जामताड़ा की तर्ज पर इंदौर से चल रहा था साइबर ठगी का बड़ा नेटवर्क, 3 महीने में दूसरे बड़े कॉल सेंटर का भंडाफोड़
दिल्ली पुलिस ने इंदौर में शेयर ट्रेडिंग और फॉरेक्स में अधिक मुनाफे का झांसा देकर ठगी करने वाले एक बड़े साइबर गिरोह का भंडाफोड़ किया है। द्वारका जिला स ...और पढ़ें

फर्जी कॉल सेंटर चलाने वाले पकड़े गए। फोटो: दिल्ली पुलिस
जागरण संवाददाता, पश्चिमी दिल्ली। देश के सबसे स्वच्छ शहर के रूप में पहचान बना चुका इंदौर अब जामताड़ा की तरह साइबर ठगी के नए ठिकाने के रूप में भी उभरता दिखाई दे रहा है।
पिछले तीन माह के भीतर दिल्ली पुलिस ने इंदौर में संचालित साइबर ठगी के दो बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। पहले पश्चिमी जिला साइबर थाना ने फर्जी एक्सपोर्ट कॉल सेंटर का पता लगाया था, जबकि अब द्वारका जिला साइबर थाना ने शेयर बाजार और फारेक्स ट्रेडिंग में अधिक मुनाफे का झांसा देकर ठगी करने वाले अंतरराज्यीय साइबर गिरोह का भंडाफोड़ किया है।
ताजा मामले में द्वारका जिला साइबर थाना पुलिस ने इंदौर स्थित मारी माता चौक के पास एक शापिंग काम्प्लेक्स में संचालित अवैध कॉल सेंटर पर कार्रवाई कर छह आरोपितों को गिरफ्तार किया।
इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और डाटा बरामद
मौके से 28 सीपीयू, 25 मोबाइल फोन, दो वाई-फाई राउटर, एक डीवीआर और एक ऑडियो-कम-वीडियो रिकार्डिंग कैमरा बरामद किया गया। जब्त किए गए कंप्यूटरों से 1,400 से अधिक स्प्रेडशीट मिली हैं, जिनमें हजारों लोगों के नाम, मोबाइल नंबर, पैन, ई-मेल और बैंक खातों से जुड़ी जानकारी संग्रहीत थी।
फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म से लगाया चूना
पुलिस के अनुसार, कार्रवाई उत्तम नगर निवासी सुनील कुमार से 17.30 लाख रुपये की साइबर ठगी के मामले की जांच के दौरान की गई। पांच जुलाई को दर्ज शिकायत में पीड़ित ने बताया था कि उसे पहले भारतीय शेयर बाजार में निवेश कर अधिक लाभ कमाने का भरोसा दिलाया गया।
इसके बाद एक फर्जी अंतरराष्ट्रीय फारेक्स ट्रेडिंग प्लेटफार्म पर निवेश कराया गया। शुरुआत में पोर्टल पर लगातार मुनाफा दिखाकर उसका भरोसा जीता गया और कई चरणों में निवेश कराया गया। बाद में रकम निकॉलने का प्रयास करने पर पहले बहाने बनाए गए और फिर ट्रेडिंग में नुकसान दिखाकर पूरी राशि हड़प ली गई।
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डाटा खरीदकर बनाते थे लोगों को निशाना
तकनीकी जांच के दौरान आरोपितों की लोकेशन इंदौर में मिली। पुलिस टीम ने छापेमारी कर उस कॉल सेंटर का पता लगाया, जहां एक नामी निवेश कंपनी के नाम का इस्तेमाल कर लोगों को फोन किए जाते थे।
जांच में सामने आया कि गिरोह अवैध माध्यमों से पहले से शेयर बाजार में निवेश करने वाले लोगों का डाटा खरीदता था। इसके बाद अधिक मुनाफे का लालच देकर उन्हें फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफार्म पर निवेश कराया जाता था। गिरफ्तार सभी आरोपित पिछले दो से चार माह से कॉल सेंटर में काम कर रहे थे।
उन्हें 10 हजार से 14,500 रुपये मासिक वेतन के अलावा ठगी गई राशि का लगभग 10 प्रतिशत कमीशन नकद दिया जाता था।
जब्त डाटा के विश्लेषण में अब तक महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, कर्नाटक और बिहार समेत कई राज्यों की 54.70 लाख रुपये से अधिक की एनसीआरपी शिकायतों का संबंध इस गिरोह से मिला है। गिरोह के सरगना और अन्य सहयोगियों की पहचान कर ली गई है तथा उनकी तलाश जारी है।
तीन माह में इंदौर से जुड़े दो बड़े नेटवर्क का पता
दिल्ली पुलिस की जांच में यह लगातार दूसरा मामला है, जिसमें साइबर ठगी का बड़ा नेटवर्क इंदौर से संचालित मिलता है। 22 मई को पश्चिमी जिला साइबर थाना ने इंदौर में संचालित फर्जी एक्सपोर्ट कॉल सेंटर का पता लगाकर नौ आरोपितों को गिरफ्तार किया था।
यह गिरोह विदेशी खरीदार उपलब्ध कराने तथा आईएसओ, सीटीपैट और आईईसी प्रमाणपत्र बनवाने के नाम पर व्यापारियों से ठगी कर रहा था।
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