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    न बुखार, न कमजोरी... फिर भी मलेरिया पॉजिटिव! जमशेदपुर में स्वास्थ्य विभाग की नई चुनौती, जानिए कैसे करें खुद का बचाव

    Updated: Sun, 12 Jul 2026 11:16 PM (IST)

    कोल्हान प्रमंडल में मलेरिया के ऐसे मरीज बड़ी संख्या में मिल रहे हैं जिनमें कोई लक्षण नहीं हैं, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ गया है। स्वास्थ्य विभाग ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. पूर्वी सिंहभूम में एक लाख से अधिक जांचें हुईं।

    2. बिना लक्षण वाले मरीज संक्रमण फैलाते, अंगों को नुकसान।

    जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। कोल्हान प्रमंडल (पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां) में मलेरिया को लेकर चौंकाने वाली और चिंताजनक स्थिति सामने आई है। 
     
    स्वास्थ्य विभाग द्वारा चलाए जा रहे व्यापक जांच अभियान में बड़े पैमाने पर ऐसे मरीज मिल रहे हैं, जिनमें मलेरिया का कोई भी सामान्य लक्षण (जैसे तेज बुखार, कमजोरी या कंपकंपी) नहीं दिख रहा है। 
     
    ये एसिम्पटोमैटिक या साइलेंट मरीज सामान्य जीवन जी रहे हैं, लेकिन इनके शरीर में मलेरिया के परजीवी (Parasites) सक्रिय पाए गए हैं।
     

    14 दिनों में एक लाख से अधिक जांच

    मलेरिया के इस नए ट्रेंड को देखते हुए पूर्वी सिंहभूम जिले में बीते 14 दिनों के भीतर 1 लाख से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है। जांच के दौरान दर्जनों ऐसे लोग संक्रमित मिले। 
     
    ये खुद को पूरी तरह स्वस्थ मान रहे थे। इस गंभीर रिपोर्ट को राज्य स्वास्थ्य विभाग को भेज दिया गया है, ताकि विशेषज्ञ इस नए पैटर्न का अध्ययन कर सकें।
     

    स्वास्थ्य विभाग के लिए क्यों चुनौती बने साइलेंट मरीज?

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण और अर्धशहरी क्षेत्रों के लोगों में बेहतर रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) होने के कारण संक्रमण के बावजूद बीमारी के लक्षण तुरंत उभरकर सामने नहीं आते। यह स्थिति दो वजहों से खतरनाक है:

    •     संक्रमण का प्रसार: चूंकि मरीज खुद को बीमार नहीं समझता, इसलिए वह इलाज नहीं कराता। ऐसे में मच्छर उसे काटकर दूसरे स्वस्थ व्यक्तियों तक संक्रमण आसानी से फैला देते हैं।
    •     अंगों को नुकसान: यदि भविष्य में व्यक्ति की इम्यूनिटी कमजोर होती है, तो यह परजीवी अचानक एक्टिव होकर मस्तिष्क (Cerebral Malaria), लीवर और अन्य महत्वपूर्ण अंगों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।


    कोल्हान में 1100 से अधिक गांव मलेरिया जोन घोषित

    संक्रमण की गंभीरता को देखते हुए पूरे प्रमंडल में स्क्रीनिंग और बचाव कार्य युद्ध स्तर पर जारी है:

    •     पूर्वी सिंहभूम: जिले के 155 उप स्वास्थ्य केंद्रों के अंतर्गत आने वाले 1069 गांवों को हाई-रिस्क मलेरिया जोन घोषित किया गया है। इसमें बहरागोड़ा, चाकुलिया, डुमरिया और मुसाबनी प्रखंड सबसे संवेदनशील हैं।
    •     पश्चिमी सिंहभूम: यहां के भी 86 गांवों को मलेरिया जोन में रखकर घर-घर स्क्रीनिंग की जा रही है।


    हेल्थ गाइड: इस नए खतरे से कैसे बचें?

    चिकित्सकों ने बदलते मौसम और मलेरिया के इस नए रूप को देखते हुए आम जनता के लिए विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है:

    • लक्षण न होने पर भी कराएं जांच: यदि आप मलेरिया प्रभावित (हॉटस्पॉट) क्षेत्रों में रहते हैं, तो स्वास्थ्यकर्मियों के आने पर अनिवार्य रूप से खून की जांच कराएं।
    • दवा का कोर्स पूरा करें: यदि जांच में रिपोर्ट पॉजिटिव आती है, तो बिना लक्षण के भी डॉक्टर द्वारा बताई गई निर्धारित अवधि तक मलेरिया की पूरी दवा लें। अधूरा इलाज परजीवी को और मजबूत बना सकता है।
    • मच्छरों से बचाव ही सर्वोत्तम उपाय: घरों के आसपास पानी जमा न होने दें, सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें और फुल आस्तीन के कपड़े पहनें।

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    मलेरिया के खिलाफ लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि कई लोग देखने में स्वस्थ हैं, लेकिन जांच में मलेरिया की पुष्टि हो रही है।

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    डाॅ. जुझार माझी, सिविल सर्जन, पश्चिमी सिंहभूम

    मलेरिया मरीजों का संपूर्ण इलाज जरूरी है। कई मरीज दो-तीन दिन दवा खाकर छोड़ देते हैं, जो खतरनाक है। लोगों को दवा कोर्स पूरा करने और जांच कराने के लिए जागरूक किया जा रहा है।

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    डाॅ. साहिर पाल, सिविल सर्जन, पूर्वी सिंहभूम