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    रांची, पलामू, बोकारो, हजारीबाग और गिरिडीह में चल रही है छापेमारी, JPSC घोटाले में सीआईडी की बड़ी कार्रवाई

    Updated: Thu, 13 Aug 2026 09:15 PM (IST)

    सीआईडी ने जेपीएससी मेधा घोटाले में सात कोचिंग संचालकों और बिचौलियों की तलाश में रांची, पलामू, बोकारो, हजारीबाग और गिरिडीह सहित पांच जिलों में छापेमारी ...और पढ़ें

    सीआईडी कोर्ट से गिरफ्तारी वारंट लेकर जिलों में डटी सीआईडी की टीम।

    सीआईडी कोर्ट से गिरफ्तारी वारंट लेकर जिलों में डटी सीआईडी की टीम।

    HighLights

    1. सीआईडी ने जेपीएससी घोटाले के सात आरोपियों की तलाश तेज की।

    2. रांची, पलामू, बोकारो, हजारीबाग, गिरिडीह में छापेमारी जारी है।

    3. ओएमआर शीट न भेजने वाले अभ्यर्थियों से भी होगी पूछताछ।

    राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की विभिन्न प्रतियोगिता परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के मामले की जांच कर रही अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी) को सात आरोपितों की तलाश है। ये आरोपित कोचिंग संचालक व बिचौलिए हैं।

    इन आरोपितों में रांची के नामकुम थाना क्षेत्र के पेप्सी ग्राउंड का रहने वाला आदित्य पांडेय, रांची के ही टाटीसिलवे थाना क्षेत्र के हरिनगर का रहने वाला पवन कुमार सिंह, पलामू के टाउन थाना क्षेत्र का रहने वाला रवि शंकर कुमार, पलामू के ही टाउन थाना क्षेत्र के हमीदगंज का निवासी संतोष कुमार सिंह शामिल है।

    बोकारो स्टील सिटी के सेक्टर-3 का निवासी सानंद प्रकाश, हजारीबाग जिले के सदर थाना क्षेत्र के कोर्रा का रहने वाला लालू कुमार यादव व गिरिडीह के बेंगाबाद थाना क्षेत्र के हथगर का रहने वाला सौरभ कुमार पांडेय भी इनमें शामिल है। सीआईडी ने रांची स्थित सीआइडी की विशेष अदालत से इनके विरुद्ध गिरफ्तारी वारंट ले लिया है।

    इन आरोपितों की तलाश में सीआईडी की छापेमारी जारी है। गौरतलब है कि जेपीएससी मेधा घोटाला मामले में सीआइडी थाना कांड संख्या 16/2026 में सीआइडी ने प्राथमिकी दर्ज की थी। इसके बाद से अब तक इस मामले में 21 आरोपित गिरफ्तार हो चुके हैं।

    गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ, छानबीन में मिले दस्तावेज, डिजिटल साक्ष्य में उपरोक्त सभी सातों आरोपितों के नाम सामने आए हैं, जिसके बाद सीआईडी ने इनकी तलाश तेज कर दी है। आरोपितों की तलाश में संबंधित जिलों व इससे जुड़े ठिकानों पर सीआइडी की टीम जमी है और उनकी तलाश कर रही है।

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    जिनकी तलाश चल रही है उनमें कुछ कोचिंग संचालक व बिचौलिए हैं। सभी जेपीएससी की परीक्षाओं में एजेंट की भूमिका में थे और अभ्यर्थियों से संपर्क कर उनकी जेपीएससी में सेटिंग कराते थे।

    सेटिंग कराने में परीक्षा संचालित कराने वाली एजेंसी मेसर्स टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक रामवीर सिंह, मार्केटिंग मैनेजर अभय कुमार तिवारी, इनके करीबी बिचौलिए व इनके सिंडिकेट के सभी सदस्य शामिल थे।

    वाट्सएप व ईमेल पर मंगाई गई ओएमआर शीट के सत्यापन में जुटी CID

    सीआईडी ने झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) के अधीन संचालित झारखंड संयुक्त असैनिक सेवा प्रतियोगिता परीक्षा 2025 (विज्ञापन संख्या-01/2026) की प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले छात्रों से वाट्सएप व ईमेल पर ओएमआर शीट की कार्बन कापी फोटो मांगी थी।

    निर्धारित अवधि तक परीक्षा में उत्तीर्ण 2204 अभ्यर्थियों में से केवल 1750 अभ्यर्थियों ने ही अपनी ओएमआर शीट भेजी थी। करीब 454 अभ्यर्थियों ने अपनी ओएमआर शीट नहीं भेजी, जिसे सीआइडी ने गंभीरता से लिया है।

    सीआईडी ओएमआर शीट नहीं भेजने वाले अभ्यर्थियों का डेटा जुटा रही है। सीआईडी के पास आई सभी ओएमआर शीट की स्क्रूटनी की जा रही है और उससे संबंधित साक्ष्य जुटाया जा रहा है। जो अभ्यर्थी ओएमआर शीट नहीं भेजे हैं, उन्हें सीआइडी जल्द ही समन करेगी और पूछताछ के लिए बुलाएगी।

    बता दें कि सीआईडी ने सभी सफल अभ्यर्थियों से सार्वजनिक नोटिस के माध्यम से सहयोग मांगा था। सीआइडी ने सार्वजनिक नोटिस के माध्यम से अभ्यर्थियों से 30 जुलाई 2026 से सात अगस्त 2026 के बीच पेपर-1 व पेपर-2 की ओएमआर शीट की कार्बन कापी की पीडीएफ बनाकर या फोटो खींचकर सीआइडी को भेजने का अनुरोध किया था।

    इसके लिए सीआईडी ने वाट्सएप नंबर 9934309058 और ईमेल आइडी कंप्लेनजेपीएससी-सीआइडी एट द रेट जेएचपुलिस डाट जीओवी डाट इन भी जारी किया था।

    एल. खियांग्ते के कंप्यूटर आपरेटर व बिंसिस के निदेशक से पूछताछ जारी

    सीआइडी की रिमांड पर वर्तमान में जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते का कंप्यूटर आपरेटर धर्मेंद्र कुमार व जेपीएससी की परीक्षा संचालन में शामिल एजेंसी बिंसिस टेक्नोलोजी प्राइवेट लिमिटेड का निदेशक अरुण कुमार उर्फ अरुण कुमार शर्मा है।

    दोनों ही आरोपितों से सीआइडी की पूछताछ जारी है। सीआइडी दोनों से जेपीएससी में अनियमितता, ओएमआर शीट में हेराफेरी सहित वित्तीय लेन-देन के बिंदुओं पर बयान ले रही है। सीआईडी दोनों से पूरे सिंडिकेट को समझ रही है, ताकि उसके आधार पर अनुसंधान, छापेमारी व दस्तावेज तथा साक्ष्य जुटाने में मदद मिल सके।

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