हाइड्रोजन ट्रेन को लेकर लोगों में जबरदस्त उत्साह, बढ़ने लगी यात्रियों की संख्या; शानदार सुविधा से आकर्षित हो रहे लोग
देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का जींद से नियमित संचालन जारी है, जिसमें यात्रियों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ रही है। यह पर्यावरण अनुकूल ट्रेन डीजल की जगह हा ...और पढ़ें
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हाइड्रोजन ट्रेन को लेकर लोगों में जबरदस्त उत्साह। फोटो जागरण
HighLights
जींद से हाइड्रोजन ट्रेन का नियमित संचालन जारी है।
पर्यावरण अनुकूल ट्रेन में यात्रियों की संख्या बढ़ रही है।
यह ट्रेन हाइड्रोजन ईंधन पर आधारित, प्रदूषण रहित है।
जागरण संवाददाता, जींद। देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन का नियमित संचालन जारी है। मंगलवार को जींद रेलवे स्टेशन से ट्रेन 32 यात्रियों को लेकर अपने निर्धारित समय सुबह सात बजकर 40 मिनट पर रवाना हुई।
ट्रेन के संचालन को लेकर यात्रियों में उत्साह बना हुआ है और लोग पर्यावरण अनुकूल इस नई तकनीक वाली ट्रेन में सफर करने के लिए रुचि दिखा रहे हैं।
मंगलवार को ट्रेन जींद से रवाना होकर निर्धारित स्टेशनों से गुजरते हुए सोनीपत पहुंची। वापसी के दौरान ट्रेन में यात्रियों की संख्या बढ़ी और करीब 40 यात्री सोनीपत से जींद पहुंचे।
लोगों को नियमित संचालन की जानकारी मिल रही
हालांकि जैसे-जैसे लोगों को ट्रेन के नियमित संचालन की जानकारी मिल रही है, रेलवे को यात्रियों की संख्या में भी लगातार बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। यह ट्रेन डीजल की जगह हाइड्रोजन ईंधन तकनीक पर आधारित है, जिससे प्रदूषण नहीं होता और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलता है।
यही कारण है कि इसे देखने और इसमें यात्रा करने के लिए यात्रियों में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है। जहां पहले दिन हाइड्रोजन ट्रेन में जींद से 20-20 यात्रियों ने सफर किया था।
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चुनिंदा देशों में भारत शामिल
बता दें कि भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया, जहां हाइड्रोजन ट्रेन की पूरी टेक्नोलाजी उपलब्ध है। फिलहाल जींद से सोनीपत के बीच ट्रेन चली है। सोनीपत से दिल्ली तक भी इसकी टेस्टिंग चल रही है। जल्द ही सोनीपत से दिल्ली तक हाइड्रोजन ट्रेन दौड़ेगी।
रेलवे मंत्री ने कहा कि एक ऐसी टेक्नोलॉजी की उपलब्धि आज भारत ने हासिल की है, जो चुनिंदा देशों में है। यह सब भारत के मजबूत नेतृत्व के संकल्प से संभव हो पाया। आज यह उस मजबूत नेतृत्व के संकल्प का दिन है।
हाइड्रोजन की टेक्नोलाजी को यदि साधारण भाषा में समझें, तो पानी से हाइड्रोजन बनाई जाती है। इससे बिजली बनती है और उससे ट्रेन चलती है। कोई धुआं नहीं, कोई आवाज नहीं।
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