दिल्ली BJP में गुटबाजी, प्रदेश अध्यक्ष पद के फेर में फंसे MCD वार्ड कमेटी चुनाव, जानें इस कलह की इनसाइड स्टोरी
दिल्ली भाजपा में प्रदेश अध्यक्ष को लेकर चल रही गुटबाजी के कारण एमसीडी वार्ड समितियों और स्थायी समिति का गठन अनिश्चितकाल के लिए टल गया है। इस स्थगन से ...और पढ़ें

दिल्ली एमसीडी वार्ड कमेटी चुनाव टलने से विकास कार्यों पर पड़ेगा असर। फोटो: आर्काइव
HighLights
भाजपा में गुटबाजी के कारण चुनाव अनिश्चितकाल के लिए स्थगित
वार्ड व स्थायी समिति गठन टलने से विकास कार्य रुकेंगे
विपक्ष ने इसे एमसीडी अधिनियम का खुला उल्लंघन बताया
निहाल सिंह, नई दिल्ली। एमसीडी की वार्ड कमेटियों और स्थायी समिति का गठन अनिश्चितकाल के लिए टल गया है। निगम सचिव कार्यालय ने अगले आदेश तक चुनावी प्रक्रिया को स्थगित कर दिया है। पहले भी इसकी तिथि बढ़ाकर 23 मई से तीन जून किया गया था।
ऐसे में अब ये चुनाव कब होंगे कहना मुश्किल है। क्योंकि, इसकी राह भाजपा में गुटबाजी आड़े आ रही है। पार्टी सूत्र बताते हैं कि दिल्ली भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा का कार्यकाल खत्म होने का अंदेशा लगाकर पार्टी का एक धड़ा नए अध्यक्ष की घोषणा तक चुनाव नहीं कराना चाहता है।
एक सांसद के हाथ में है विरोधी धड़े का नेतृत्व
विरोधी धड़े का नेतृत्व एक सांसद के हाथ में है, जिसकी स्थिति पार्टी की दिल्ली में सत्ता में आने पर मजबूत हुई है। पार्टी सूत्र के अनुसार, विरोधी गुट चाहता है कि नया अध्यक्ष बने तो अपने खेमे के पार्षदों को प्रमुख पदों पर पहुंचाया जाए। उसमें वार्ड कमेटी के चेयरमैन और डिप्टी चेयरमैन के साथ स्थायी समिति के चेयरमैनों का पद है।
आम तौर पर अप्रैल में महापौर व उप महापौर की चुनावी प्रक्रिया के बाद मई-जून में पहले वार्ड कमेटियों, फिर स्थायी समिति और उसके बाद तदर्थ और विशेष समितियों का गठन होता है। लेकिन बिना किसी ठोस वजह से निगम ने ये चुनाव टाल दिए हैं। इस मामले में पूछे जाने पर भी महापौर प्रवेश वाही तथा निगम सचिव व प्रेस एव सूचना निदेशक अनिल यादव का कोई उत्तर नहीं आया।
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हैरानी यह कि जिन वार्ड कमेटियों के चुनाव भाजपा राज में टले हैं उन्हीं के गठन को मुद्दा बनाकर विपक्ष में होते हुए भाजपा सत्ता में पहुंची है। वर्ष 2023 में आप की तत्कालीन सरकार ने ये चुनाव नहीं होने दिए थे, तब वर्ष 2024 में उपराज्यपाल के हस्तक्षेप से निगमायुक्त के जोनल उपायुक्तों को पीठासीन अधिकारी बनाकर ये चुनाव संपन्न कराए गए थे।
स्थायी समिति का गठन भी हुआ लंबित
वार्ड कमेटियों के चुनाव टलने से निगम की सर्वोच्च स्थायी समिति का गठन भी लंबित हो गया है। क्योंकि, जब तक छह वार्ड कमेटियों से स्थायी समिति के सदस्यों का चुनाव नहीं होगा तब तक स्थायी समिति का गठन नहीं होगा। ऐसे में निगम के नीतिगत विषयों जैसे लैंडफिल साइट, नए निर्माण परियोजनाओं को मंजूरी मिलने में देरी होगी।
अगले माह स्थायी समिति का कार्यकाल भी पूरा हो जाएगा। इससे स्थायी समिति के चेयरमैन के पास अग्रिम मंजूरी (एंटीसिपेशन एप्रूवल) देने का अधिकार भी नहीं होगा। वैसे तो निगम आयुक्त की वित्तीय शक्ति 50 करोड़ है, लेकिन कई मामलों में रेट एंड एजेंसी के चुनाव का अधिकार स्थायी समिति के पास है। इससे ऐसे मामले आने पर कार्य नहीं हो सकेंगे।
क्या हैं वार्ड कमेटियां
एमसीडी में 12 जोन हैं। प्रत्येक जोन में एक उपायुक्त होता है जबकि उसके ऊपर जन प्रतिनिधि के तौर पर चेयरमैन और डिप्टी चेयरमैन होता है। इसका चुनाव उस जोन में आने वाले पार्षद और एल्डरमैन के वोट द्वारा होता है। इस समिति को जोन के मुद्दों पर निर्णय लेने, नीति बनाने और एक करोड़ तक के विकास कार्य कराने का अधिकार होता है।
चुनाव टालना एमसीडी एक्ट की धारा 53(2) का खुला उल्लंघन है। क्योंकि बिना चेयरमैन की सहमति के चुनाव की नई तारीख और स्थगित करने का निर्णय नहीं हो सकता है। ऐसे में जब आप के शासित चार जोन के चेयरमैन ने चुनाव टालने की बात को लिखकर नहीं दिया तो फिर निगम सचिव ने किसके कहने पर यह निर्णय लिया है।
भाजपा की एमसीडी में चेयरमैन को लेकर अंदरूनी लड़ाई, बंदरबांट और सौदेबाजी चरम पर है। अपने ही पार्षदों की नाराज़गी से डरी भाजपा अब चुनाव कराने से भाग रही है।
- अंकुश नारंग, नेता प्रतिपक्ष, एमसीडी
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