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    गुरुग्राम में बच्चा फेंकने वाली बिन ब्याही मां गिरफ्तार, NICU में कठिन प्रयास के बाद चली धड़कन; नाम मिला बेबी मैक्स

    Updated: Fri, 13 Mar 2026 08:36 PM (IST)

    गुरुग्राम में एक बिन ब्याही मां ने लोकलाज के डर से अपने नवजात शिशु को सड़क किनारे फेंक दिया था। पुलिस उसे मैक्स अस्पताल ले गई, जहां डॉक्टरों ने 1.5 कि ...और पढ़ें

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    जागरण संवाददाता, गुरुग्राम। बिना शादी हुए बच्चे को उसकी मां ने लोकलाज के भय से सड़क किनारे फेंक दिया। करीब 1.5 किलोग्राम वजन वाले इस नवजात को एक महीने पहले सेक्टर 29 थाना पुलिस बेहद गंभीर हालत में अस्पताल लेकर पहुंची थी। उस समय बच्चे के शरीर से अम्बिलिकल कार्ड और प्लेसेंटा भी जुड़े हुए थे और उसमें जीवन के कोई स्पष्ट संकेत नहीं थे। शहर के मैक्स अस्पताल में डाॅक्टरों और नर्सिंग स्टाफ ने एक लावारिस प्री-मेच्योर नवजात को नई जिंदगी दे दी।

    एनआईसीयू में गहन निगरानी में रखा

    सेक्टर 29 क्षेत्र में सड़क किनारे मिले बच्चे के अस्पताल पहुंचते ही डाॅक्टरों की टीम हरकत में आ गई। बच्चे की न तो सांस चल रही थी और न ही दिल की धड़कन महसूस हो रही थी। डाॅक्टरों ने हार नहीं मानी और 30 मिनट तक लगातार प्रयास करते हुए एडवांस्ड नियोनेटल रिससिटेशन किया। लंबे संघर्ष के बाद जब बच्चे ने पहली बार प्रतिक्रिया दी तो पूरे वार्ड में राहत और खुशी की लहर दौड़ गई। नवजात को एनआईसीयू में गहन निगरानी में रखा गया।

    सिविल अस्पताल को सौंप दिया

    हालत में सुधार होने पर उसे नाॅन-इनवेसिव रेस्पिरेटरी सपोर्ट पर शिफ्ट कर दिया गया। पांचवें दिन वह बिना किसी मशीन की मदद के सामान्य रूप से सांस लेने लगा। अस्पताल स्टाफ ने उसे प्यार से बेबी मैक्स नाम दिया है। करीब एक महीने तक चले इलाज के बाद 10 मार्च को बच्चे का वजन बढ़कर 2.56 किलोग्राम हो गया और उसकी स्थिति पूरी तरह स्थिर हो गई। कानूनी प्रक्रिया पूरी कर बच्चे को आगे की देखभाल के लिए सिविल अस्पताल को सौंप दिया गया।

    एडवांस्ड नियोनेटल रिससिटेशन

    एडवांस्ड नियोनेटल रिससिटेशन नवजात शिशु को पुनर्जीवित करने की उन्नत आपातकालीन चिकित्सा प्रक्रिया है। इसका उपयोग तब किया जाता है जब जन्म के बाद बच्चे की सांस नहीं चल रही हो, दिल की धड़कन कमजोर हो या वह कोई प्रतिक्रिया न दे रहा हो।

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    इस प्रक्रिया में डाक्टर और प्रशिक्षित नर्सें विशेष प्रोटोकाल के तहत शिशु को आक्सीजन देती हैं और बैग-मास्क या वेंटिलेटर की मदद से सांस दिलाते हैं। जरूरत पड़ने पर चेस्ट कंप्रेशन और दवाओं का भी उपयोग किया जाता है। इसका उद्देश्य बच्चे की सांस, दिल की धड़कन और शरीर में आक्सीजन की आपूर्ति को जल्दी सामान्य करना है, ताकि मस्तिष्क और अन्य अंग सुरक्षित रह सकें।

    मां के खिलाफ केस दर्ज, हुई गिरफ्तार

    सेक्टर 29 थाना पुलिस ने बताया कि एक महीने पहले बच्चा सड़क किनारे पेड़ के पास मिला था। उसे अस्पताल में भर्ती कराकर मामले की जांच की गई। सीसीटीवी फुटेज में महिला की पहचान होने पर उसे पकड़ा गया। जांच में पता चला कि वह मध्य प्रदेश की रहने वाली है और यहां सुशांत लोक क्षेत्र में रहकर श्रमिक का काम करती है।

    इस दौरान वह एक युवक के संपर्क में आई। बिना शादी ही उसे बच्चा हो गया। लोकलाज के चलते उसने बच्चे को फेंक दिया था। पुलिस ने आरोपित महिला के खिलाफ संबंधित धाराओं में केस दर्ज किया। साथ ही उसकी गिरफ्तारी भी की गई। चाइल्ड वेलफेयर कमेटी अब मामले को देख रही है।

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