फरीदाबाद में अरावली वन क्षेत्र में पहली बार बन रहा चेक डैम और तालाब, वन्यजीवों को मिलेगा भरपूर पानी
फरीदाबाद के अरावली वन क्षेत्र में पहली बार एक करोड़ रुपये की लागत से चेक डैम और तालाब बनाया जा रहा है। यह परियोजना वर्षा जल संरक्षण, भूजल स्तर बढ़ाने ...और पढ़ें

तालाब की लंबाई 70 मीटर, चाैड़ाई 46 मीटर और गहराई 4 मीटर होगी। चेक डैम और तालाब तैयार किया जा रहा है। लगभग 75 प्रतिशत काम पूरा हो गया है।

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
निभा रजक, फरीदाबाद। अरावली वन क्षेत्र में पहली बार चेक डेम और इसके पास तालाब बनाया जा रहा है ताकि वर्षा के समय पानी व्यर्थ न हो। इस योजना से जल संरक्षण भी होगा और भूजल स्तर पर भी असर पड़ने की उम्मीद है। साथ ही वन्य जीवों को सालभर के लिए पानी उपलब्ध हो सकेगा। इस महत्वाकांक्षी योजना पर वन विभाग द्वारा करीब एक करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। साथ ही अरावली वन क्षेत्र में छोटे-छोटे कृत्रिम तालाब विकसित किए जा रहे हैं। प्राकृतिक तालाबों का जीर्णोद्धार किया जा रहा है।
पाली गांव में होता है जलभराव
पाली गांव अरावली की तलहटी में बसा है। मानसून में वर्षा के बाद अरावली पहाड़ी से पानी बहकर गांव में आ जाता है। इस वजह से गलियों से लेकर सड़कों पर जलभराव हो जाता है। ग्रामीणों ने इस बारे में कई बार शिकायत की। करीब 10 साल पहले यहां चेक डेम व तालाब बनाने की योजना थी लेकिन अड़चनों की वजह से सिरे नहीं चढ़ सकी। अब इसी योजना को सिरे चढ़ाया जा रहा है।
इस योजना से एक साथ कई फायदे होंगे। तालाब की लंबाई 70 मीटर, चाैड़ाई 46 मीटर और गहराई 4 मीटर होगी। चेक डैम और तालाब तैयार किया जा रहा है। लगभग 75 प्रतिशत काम पूरा हो गया है। अप्रैल के अंत तक निर्माण कार्य पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
गर्मी में मिलेगा भरपूर पानी
अरावली वन क्षेत्र में तेंदुआ, नीलगाय, हिरण और सियार सहित अन्य वन्यजीव रहते हैं। गर्मियों में अरावली की पहाड़ियों में तपिश अधिक होने के कारण वन्यजीव पानी के लिए भटकते हैं। कई बार पानी की तलाश में वन्यजीव घनी आबादी की ओर से आ जाते हैं। कुछ महीने पहले ही एक तेंदुए की सड़क हादसे में मौत हो गई थी।
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करीब एक महीने पहले भांकरी गांव के लोगों ने मंदिर में तेंदुआ दिखने की शिकायत वन विभाग को दी थी। लोगों ने दावा किया था कि तेंदुआ मंदिर में पानी की तलाश में आता है। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वन क्षेत्र में पर्याप्त पानी उपलब्ध रहेगा तो वन्यजीव अपने प्राकृतिक आवास में ही रहेंगे।
अरावली वन क्षेत्र में एक करोड़ की लागत से तालाब तैयार कराया जा रहा है। जल्द इसका निर्माण पूरा होगा। इसके साथ ही वन क्षेत्र में मौजूद प्राकृतिक तालाबों की साफ-सफाई तथा जीर्णोद्धार का कार्य कराया जा रहा है। इससे भीषण गर्मी में वन्यजीवों को पानी के लिए भटकना नहीं पड़ेगा।
-झलकार उयके, जिला वन अधिकारी।
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