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    O Romeo एक्टर शाहिद कपूर को नहीं है 800 करोड़ के क्लब का डर, बताया अपनी सफलता का हाई रिस्क फॉर्मूला

    By Priyanka SinghEdited By: Tanya Arora
    Updated: Sun, 08 Feb 2026 06:00 AM (IST)

    शाहिद कपूर जल्द ही फिल्म 'ओ रोमियो' के साथ फिल्मी पर्दे पर लौट रहे हैं। एक्शन से भरपूर उनकी ये फिल्म 13 फरवरी को वैलेंटाइन वीक में रिलीज हो रही है। हा ...और पढ़ें

    800 करोड़ कमाने का दबाव नहीं लेते शाहिद कपूर/ फोटो- Instagram

    800 करोड़ कमाने का दबाव नहीं लेते शाहिद कपूर/ फोटो- Instagram

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    प्रियंका सिंह, मुंबई। स्टारडम की तयशुदा राह से अलग चलना अभिनेता शाहिद कपूर की पहचान रही है। अब शाहिद 13 फरवरी को सिनेमाघरों में प्रदर्शित होने वाली फिल्म ‘ओ रोमियो’ में एक गैंगस्टर प्रेमी के तौर पर दिखेंगे। विशाल भारद्वाज निर्देशित इस फिल्म में बॉक्स ऑफिस दबाव समेत कई मुद्दों पर शाहिद से हुई बातचीत।

    आपके पिता पंकज कपूर ने कहा था कि विशाल भारद्वाज आपके भीतर का ड्रामा निकलवा पाते हैं। इसमें कितनी सच्चाई है?

    वह सही हैं। डैड के जरिए ही विशाल सर मेरी जिंदगी में आए हैं। दोनों ने साथ कई फिल्में की हैं। जब विशाल ने मुझे कमीने, हैदर जैसी फिल्मों में केंद्रीय भूमिका दी थी, तो यही सवाल मन में आया था कि क्या मैं इसके लायक हूं। बतौर कलाकार आप कैमरा के सामने क्या कर सकते हैं, उन्होंने मेरे उस सफर को आकार दिया है। ओ’ रोमियो पिछली सदी के नौवें दशक की मुंबई के गैंगस्टर की दुनिया में सेट एक प्रेम कहानी है, तो इसमें ड्रामा करने का काफी मौका था।

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    shahid kapoor

    उड़ता पंजाब के दौरान भी आपने खुद से यह सवाल किया था कि मैं क्यों.. आप क्यों नहीं?

    शायद इसलिए, क्योंकि मैंने यह सवाल अपने आप से बहुत कम उम्र में पूछा था। लोगों को पता है कि मेरे पिता पंकज कपूर है। लेकिन लोग नहीं जानते हैं कि मैं अपनी मां (नीलिमा अजीम) के साथ रहता था। दूसरी शादी के बाद डैड अलग रहते थे। मैंने ऑडिशन से काम पाया। वहां खुद से यह सवाल पूछना पड़ता था कि मैं क्यों? लाइन में सौ लोग होते हैं, तो लगता था कि मुझे क्यों चुनेंगे? खैर, यह अच्छा सवाल है, ताकि आप खुद को हल्के में न लें।

    मेरे पिता एनएसडी (नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा) से थे। वह मुझे अपनी कहानी सुनाते थे कि बेटा पहले मुझे एक पेड़ का रोल मिला। फिर एक डॉयलाग, फिर दो। फिर ऐसा रोल, जहां मेरे कई डायलॉग्स थे। इन कहानियों को सुनने के बाद जब काम मिलता है, तो उसकी कीमत पता होती है। कई साल परफॉर्म करने के बाद भी आप खराब फॉर्म में हो सकते हैं। यह सवाल तब ईंधन की तरह काम करता है।

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    हाल ही में आपने कहा था कि लोग जब लेफ्ट जाते हैं, तो मैं राइट जाता हूं। हाई रिस्क, हाई रिटर्न में यकीन करता हूं...

    मैं बचपन से ही ऐसा हूं। जो लोग कर चुके हैं, वह मैं नहीं कर सकता हूं। जब रेस होती, तो पहले नंबर वाले को छोड़कर हर कोई किसी न किसी का पीछा कर रहा होता है। जब आप पहले नंबर पर पहुंचते हैं, तो आपको समझ में नहीं आता कि आगे क्या करना है, क्योंकि आप किसी का पीछा करके पहुंचे हैं। जब आप शुरुआत से सोचते हैं कि मैं यह रेस अपने हिसाब से भागने वाला हूं, तो अपनी रणनीति को लेकर स्पष्ट होते हैं।

    मैं उनमें से हूं, जो पहला या आखिरी आ सकता हूं। सेफ खेलकर दूसरे-तीसरे नबंर पर नहीं। ये एटीट्यूड मुझे अच्छा लगता है। रचनात्मक तौर भी मैं अपने तरीके से कुछ अलग करना चाहता हूं, फिर भले ही मैं फेल हो जाऊं। हर बार हाई रिस्क का तरीका सही नहीं होगा, लेकिन कम से कम मैं कुछ नया तो करूंगा।

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    अब तो आठ सौ करोड़ का क्लब चल रहा है। जिन कलाकारों की फिल्मों ने यह कमाया है, उन्हें देखकर दबाव महसूस नहीं हो रहा?

    दबाव सफलता मिलने के बाद ज्यादा महसूस होती है। अब दबाव उन कलाकारों पर है, जिन्होंने आठ सौ करोड़ की फिल्म दी है। बाकी लोग उस दबाव को क्यों ले रहे हैं? उन्होंने तो नहीं दी है ना? वैसे भी दबाव लेना अच्छी चीज नहीं, क्योंकि फिर आप सुरक्षित खेलने लगते हैं। लोगों की उम्मीदें आपसे बढ़ जाती हैं। सफल फिल्म वहीं होती हैं, जो ट्रेंड को तोड़ती हैं। मुझे ऐसा कबीर सिंह फिल्म के बाद महसूस हुआ था।

    कइयों (मेकर्स) ने कहा कि पता नहीं अब तुम्हारे साथ क्या बनाना है, तुमने इतनी बड़ी हिट दे दी है। आज मैं उस पुरानी परिस्थिति में नहीं हूं। अगर कल को मेरे किसी फिल्म ने उस आंकड़ें को छू लिया, तो फिर वह दबाव आएगा।

    ' ओ रोमियो' फिल्म के ट्रेलर में हिंसा काफी है। ऐसी फिल्में करने का मन नहीं, जो आपके बच्चे भी देखें?

    इसलिए मैं कॉकटेल 2 कर रहा हूं। खैर, फिल्मों की अपनी दुनिया होती है, जिसे विश्वसनीय बनाना पड़ता है। इसमें गैंगस्टर्स हैं, तो पात्र भी वैसे होंगे। मैंने जब वी मेट, इश्क विश्क, विवाह जैसी कई रोमांटिक फिल्में की हैं। इश्क विश्क कॉलेज रोमांस थी, विवाह छोटे शहर की प्रेम कहानी थी, जब वी मेट नई पीढ़ी की प्रेम कहानी थी। कबीर सिंह का पात्र कब क्या कर जाए, उसे भी नहीं पता था। 'ओ रोमियो' में हिंसा के अलावा जो मोहब्बत का भाव है, वह भी खूबसूरत है।

    shahid kapoor cockatil 2 shoot wrap

    होमबाउंड ऑस्कर में शीर्ष 15 में पहुंचकर बाहर हो गई। भाई ईशान खट्टर के लिए क्या कहना चाहेंगे?

    मुझे उन पर गर्व है। आज के माहौल में जहां कमर्शियल फिल्मों को लेकर कलाकार ज्यादा सोचते हैं। उसमें ईशान ने एक ईमानदार कहानी को चुना और अपनी जिंदगी का एक साल दिया। यह दर्शाता है कि उसके अंदर एक ऐसा कलाकार है, जो केवल कमर्शियल सफलता के पीछे नहीं. बल्कि अच्छे काम के पीछे भाग रहा है।

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