90s का चॉकलेटी ब्वॉय था Govinda का भांजा, 70 फिल्मों में किया काम; कृष्णा जैसे स्टारडम के लिए तरसता रहा एक्टर
गोविंदा के परिवार से कई मेंबर्स ने फिल्मों में किस्मत आजमाई। 90 के दौर में भी उनके एक भांजे ने बॉलीवुड में एंट्री थी, जिसे 70 हिंदी-भोजपुरी फिल्मों के ...और पढ़ें

गोविंदा के इस भांजे का नहीं चला बॉलीवुड में सिक्का/ फोटो- Instagram

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एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। गोविंदा का 90 के दशक में खूब सिक्का चला। वह न सिर्फ अपने बेहतरीन अभिनय से, बल्कि डांस स्किल्स से भी सलमान खान से लेकर शाह रुख और कई सुपरस्टार्स पर भारी पड़ते थे। 90 के दौर में सिर्फ गोविंदा ने ही हिंदी सिनेमा में कदम नहीं रखा था, बल्कि उनका भांजा भी आया था।
गोविंदा की तरह ही उनके भांजे के गुड लुक्स की वजह से उसे 90 के दशक में चॉकलेटी ब्वॉय का टैग मिला था। एक तरफ जहां कृष्णा अभिषेक को बड़ा स्टारडम मिला, तो वहीं 70 से अधिक हिंदी और भोजपुरी फिल्में करने वाला उनका भाई धीरे-बॉलीवुड से ओझल होता गया। इतने सालों में कहां गायब हुआ गोविंदा का भांजा और क्या कर रहा है, नीचे पढ़ें उनकी कहानी।
मामा गोविंदा के साथ इस हिंदी फिल्म में किया था काम
गोविंदा के जिस भांजे का जिक्र हम अपने इस लेख में कर रहे हैं, वह कोई और नहीं, बल्कि 90 के दशक का बॉलीवुड में कदम रखने वाले विनय आनंद हैं, जिन्होंने हिंदी के साथ-साथ भोजपुरी फिल्मों में भी खूब काम किया। विनय आनंद न सिर्फ गोविंदा, बल्कि कृष्णा अभिषेक के भी कजिन ब्रदर हैं। 'दिल ने फिर याद किया, 'जहां जायेंगे हमें पाएंगे'जैसी मूवीज उनके करियर की यादगार फिल्में हैं।
हालांकि, जिस फिल्म में दर्शकों ने उन्हें सबसे ज्यादा पसंद किया, वह थी साल 2001 में रिलीज हुई मूवी 'आमदनी-अठन्नी खर्चा रुपैया', जिसमें उन्होंने 'विजय' का किरदार निभाया था। इस फिल्म में गोविंदा भी मुख्य भूमिका में नजर आए थे।
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बॉलीवुड में काम न मिलने पर किया भोजपुरी का रुख
साल 1999 में फिल्म लो मैं आ गया स शुरुआत करने वाले विनय आनंद ने सौतेला, सेंसर, अंगार- द फायर, मुलाकात, कूल नहीं होते हैं हम जैसी हिंदी फिल्मों में काम किया, लेकिन यहां सफलता न मिलने पर उन्होंने भोजपुरी सिनेमा का रुख किया। वहां पर ऑडियंस ने उन्हें स्वीकार किया, लेकिन अभिनेता वो स्टारडम हासिल नहीं कर पाए, जो रवि किशन, निरहुआ, खेसारी लाल यादव और पवन सिंह का हैं। एक पुराने इंटरव्यू में बॉलीवुड में 10 फिल्मों के बावजूद संघर्ष करने को लेकर अभिनेता ने अपना दर्द बयां किया था।

विनय आनंद ने कहा था, "मेरी लास्ट 'आमंदनी' 2001 में एक बहुत अच्छी फिल्म साबित हुई, लेकिन इसके बावजूद मुझे अच्छे रोल्स नहीं मिले। कई महीने बीत गए थे और मुझे पैसों की जरूरत थी, उसी समय मुझे भोजपुरी फिल्म का ऑफर आया। मुझे ठीक-ठाक पैसे मिले और मेरी पहली फिल्म 'तोसे प्यार बा' भी बड़ी हिट हुई।
बॉलीवुड में मुझे अच्छे रोल और काम नहीं मिल रहा था, लेकिन यहां पर मुझे अच्छा काम मिल रहा है।" विनय आनंद लगातार भोजपुरी सिनेमा में काम कर रहे हैं और कुछ महीने पहले ही वह खाटू श्याम गए थे, जिसे लेकर उन्होंने कहा कि वो हिंदी सिनेमा में अपना सोया भाग्य जगाने आए हैं।
