जागरण संपादकीय: बाड़ खेत को खाए
खराब बात यह भी रही कि प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया की सीसीटीवी से सटीक निगरानी भी नहीं की गई। समझना कठिन है कि आरोपित शिक्षकों को पूरा प्रश्नपत्र तैयार करने और उनका अनुवाद करने की सुविधा क्यों दी गई?
HighLights
एनटीए के तीन विशेषज्ञों ने ही नीट पेपर लीक किया।
गोपनीय प्रश्नपत्र तैयार करते समय बिचौलियों को सामग्री दी गई।
एनटीए की लापरवाही से परीक्षा में सेंध लगाना आसान हुआ।
नीट पेपरलीक मामले में सीबीआइ की ओर से दी गई यह जानकारी चौंकाने वाली है कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के तीन विषय विशेषज्ञों ने ही प्रश्नपत्र लीक किए थे। इन्होंने गोपनीय प्रश्न तैयार करने और अनुवाद की प्रक्रिया के दौरान परीक्षा सामग्री बाहर निकाली और उसे बिचौलियों के माध्यम से उन अभ्यर्थियों तक पहुंचाया, जो छल-कपट से नीट पास करना चाह रहे थे। इनका साथ कोचिंग चलाने वालों ने भी दिया। ये तीनों शिक्षक थे, जो एनटीए को अपनी सेवाएं दे रहे थे।
साफ है कि जिन पर परीक्षा की गोपनीयता बनाए रखने की जिम्मेदारी थी, उन्होंने ही उसमें सेंध लगाने का काम किया। यह एक तरह से बाड़ खेत को खाए वाला ही मामला है। इससे बड़ी विडंबना और कोई नहीं हो सकती कि जिम्मेदार लोग ही गैर-जिम्मेदारी का परिचय दें। इन शिक्षकों ने अपनी हरकतों से 22 लाख से अधिक छात्रों को दोबारा परीक्षा देने के लिए बाध्य ही नहीं किया, एनटीए की बदनामी भी कराई और सरकार के सामने मुसीबत भी खड़ी की।
इससे संतुष्ट नहीं हुआ जा सकता कि पेपरलीक रोधी कानून को बेहद कठोर बनाया गया है और नीट पेपरलीक मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक अदालत को सौंप दी गई है, क्योंकि बात तब बनेगी जब पेपरलीक के दोषियों को यथाशीघ्र कठोर दंड मिलेगा। यह सजा ऐसी होनी चाहिए, जो नजीर बन सके और परीक्षा में सेंध लगाने वालों के मन में भय पैदा कर सके।
नीट पेपरलीक मामले में यह भी ध्यान रहे कि एनटीए को सेवाएं दे रहे शिक्षक अपने नापाक इरादे में इसलिए कामयाब नहीं रहे, क्योंकि वे बुरी नीयत वाले थे। वे इसलिए भी कामयाब हुए, क्योंकि एनटीए ने परीक्षा की गोपनीयता बनाए रखने के लिए बुनियादी आवश्यक उपाय नहीं किए। उसने प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया ऐसी रखी कि आरोपित शिक्षकों की सभी प्रश्नों तक पहुंच बहुत आसान हो गई।
खराब बात यह भी रही कि प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया की सीसीटीवी से सटीक निगरानी भी नहीं की गई। समझना कठिन है कि आरोपित शिक्षकों को पूरा प्रश्नपत्र तैयार करने और उनका अनुवाद करने की सुविधा क्यों दी गई? यह प्रश्न भी अनुत्तरित है कि नीट प्रश्नपत्र के कई सेट क्यों नहीं तैयार किए गए?
ऐसा लगता है कि एनटीए के वरिष्ठ अधिकारी इससे परिचित ही नहीं थे कि परीक्षा में सेंध लगाने वाला एक माफिया पैदा हो गया है, जिसमें कोचिंग चलाने वालों के साथ शिक्षक भी शामिल हो सकते हैं। यह प्रकरण इसकी ओर भी संकेत करता है कि जिन शिक्षकों से परीक्षाओं की शुचिता बनाए रखने के मामले में उदाहरण पेश करने की अपेक्षा की जाती है, वही नैतिकता को तिलांजलि देने वाले अपराधी निकले। स्पष्ट है कि यह समाज में नैतिकता में गिरावट को भी रेखांकित करता है।




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