बॉलीवुड की पहली सिंगिंग सुपरस्टार, Raj Kapoor के अनबन की चुकाई कीमत; लता दीदी के चलते डूबा करियर!
लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) से पहले बॉलीवुड में पहली सिंगिंग सुपरस्टार का राज था। लता उन्हें अपना गुरु मानती थीं। ...और पढ़ें

बॉलीवुड की पहली लेडी सिंगिंग सुपरस्टार। फोटो क्रेडिट- एक्स

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एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। सूरज उगता है तो डूबता भी है... फिल्मी सितारों और सिंगर्स का भी यही हाल है। जो सितारे कभी सिनेमा पर राज करते थे, किसी दूसरे के आने से उनका करियर अर्श से फर्श पर पहुंच गया। 40s और 50s के दौर में म्यूजिक इंडस्ट्री पर राज करने वालीं पहली सिंगिंग सुपरस्टार (First Female Singing Superstar) का भी यही हाल था।
अपनी अनोखी आवाज में उन्होंने कई कल्ट गाने दिए जो आज भी लोगों की जुबान पर रहते हैं, लेकिन उनमें से ज्यादातर लोगों को मालूम ही नहीं कि यह आवाज किसकी है। हम बात कर रहे हैं 'सैंया दिल में आना रे', 'मेरे पिया गए रंगून' और 'कजरा मोहब्बत वाला' गाने वालीं सिंगर शमशाद बेगम (Shamshad Begum) की।
गायिका को साइन करने की लगती थी होड़
शमशाद बेगम ने जोहराबाई और अमीरबाई जैसी दिग्गज गायिकाओं को पीछे कर हिंदी सिनेमा में कल्ट गानों के जरिए अलग पहचान बनाई। एक तरफ जोहराबाई और अमीरबाई अपनी मीठी आवाज के लिए जानी गईं, वहीं शमशाद ने तेज पेस के साथ गानों में नया जोश भरा। उनकी गायिकी की दीवानगी का अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि 40s के दौर में एक गाने के लिए उन्हें 1000-1000 रुपये देने के लिए मेकर्स और कंपोजर्स तैयार रहते थे।
लता मंगेशकर के चलते फीका पड़ा 'शमशाद चार्म'
शमशाद बेगम से एक गाना गवाने के लिए होड़ लगी रहती थी। म्यूजिक डायरेक्टर नौशाद के साथ मिलकर उन्होंने कई सुपरहिट गाने दिए। मगर वक्त का बदलना तो तय है। जो गायिका शमशाद को अपना गुरु और प्रेरणा मानती थीं, उनके आने के बाद से ही फर्स्ट सिंगिंग सुपरस्टार का करियर धीरे-धीरे खत्म होने की कगार पर आने लगा। यह गायिका थीं लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar)।
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लता के चलते दो फिल्मों से बाहर हुई थीं शमशाद!
गणेश अनंतरमन की किताब बॉलीवुड मेलोडीज के मुताबिक, शमशाद बेगम के होते हुए धीरे-धीरे म्यूजिक डायरेक्टर्स और कंपोजर्स का झुकाव लता मंगेशकर की ओर होने लगा। नौशाद भी लता दीदी के गानों के दीवाने हो गए थे। बस फिर क्या था। जो नौशाद अपने सभी गानों में शमशाद की आवाज चाहते थे, उन्होंने 'अंदाज' फिल्म में उन्हें रिप्लेस कर लता को अपनी गायिका के रूप में चुन लिया। नौशाद के बाद शमशाद का करियर बचाने में संगीतकार राम गांगुली का भी रोल था।
राज कपूर की फिल्म 'आग' में वह ही शमशाद को लेकर आए थे और गायिका ने अपने करियर के सबसे बेहतरीन गानों में शुमार गीत 'काहे कोयल शोर मचाए रे' गाया था।
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राज कपूर की अनबन के चलते डूबने लगा था करियर
मगर यहां भी किस्मत ने साथ नहीं दिया। राज कपूर की राम गांगुली से अनबन हो गई और अपनी अगली फिल्म बरसात के लिए उन्होंने राम की बजाय शंकर-जयकिशन को चुन लिया और उनकी पहली पसंद लता मंगेशकर थीं। इस तरह लता दीदी के आने के बाद शमशाद बेगम का चार्म फीका पड़ता गया। उन्होंने इसके बाद कई गाने गाए लेकिन पहले जैसी सफलता हाथ नहीं आई।