सोनीपत में रेबीज से दूसरी मौत: दो महीने पहले कुत्ते ने काटा, डॉक्टर ने एक इंजेक्शन देकर भेज दिया था घर
सोनीपत में रेबीज से दूसरी मौत का मामला सामने आया है। टिकोला गांव के एक युवक की दो महीने पहले कुत्ते के काटने के बाद इलाज में लापरवाही के कारण पीजीआई र ...और पढ़ें

मृतक रूपेंद्र के स्वजन ने स्वास्थ्य केंद्र के कर्मचारियों पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए हैं।

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जागरण संवाददाता, सोनीपत। जिले में रेबीज से लगातार दूसरी मौत का मामला सामने आया है। यहां पर इलाज में गंभीर लापरवाही बरती गई। दो महीने बाद रेबीज से पीजीआई में गांव टिकोला के युवक की मौत हो गई। रेबीज के लक्षण दिखाई देने पर उसे वहां दाखिल कराया गया था। मृतक रूपेंद्र के स्वजन ने स्वास्थ्य केंद्र के कर्मचारियों पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए हैं।
वैक्सीनेशन के पूरे कोर्स की जानकारी नहीं दी
गांव टिकौला के रूपेंद्र की मां मुन्नी ने बताया कि करीब दो महीने पहले रूपेंद्र को गांव के ही एक कुत्ते ने पैर में काट लिया था। वह तुरंत जैनपुर स्थित सरकारी डिस्पेंसरी पहुंचा, जहां उसे केवल एंटी-रेबीज का एक टीका लगाया गया। स्वजन का आरोप है कि जब रूपेंद्र ने अगली डोज के बारे में पूछा, तो वहां मौजूद कर्मचारियों ने यह कहकर उसे टाल दिया कि एक ही इंजेक्शन काफी है। उसे वैक्सीनेशन के पूरे कोर्स की कोई जानकारी नहीं दी गई।
अचानक ही तबीयत हो गई खराब
परिजनों के अनुसार, पिछले चार-पांच दिनों से रूपेंद्र की हालत बिगड़ने लगी थी और उसने खाना-पीना छोड़ दिया था। उसमें रेबीज के लक्षण दिखाई देने लगे थे। स्वजन उसे जिला नागरिक अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डाॅक्टरों ने उसे पीजीआई रोहतक रेफर कर दिया।
वहां से उसे दिल्ली भेजा गया, लेकिन प्राथमिक उपचार के बाद घर भेज दिया गया। अगले दिन हालत और बिगड़ने पर उसे दोबारा पीजीआई रोहतक ले जाया गया, जहां उसने अंतिम सांस ली।
रूपेंद्र अपने परिवार का सबसे छोटा सदस्य था और लोडर गाड़ी चलाकर घर का गुजारा करता था। उसकी मौत के बाद से परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। ग्रामीणों में भी स्वास्थ्य विभाग के प्रति भारी रोष व्याप्त है।
मार्च में ही हुई थी एक और मौत
फरवरी में कबीरपुर के एक व्यक्ति को कूड़ा गाड़ी में कचरा डालते समय गली के कुत्ते ने होंठ पर काट लिया था। उसे नागरिक अस्पताल ले जाया गया। जब वहां एंटी रेबीज सीरम खत्म होने पर नरेला के अस्पताल रेफर कर दिया गया। इसके बाद उसे एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। होली पर दोबारा तबीयत बिगड़ने पर उसे दोबारा अस्पताल ले गए तो वहां उसे इलाज नहीं दिया गया। बाद में रोहतक पीजीआइ में उसकी मौत हो गई।
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"टिकोला गांव के युवक की रेबीज से मौत का मामला संज्ञान में आया है। यह एक गंभीर विषय है। मामले की तह तक जाने के लिए एक विशेष टीम गठित कर दी गई है, जो डिस्पेंसरी में हुए उपचार और बरती गई लापरवाही की जांच करेगी।"
-डाॅ. ज्योत्सना, सिविल सर्जन, सोनीपत।
बड़वासनी में बंदरों हमले बढ़े
कुत्तों के साथ-साथ अब बंदरों का आतंक भी जानलेवा साबित हो रहा है। बड़वासनी गांव में बंदरों ने दहशत फैला रखी है। एक बंदर अब तक 20 से अधिक ग्रामीणों को अपना शिकार बना चुका है।
चौंकाने वाली बात यह है कि यह बंदर सीधे व्यक्ति की गर्दन या चेहरे पर हमला करता है, जिससे लोग गंभीर रूप से घायल हो रहे हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि बीडीपीओ को कई बार लिखित शिकायत दी गई है, लेकिन वन विभाग या प्रशासन की ओर से बंदर को पकड़ने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
वहीं बीडीपीओ अंकुर कुमार का कहना है कि गांव में काफी बंदर पकड़े गए हैं। दोबारा अभियान चलाकर बंदरों को पकड़ा जाएगा।
4500 कुत्तों की हुई नसबंदी
नगर निगम की ओर से अब तक 4500 कुत्तों को नसबंदी करने का दावा किया रहा है, बावजूद इसके शहर की गलियों में आवारा कुत्ते घूमते दिखाई दे रहे है। कुत्ते हिंसक होते हुए आपस में भी लड़ते रहते हैं। कई बार तो पास से गुजर रहे लोगों को भी काट लेते हैं। ऐसे में कुत्तों से लोग भय में रहते हैं।
विशेषज्ञों की राय
- जानवर के काटने के बाद लापरवाही न बरतें।
- घाव को तुरंत साबुन और बहते पानी से 15 मिनट तक धोएं।
- घरेलू उपचार या झाड़-फूंक के चक्कर में न पड़ें, सीधे अस्पताल जाकर वैक्सीन लगवाएं।
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