाने वाला सॉफ्टवेयर इंजीनियर कमाई से नाखुश हो गया और ऑनलाइन ठगी का ऐसा रास्ता चुना कि उसने अपने साथियों के साथ मिलकर सैकड़ों लोगो ...और पढ़ें

    पुलिस की गिरफ्त में आरोपित व बरामद किया गया मोबाइल, लैपटाॅप सहित अन्य सामान। सौजन्य: दिल्ली पुलिस

    पुलिस की गिरफ्त में आरोपित व बरामद किया गया मोबाइल, लैपटाॅप सहित अन्य सामान। सौजन्य: दिल्ली पुलिस

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    जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। बेंगलुरु की मल्टी नेशनल कंपनी में नौकरी कर सालाना 30 लाख रुपये कमाने वाला सॉफ्टवेयर इंजीनियर कमाई से नाखुश हो गया और ऑनलाइन ठगी का ऐसा रास्ता चुना कि उसने अपने साथियों के साथ मिलकर सैकड़ों लोगों से करीब 100 करोड़ की ठगी कर डाली। मध्य जिले की साइबर थाना पुलिस की टीम ने फर्जी ऑनलाइन निवेश योजनाओं में मोटा मुनाफा कमाने का लालच देकर ठगी करने वाले गिरोह का भंडाफोड़ कर मध्य जिले की साइबर थाना पुलिस की टीम ने तीन जालसाजों को गिरफ्तार किया है।

    14,232 लेनदेन के जरिये लगभग 99.77 करोड़ की ठगी

    जालसाज मध्य प्रदेश के सनावद में काॅल सेंटर चला रहे थे। वहां महिला टेलीकाॅलर्स को काम पर रखा गया था, जहां से धोखाधड़ी के लिए म्यूल बैंक अकाउंट, वाट्सएप नंबरों और फर्जी सर्वर इंफास्ट्रक्चर का इस्तेमाल किया जा रहा था। तकनीकी विश्लेषण से पता चला कि इस फर्जी प्लेटफार्म के जरिए आरोपित लगभग 636 पीड़ितों के खातों से 14,232 लेनदेन के जरिये लगभग 99.77 करोड़ की ठगी की रकम ठिकाने लगा चुके हैं।

    लोगों को कैसे दिलाते थे भरोसा?

    यह गिरोह फर्जी 'ट्रेड मेकर एल्गो' नामक मोबाइल एप और फर्जी वेबसाइट 'ट्रेडमेकरएल्गाइंवेस्टेमेंट.काम' का इस्तेमाल कर वाट्सएप काॅल या मैसेज करके लोगों को झांसे में लेते थे। गिरफ्तार आरोपितों की पहचान गीदलाहली, बेंगलुरु के रवि राठौड़, खंडवा, मध्य प्रदेश के विकास राठौड़ और सुदामा के रूप में हुई है। इनके कब्जे से चार सीपीयू, तीन लैपटाॅप, आठ स्मार्टफोन, 11 कीपैड वाले मोबाइल, बैंक पासबुक, एक महिंद्रा स्काॅर्पियो-एन सहित अन्य दस्तावेज बरामद हुए हैं।

    पुलिस तक कैसे पहुंची ठगी की बात?

    मध्य जिले के उपायुक्त रोहित राजबीर सिंह के मुताबिक, नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर पहाड़गंज में रहने वाले पीड़ित ने शिकायत दर्ज कराते हुए बताया कि कुछ अज्ञात लोगों ने वाट्सएप काॅल और मैसेज के जरिए उनसे संपर्क किया।

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    जालसाजों ने 'एल्गो ट्रेडिंग साफ्टवेयर' के जरिए शेयर बाजार ट्रेडिंग में मुनाफे का झांसा देकर गूगल प्ले स्टोर के एक लिंक से 'ट्रेडमेकरएल्गो' नामक मोबाइल एप डाउनलोड कराई और एप में बने क्यूआर कोड के जरिये दस हजार ट्रांसफर करा लिए।

    इसके बाद जब लगातार और रुपये ट्रांसफर कराने का दबाव डाला गया तो पीड़ित को ठगी का पता चला और साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत की। एक मई को पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

    आईपी ट्रैकिंग ने खोले राज

    जांच के दौरान तकनीकी विश्लेषण, वित्तीय लेनदेन की जांच, आईपी ट्रैकिंग से पता चला कि इस एप का कंट्रोल पैनल बेंगलुरु से संचालित किया जा रहा था, जबकि काॅल आपरेशंस और रुपयों का लेनदेन सनावद से जुड़ा हुआ था।

    आरोपितों को पकड़ने के लिए दो अलग-अलग टीमें गठित की गईं। पहली टीम बेंगलुरु रवाना हुई और तीन मई को तकनीकी निगरानी के आधार पर आरोपित रवि राठौड़ को दबोचा गया। उसके पास से दो लैपटाप, एक मोबाइल और एक महिंद्रा स्काॅर्पियो-एन कार बरामद हुई जो उसने अपराध से कमाए गए पैसों से खरीदी थी।

    फिर कॉल सेंटर पर की गई छापेमारी

    इसके बाद पांच मई को दूसरी टीम सनावद, जिला खरगोन पहुंची और सह-आरोपित सुदामा और विकास राठौड़ को गिरफ्तार किया, जो ठगी के लिए काॅल सेंटर चला रहे थे। ऑफिस की जगह की तलाशी के दौरान, 17 मोबाइल, चार कंप्यूटर, एक लैपटाप, 13 सिम कार्ड, हजारों पीड़ितों के मोबाइल नंबरों वाला डेटा, बैंक खाते की जानकारी, एटीएम कार्ड सहित अन्य दस्तावेज बरामद हुए।

    ऐसे बंटा हुआ था काम

    कंप्यूटर साइंस इंजीनियर रवि राठौर बेंगलुरु में रहकर एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में कार्यरत था और सालाना करीब 30 लाख रुपये कमा रहा था। नौकरी से नाखुश उसने ठगी का रास्ता अपनाया और वही फर्जी मोबाइल एप और वेबसाइट विकसित व संचालित करता था। वहीं बीकाम कर चुके विकास और सुदामा पीड़ितों से संपर्क कर निवेश के लिए उकसाने और ठगी की रकम को विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर कराने का काम करते थे।

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