नूंह में 1 गांव के 3 नाम: सरकारी रिकॉर्ड में 24 साल बाद भी नहीं हुआ सुधार, ID के नाम पर हर कागज बना मुसीबत
नूंह जिले के एक गांव के सरकारी रिकॉर्ड में 24 साल से तीन अलग-अलग नाम दर्ज हैं, जिससे ग्रामीणों को पहचान संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। उपाय ...और पढ़ें

इस गांव के लोगों की पहचान बताने वाले सभी सरकारी कागज ही इनकी परेशानी बन चुके हैं। एआई इमेज
HighLights
नूंह के गांव के सरकारी रिकॉर्ड में 24 साल से तीन नाम।
शिक्षा, पंचायत, राजस्व विभागों में अलग-अलग नाम दर्ज।
उपायुक्त ने रिकॉर्ड में सुधार का आश्वासन दिया।
मोहम्मद मुस्तफा, नूंह (मेवात)। जिले में पिनगवां खंड के अंतर्गत एक गांव पिछले करीब बीस वर्षों से सरकारी रिकाॅर्ड में अलग-अलग नाम से दर्ज है। इससे लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यह अपने आप में सरकारी लापरवाही का एक अनूठा मामला। हद तो यह है कि 24 वर्ष से इस समस्या का कोई समाधान भी नहीं तलाशा गया है। हालांकि, अब स्थानीय लोगों में रोष बढ़ता जा रहा है। बड़ा सवाल यह है कि इस गांव के लोगों की पहचान बताने वाले सभी सरकारी कागज ही इनकी परेशानी बन चुके हैं।
हर विभाग में अलग दर्ज है नाम
स्थानीय लोगों में अमजद खान, साकिर हुसैन, शाहिद, मुस्तकीम, जहांगीर कमांडो, तसलीम ने बताया कि गांव के अलग अलग नामों से वह परेशान हैं। शिक्षा विभाग के रिकाॅर्ड में गांव का नाम 'अल्लाहबास' दर्ज है। पंचायत विभाग में गांव का नाम 'लाहाबास' के नाम से दर्ज है। वहीं, राजस्व (तहसील) रिकाॅर्ड में गांव का नाम 'इलाहाबाद' लिखा हुआ है। इसके अलावा जीपीएस लोकेशन या अन्य ऑनलाइन साइटों पर भी इलाहाबाद का नाम आता है।
इसे ठीक करने के लिए नहीं उठाया कदम
लोगों का कहना है कि बीते वर्ष 2002 से ही लगभग यह चूक चली आ रही है। जिसे ठीक कराने के लिए कभी यहां के लोगों ने कोई कदम उठाया ही नहीं। सबसे अधिक समस्या सरकारी नौकरी में जाने वाले बच्चों को ताी है। हल्का पटवारी शहीद ने बताया कि राजस्व रिकार्ड में गांव का नाम इलाहाबाद है। वहीं, स्कूल के शिक्षक साकिर हुसैन ने बताया कि उनके रिकाॅर्ड में अल्लाहबास दर्ज है।
लोगों ने लगाई एक नाम करने की गुहार
"हमारे गांव का नाम सभी जगह एक ही किया जाए। अलग अलग नामों से हमें परेशानी का सामना करना पड़ता है। कई बार आवाज उठाई गई है, लेकिन सुनवाई नहीं हो पाई है। हमारे गांव का नाम पंचायत के हिसाब से किया जाये।"
-साकिर हुसैन, ग्रामीण
"अलग अलग विभागों में एक नाम नहीं होने के कारण लोगों को परेशानी होती है। खासकर उन बच्चों को परेशानी अधिक होती है, जो सरकारी नौकरी लगते हैं या बाहर इंटरव्यू देने जाते हैं। हम चाहते हैं कि हमारे गांव का नाम सभी जगह एक ही होना चाहिए।"
-मुस्तकीम, ग्रामीण
'रिकॉर्ड की कमी को किया जाएगा दुरुस्त'
"मेरे संज्ञान में अभी यह मामला नहीं आया है। न ही ग्रामीणों की तरफ से ऐसी कोई शिकायत दी गई है। फिर भी इसको देखा जाएगा। अगर कहीं कोई रिकाॅर्ड के आधार पर चूक है तो उसे ठीक करा दिया जाएगा।"
-अखिल पिलानी, उपायुक्त, नूंह।
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