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    जमानत मिलने के बाद भी रिहाई में देरी, दिल्ली हाई कोर्ट ने जेलों को आधार QR कोड से सत्यापन का दिया आदेश

    Updated: Wed, 27 May 2026 09:59 PM (IST)

    दिल्ली हाई कोर्ट ने जमानत मिलने के बावजूद कैदियों की रिहाई में हो रही देरी पर स्वतः संज्ञान लिया है। अदालत ने जेल अधीक्षकों को आधार क्यूआर कोड-आधारित ...और पढ़ें

    जमानत के आदेश पारित होने के बाद जेल अधिकारियों द्वारा सत्यापन में औसतन एक से दो सप्ताह का समय लग रहा।

    जमानत के आदेश पारित होने के बाद जेल अधिकारियों द्वारा सत्यापन में औसतन एक से दो सप्ताह का समय लग रहा।

    HighLights

    1. जमानत के बावजूद कैदियों की रिहाई में देरी पर कोर्ट चिंतित।

    2. दिल्ली हाई कोर्ट ने आधार क्यूआर कोड सत्यापन का निर्देश दिया।

    3. जेल अधीक्षकों को रिहाई प्रक्रिया तेज करने के लिए कहा।

    विनीत त्रिपाठी, नई दिल्ली। जमानत का आदेश मिलने के बावजूद कैदियों की रिहाई में हो रही देरी के मुद्दे का स्वत: संज्ञान लेकर सुनवाई कर रहे दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि जमानत मुचलका स्वीकार करने में देरी से जमानत के आदेशों का मूल मकसद ही खत्म हो जाता है।

    सत्यापन में लग रहे दो सप्ताह

    न्यायमूर्ति प्रतिबा एम सिंह व न्यायमूर्ति अमित महाजन की पीठ ने राष्ट्रीय राजधानी के सभी जेल अधीक्षकों को निर्देश दिया है कि वे कैदियों की रिहाई में तेजी लाने के लिए आधार क्यूआर कोड-आधारित सत्यापन का इस्तेमाल करें। पीठ ने पाया कि अदालत के सामने रखे गए डेटा से पता चलता है कि जमानत के आदेश पारित होने के बाद जेल अधिकारियों द्वारा सत्यापन में औसतन एक से दो सप्ताह का समय लग रहा था।

    दो माह तक इंतजार करने के भी मामले

    अदालत ने नोट किया कि दिए गए डेटा को देखने से पता चलता है कि जमानत के आदेश की तारीख से औसतन एक से दो सप्ताह का समय जेल अधीक्षक को विवरणों को सत्यापित करने के लिए चाहिए होता है।

    पीठ ने कहा कि पहली नजर में, जमानत के आदेश मिलने के बाद दोषी या विचाराधीन कैदियों की रिहाई के बीच का औसत समय लगभग पांच से छह दिन है और कई मामलों में व्यक्ति को एक दिन के भीतर ही रिहा कर दिया जाता है; जबकि, कुछ मामलों में देरी 33 दिन या 56 दिन तक भी हो जाती है।

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    ईमेल-आधारित सत्यापन ज्यादा तेजी से मिल रहा

    अदालत ने इस मामले में कार्यवाही 19 फरवरी 2024 को एक एकल पीठ द्वारा पारित एक आदेश से शुरू हुई थी। इसमें इस बात पर गंभीर संज्ञान लिया गया था कि सजा निलंबित होने और जमानत मिलने के एक सप्ताह बाद भी एक कैदी को रिहा नहीं किया गया था।

    सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने कोर्ट को बताया कि पहले सत्यापन के लिए पुलिस कर्मियों को बैंकों और जमानतदारों के पतों पर जाकर भौतिक रूप से जाच करनी पड़ती थी। हालाकि, अब बैंकों से ईमेल-आधारित सत्यापन ज्यादा तेजी से मिल रहा है।

    शीघ्र जवाब देने की अपेक्षा

    इस पर कोर्ट ने निर्देश दिया कि सभी जेल अधीक्षक, आधार क्यूआर स्कैनर एप, एमआधार एप और आधार एप जैसे एप्लिकेशन का उपयोग करके आधार कार्ड पर क्यूआर कोड स्कैनिंग के माध्यम से जमानतदारों और संबंधित प्रमाण पत्रों का सत्यापन करेंगे।

    अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि जमानत के तौर पर जमा की गई फिक्स्ड डिपाजिट या मौद्रिक साधनों का सत्यापन बैंकों और वित्तीय संस्थानों के साथ ईमेल संचार के माध्यम से जारी रहेगा। इनसे शीघ्र जवाब देने की अपेक्षा की जाती है।

    अब 14 अगस्त को होगी सुनवाई

    पीठ ने कहा कि भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) भी एक हलफनामा दायर कर बताए कि गृह मंत्रालय को दी गई मंजूरी को देश की सभी जेलों में किस तरह लागू किया जा रहा है।

    हलफनामा में यह भी बताया जाए कि पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट, साथ ही कर्नाटक हाई कोर्ट द्वारा दिए गए निर्देशों को, आधार के माध्यम से प्रमाणीकरण/सत्यापन के लिए संबंधित ट्रायल कोर्ट में किस तरह लागू किया जा रहा है। उक्त निर्देश के साथ अदालत ने मामले की सुनवाई 14 अगस्त तक के लिए स्थगित कर दी।

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