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    दिल्ली बजट 2026-27 से स्टाफ भर्ती और बेड बढ़ोतरी की आस, सरकारी अस्पतालों में हर तीसरा डॉक्टर पद खाली

    Updated: Sat, 21 Mar 2026 11:01 PM (IST)

    दिल्ली सरकार का 2026-27 का बजट स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। वर्तमान में, सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों और पैरा-मेडिकल स्टाफ की भारी कमी है ...और पढ़ें

    दिल्ली सरकार का बजट (2026–27) राष्ट्रीय राजधानी की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए एक निर्णायक साबित हो सकता है। प्रतीकात्मक तस्वीर

     दिल्ली सरकार का बजट (2026–27) राष्ट्रीय राजधानी की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए एक निर्णायक साबित हो सकता है। प्रतीकात्मक तस्वीर

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    अनूप कुमार सिंह, नई दिल्ली। उम्मीद है कि दिल्ली सरकार का बजट (2026–27) राष्ट्रीय राजधानी की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए एक निर्णायक साबित हो सकता है। दिल्ली सरकार के 38 अस्पताल, 319 आयुष्मान आरोग्य मंदिर (एएएम) और बची हुई करीब 30 सक्रिय मोहल्ला इकाइयां यहां की स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ हैं पर, सरकारी आंकड़े, कैग (सीएजी) रिपोर्ट और जमीनी हालात बता रहे हैं कि ज्यादा मरीज बोझ के कारण भारी दबाव में है।

    मरीजों को वास्तविक राहत मिलेगी

    चिकित्सकों सहित पैरा-मेडिकल स्टाफ, मरीजों के सापेक्ष बेड की कमी और यहां के कमजोर प्राथमिक स्वास्थ्य ढांचे से मरीजों की देखभाल और उपचार गंभीर रूप से प्रभावित हो रही है। मोहल्ला स्तर की स्वास्थ्य सेवाओं के कमजोर पड़ने से मरीजों को सीधे बड़े अस्पतालों पर निर्भर होना पड़ रहा है, जिससे वहां भीड़ और दबाव बढ़ गया है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि दिल्ली सबसे बड़ी चुनौती संसाधनों और स्टाफ की कमी से ज्यादा उनके सही और संपूर्ण उपयोग की है। अगर बजट का पूरा उपयोग, तेज भर्ती और इंफ्रास्ट्रक्चर का समय पर निर्माण सुनिश्चित हो तो ही मरीजों को वास्तविक राहत मिलेगी।

    पिछला बजट: बड़ा आवंटन पर, पूरा खर्च नहीं

    दिल्ली सरकार के पिछले बजट (2025–26) में स्वास्थ्य ढांचे में सुधार के लिए 12, 893 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था, जिसमें दो मेडिकोज सहित, नए अस्पताल, अस्पतालों में बेड बढ़ाना, मोहल्ला स्तर की स्वास्थ्य सेवाओं और स्टाफ भर्ती पर विशेष जोर दिया गया था।

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    हालांकि, कैग रिपोर्ट और दिल्ली सरकार के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार डाॅक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की भर्ती के लिए आवंटित राशि का बड़ा हिस्सा खर्च नहीं हो सका, दवाइयों और उपकरणों के लिए दिए गए बजट का भी पूर्ण उपयोग नहीं हुआ और कई अस्पताल प्रोजेक्ट्स समय पर पूरे नहीं हो पाए।

    दो मेडिकल काॅलेज खोले जाने का मामला भी अधर में ही है। यानी समस्या केवल बजट की कमी नहीं, बल्कि उसके प्रभावी उपयोग की भी है, जो अब नए बजट के लिए बड़ी चुनौती बनकर सामने है।

    सरकारी अस्पतालों में स्टाफ का संकट

    दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में डाक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की कमी बड़ी समस्या बनी हुई है। हर तीसरा पद खाली है।

    • डाॅक्टर पद: 1364 में से 234 रिक्त (करीब 17 प्रतिशत)
    • नाॅन-टीचिंग विशेषज्ञ: 729 में से 281 रिक्त
    • टीचिंग विशेषज्ञ: 583 में से 132 रिक्त

    इसका सीधा असर ओपीडी में लंबी कतारें, इमरजेंसी में देरी और गंभीर मरीजों के उपचार पर पड़ रहा है।

    बिस्तर और इंफ्रास्ट्रक्चर: मानक से आधी क्षमता पर दिल्ली

    • सरकारी अस्पतालों में बिस्तर: 14,244
    • कुल बिस्तर: 57,686
    • प्रति 1,000 आबादी पर बिस्तर: 2.7 (डब्ल्यूएचओ मानक: 5)

    यानी दिल्ली सरकार के सरकारी अस्पतालों यह सुविधाएं अभी भी मानक का लगभग आधा ही है। यही नहीं आइसीयू, सीसीयू, आपरेशन थिएटर और ओपीडी सुविधाएं कई अस्पतालों में मरीजों की संख्या के सामने कम पड़ रही हैं। हालांकि, ज्वालापुरी, मादीपुर, हस्तसाल और सिरासपुर जैसे प्रोजेक्ट्स के पूरा होने से दिल्ली के सरकारी अस्पतालों में 3,237 नए बेड जुड़ने से व्यवस्था में सुधार की उम्मीद है।

    बजट 2026–27 से उम्मीदें

    • बजट का पूरा और प्रभावी उपयोग : पिछले वर्षों की तरह फंड का अप्रयुक्त रह जाना न हो, इस पर रहे सबसे ज्यादा जोर।
    • स्टाफ और विशेषज्ञ सेवाओं का विस्तार : रिक्त पदों की तेज भर्ती और विशेषज्ञ विभागों को मजबूत करना।
    • बिस्तर और इंफ्रास्ट्रक्चर वृद्धि : आईसीयू, सीसीयू और आपरेशन थिएटर क्षमता बढ़ाना और अधूरे प्रोजेक्ट्स पूरा करना।
    • डिजिटल स्वास्थ्य प्रणाली : रीयल-टाइम बेड और सेवाओं की उपलब्धता के लिए एकीकृत प्लेटफाॅर्म।
    • मरीज केंद्रित सुधार और सस्ता उपचार : समय पर उपचार, दवाइयों की उपलब्धता और खर्च में कमी।

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