साइंस से भी परे हैं Mithun Chakraborty की इस फिल्म के फाइट सीन, 28 साल बाद भी वैज्ञानिक नहीं समझ पाए लॉजिक
मिथुन चक्रवर्ती की 1998 में एक ऐसी फिल्म रिलीज हुई थी, जिसमें ऐसे अनोखे फाइट सीन फिल्माए गए थे, जो साइंस से भी परे हैं, जिसे देखने के बाद दर्शक भी अपन ...और पढ़ें

28 साल बाद भी नहीं समझ आएगा मूवी के सीन का लॉजिक/ फोटो- Youtube

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एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। 70 और 80 के दशक के मशहूर अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती की फिल्मों में उनका डांस तो दर्शकों को काफी पसंद आता ही था, लेकिन इसके साथ ही उनकी मूवीज के एक्शन सीक्वेंस से लेकर दमदार डायलॉग्स भी खूब वायरल होते थे और उन पर मीम्स बनते थे।
28 साल पहले मिथुन चक्रवर्ती की एक ऐसी फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी, जो साइंस की समझ से परे हैं और आज की Gen-Z की भी, क्योंकि उसमें ऐसे सीन फिल्माए गए है, जिनके पीछे ने निर्देशक ने क्या लॉजिक लगाया है, यह पता लगाना बेहद मुश्किल है।
गुंडों को एक मुक्के में बहा खून पर मिथुन को नहीं आई चोट
मिथुन चक्रवर्ती की जिस फिल्म का जिक्र हम अपने इस लेख में कर रहे हैं, वह साल 1998 में रिलीज हुई 'गुंडा' थी, जिसमें कई फाइट सीक्वेंस ऐसे थे, जिसको लेकर इंटरनेट पर कई मीम बने। फिल्म का सबसे पहला सीन है, जब एक पुलिस ऑफिसर को कुछ गुंडे मारते हैं और मिथुन चक्रवर्ती अचानक वहां पर आते हैं। एक गुंडा तेजी से उछलता है और मिथुन उसे एक मुक्के में हवा में ही ढेर कर देते हैं।
वहीं इसी सीन के अंदर मिथुन दो गुंडों को मुक्का मारते हैं और वह जमीन पर गिरने की बजाय सीधा छत पर जाकर खड़े हो जाते हैं। एक सीन में मिथुन चक्रवर्ती खुद गुंडों को लातों-घूसों से मारते हुए हवा में तैरते हैं। सभी गुंडे ढेर हो जाते हैं, लेकिन मिथुन चक्रवर्ती को चोट तक नहीं आती है।
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Video Credit- Goldmines great indian comedy
साइकिल के पीछे छुपकर चलाई गोलियां
फिल्म में एक और सीन है, जहां पुलिस का काफिला नेता को लेकर जा रहा है और पहले ऑटो में बैठकर वह कार पर खुलेआम निशाना साध रहे हैं, लेकिन पुलिस ऑफिसर उन्हें नहीं देख पा रहा है। इसके बाद वह साइकिल के पीछे छुपकर निशाना साधते हैं। पुलिस वालों को 'शंकर' (Mithun Chakraborty) तब भी नहीं दिखता। पतले से खम्बे के पीछे जाकर फिर से वह निशाना साधता है, लेकिन तीन बार गोली की आवाज सुनकर भी पुलिस बेसुध होती है।
जब अंत में मिथुन का एक निशाना लगता है और नेता की गाड़ी पलट जाती है, तो पुलिस मिथुन को देखती है और उसके पीछे भागती है। वह भागते-भागते रेगिस्तान में नेता को पकड़ लेता है, लेकिन पास पहुंचकर भी पुलिस पीछे हाथ बांधे खड़ी रहती है। इस सीन पर उस समय पर काफी मीम भी बने थे।
गाड़ी के उड़े परखच्चे...पीछे से निकला विलेन
कार में तो अक्सर खड़े-खड़े आग लग जाती हैं, लेकिन वैज्ञानिकों को मूवी का एक सीन देखकर सच में अपने बाल नोंचने का मन जरूर करेगा। ये सीन तब आता है जब 'गुंडा' शंकर जेल से छूटने के बाद नेता से बहन की मौत का बदला लेता है। शंकर का निशाना नेता की कार के टायर पर लगता है और गाड़ी बुरी तरह घूमते-घूमते काफी खराब हो जाती है, लेकिन मजाल है कि फिल्म के विलेन को कुछ हो जाए। सीन में दिखाया गया है कि कैसे इतनी बड़ी गाड़ी पलटने और बड़ी सड़क दुर्घटना के बावजूद विलेन बड़ी ही आसानी से कार के पीछे वाले दरवाजे से निकलता है और रेत की तरफ भागता है।

डायलॉग मारते-मारते की गुंडों की कुटाई
डायलॉग बोलना और गुंडों की पिटाई करना यह काम सिर्फ मिथुन चक्रवर्ती ही कर सकते हैं। 'गुंडा' में मिथुन का कैरेक्टर धुनाई करते-करते भी अपने डायलॉग भूलता नहीं है, वह ऐसे-ऐसे भारी-भरकम डायलॉग बोलता है, जिसे देखकर भेजा फ्राई हो जाएगा।
इसमें एक सीन ऐसा भी है, जहां विलेन बने मुकेश ऋषि पूरे गुंडों की फौज लेकर ऑटो में रेगिस्तान में आते हैं। वह छोटी बन्दूक नहीं, बल्कि बड़ी राइफल से 'शंकर'पर वार करते हैं, लेकिन मजाल है कि एक भी गोली ने उसे छू लिया हो, जबकि उसकी एक मिसाइल से बहुत दूर से आ रहे ऑटो की धज्जियां उड़ जाती हैं। खैर अगर आप मिथुन चक्रवर्ती की इस अनोखी फिल्म को देखना चाहते हैं, तो 'गुंडा' आपको Youtube पर मिल जाएगी।