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    Ranveer Singh की 'पत्नी' का दिया था ऑडिशन, बन गईं बहन... दोस्तों के कहने पर फिल्मों में आईं Deeksha Joshi

    By Deepesh PandeyEdited By: Rinki Tiwari
    Updated: Fri, 05 Jun 2026 04:59 PM (IST)

    अभिनेत्री दीक्षा जोशी (Deeksha Joshi) ने गुजराती फिल्मों से टीवी धारावाहिक 'पुष्पा: इंपॉसिबल' तक के अपने सफर पर बात की। ...और पढ़ें

    दीक्षा जोशी ने रणवीर सिंह की फिल्म के लिए दिया था ऑडिशन। फोटो क्रेडिट- इंस्टाग्राम

    दीक्षा जोशी ने रणवीर सिंह की फिल्म के लिए दिया था ऑडिशन। फोटो क्रेडिट- इंस्टाग्राम

    HighLights

    1. गुजराती फिल्मों से टीवी सीरियल्स में हुई एंट्री

    2. रणवीर सिंह की बहन बनकर छाई थीं एक्ट्रेस

    3. दोस्तों के कहने पर फिल्मों में आई थीं एक्ट्रेस

    दीपेश पांडेय, मुंबई। गुजराती फिल्मों से अभिनय सफर शुरू करने के बाद अभिनेत्री दीक्षा जोशी (Diksha Joshi) ने जयेशभाई जोरदार, कौशलजीज वर्सेस कौशल और धड़क 2 फिल्मों में काम किया।

    गत वर्ष उन्होंने धारावाहिक पुष्पा: इंपॉसिबल (Pushpa: Impossible) से टीवी में कदम रखा। इसमें वह दीप्ति पारिख की भूमिका निभा रही हैं। दीक्षा से विभिन्न मुद्दों पर बात की है।

    आसान नहीं था निर्णय

    फिल्मों के बाद टीवी में आने को लेकर दीक्षा कहती हैं, "ये मेरा पहला टीवी शो है। मैं पिछले साल ही इससे जुड़ी हूं। शुरू में तो मुझे फिल्मों से टीवी में आने के बारे में थोड़ा सोचना पड़ा, लेकिन फिर मन में आया कि काम तो काम ही होता है। फिर वह किसी भी माध्यम पर हो। इस शो की पहले से ही तीन साल की विरासत चली आ रही है तो इस बात को लेकर भी पहले थोड़ी नर्वस थी कि मैं अपनी भूमिका न्यायसंगत तरीके से निभा पाऊंगी या नहीं। 

    हमारे निर्देशक ने बहुत अच्छी ट्रेनिंग दी, इससे मैं सेट पर बहुत सहज हो गई। हमारी कहानी और पात्र, कुछ भी ज्यादा बनावटी नहीं हैं, हम हर चीज वास्तविकता के करीब रखने की कोशिश करते हैं। इसीलिए इतने लंबे समय से दर्शक हमारे शो को प्यार देते आ रहे हैं।

    मिली स्वीकृति

    दीक्षा से पहले धारावाहिक में दीप्ति की भूमिका अभिनेत्री गरिमा परिहार निभाती थीं। अपनी स्वीकृति पर दीक्षा कहती हैं, "पहले तो मुझे यह पता नहीं किसी दूसरे कलाकार की जगह आने पर कोई दबाव होता है। शो से जुड़ने के बाद मुझे पता चला कि दर्शक इस पात्र से पहले से जुड़े हैं। उन्हें इस पात्र में किसी दूसरे चेहरे को देखने की आदत नहीं है।

    Deeksha Joshi

    फिर मैं भी थोड़ा दबाव महसूस करने लगी थी। हालांकि, अपना काम ईमानदारी से करती रही। धीरे-धीरे दर्शकों ने भी स्वीकार कर लिया। हाल ही में मैं एक फिल्म के प्रीमियर पर गई थी। वहां एक व्यक्ति ने मुझसे कहा कि मैंने आपको पुष्पा: इंपासिबल धारावाहिक में देखा है। यह सुनकर मुझे बहुत अच्छा लगा कि चलो अब तो लोग मुझे मेरे धारावाहिक के कारण भी पहचान रहे हैं।

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    अभिनय सफर

    वर्ष 2017 में गुजराती फिल्म शुभ आरंभ से अभिनय में पदार्पण करने वाली दीक्षा अपने अभिनय सफर के बारे में बताती हैं, मुझे हमेशा से थिएटर और लेखन का काम करना था। फिल्मों या टीवी में एक्टिंग करने का मेरा कोई इरादा नहीं था। मैंने पढ़ाई भी अंग्रेजी साहित्य में की है। इस बीच अहमदाबाद में नेशनल इंस्टीट्यूट आफ डिजाइनिंग द्वारा बनाई जा रही कुछ शार्ट फिल्म्स का हिस्सा बनीं। वहीं से मुझे कैमरे को लेकर धीरे-धीरे आकर्षण बढ़ने लगा।

    मेरी दिलचस्पी नहीं थी, लेकिन दोस्तों के कहने पर गुजराती फिल्मों में ऑडिशन देना शुरू किया। पांचवें या छठवें आडिशन में ही मुझे पहली फिल्म केंद्रीय भूमिका में मिल गई। इसके बाद अब तक मैं गुजराती में 13 फिल्में कर चुकी हूं। फिल्म जयेशभाई जोरदार के लिए मैंने रणवीर सिंह की पत्नी (मुद्रा) की भूमिका लिए ऑडिशन दिया था, लेकिन मुझे उनकी बहन की भूमिका मिली। इसके बाद मैं मुंबई शिफ्ट हो गई।

    जारी रहेगा लेखन

    अभिनय के साथ दीक्षा लेखन में भी दिलचस्पी रखती हैं। उनका कहना है, मैं अभी भी लिखती हूं। अभिनय अगर मेरा दाहिना हाथ है तो लेखन बायां हाथ है। लेखन के बिना तो मैं स्वयं को कुछ समझती ही नहीं। लिखकर मैं स्वयं को ज्यादा अच्छी तरह से व्यक्त कर सकती हूं। आगे मुझे निर्देशन और लेखन में भी स्वयं को आजमाना है, मगर अभी इतना आत्मविश्वास नहीं है, धीरे-धीरे हो जाएगा। आत्मसंदेह से जीतना पड़ेगा।

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    Bollywood Actress

    अपना निर्णय अपने हाथ

    लड़कियों और महिलाओं को अपने सपने पूरे करने की बात पर दीक्षा कहती हैं, दुनिया में हर किसी की नहीं सुननी चाहिए। सौ लोग, सौ अलग-अलग तरह से सुझाव देंगे, हर एक की सुनते रहेंगे तो सारा समय उसी में चला जाएगा। अपने सपने सच करने के लिए बस अपने दिल की सुनना चाहिए और वही करना चाहिए। लड़कियों को कैसी जिंदगी जीनी है, यह निर्णय उनके हाथों में होना चाहिए।

    इसलिए किसी की सुनने से पहले लड़कियों से अपने आपसे बेहतर कनेक्शन बनाना चाहिए। बचपन से लेकर युवावस्था तक मैं तो हमेशा से बागी स्वभाव की रही हूं। मैंने लोगों की नहीं सुनी, जो दिल में आया, वही किया। हां, 30 साल की उम्र के बाद थोड़ा इन बातों पर ध्यान देनी लगी कि दूसरे मेरे बारे में क्या सोचते हैं। तब मेरा बहुत समय बर्बाद हुआ। अब मैं अपनी बात पर अडिग रहती हूं, दूसरों की बातों से प्रभावित नहीं होती हूं।

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