महंगी साइकिल नहीं ले पाया स्टेट गोल्ड मेडलिस्ट हबीबुर, परिवार चलाने के लिए पाकुड़ में चला रहा है टोटो
झारखंड के पाकुड़ जिले के हबीबुर शेख, एक राज्य स्तरीय स्वर्ण पदक विजेता साइकिल चालक हैं, जिन्हें महंगी साइकिल न खरीद पाने के कारण अपना खेल छोड़ना पड़ा। ...और पढ़ें

राज्य स्वर्ण पदक विजेता हबीबुर शेख: महंगी साइकिल के अभाव में टोटो चालक बना। (फोटो: जागरण)
HighLights
हबीबुर शेख राज्य स्तरीय साइकिलिंग में स्वर्ण पदक विजेता।
महंगी साइकिल न मिलने से राष्ट्रीय स्तर पर पिछड़ गए।
परिवार चलाने के लिए अब टोटो और खेती करते हैं।
जागरण संवादाता, रांची। झारखंड में प्रतिभाओं को संसाधन नहीं मिल पाने के कारण या तो वो खेल छोड़ देते हैं या फिर पीछे हो जाते हैं। कुछ यही कहानी है झारखंड के पाकुड़ जिले के रडांगा गांव के रहने वाले हबीबुर शेख की। जिला स्तर से राज्य स्तर की प्रतियोगिता में भाग लिया और स्वर्ण पदक जीता।
लेकिन इससे आगे बढ़ने के लिए उनको महंगी साइकिल की जरूर पड़ी तो वो पीछे हट गये। अब घर चलाने के लिए टोटो (ई रिक्शा) चलाकर गुजारा करते हैं और उनके साइकिल में अंतरराष्ट्रीय पदक जीतने का सपना पीछे छूट गया।
स्टेट में जीत चुके है स्वर्ण, अब चला रहा है टोटो
हबीबुर शेख ने 2012 में इन्होंने पुराने स्टाइल की साइकिल के करियर की शुरुआत की। जिला स्तर की सभी प्रतियोगिताओं में हबीबुर ने भाग लिया और सबमें अपना बेस्ट दिया। इसके बाद 2015 में जिला ओलिंपिक संघ की ओर से आयोजित प्रतियोगिता में पहला स्थान हासिल किया।
इसके बाद 2016 में राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और इसमें स्वर्ण पदक जीता और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता के लिए क्वालिफाई किया। अलीगढ़ में 2018 में हुए राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में ये 14वें स्थान पर रहे।
इनके पास पुरानी साइकिल होने की वजह से ये पीछे रह गये। नयी साइकिल खरीदने के लिए इनके पास पैसे नहीं थे। परिवार का खर्च चलाना था, इसलिए साइकिलिंग का सपना छोड़कर टोटो चलाने लगे और परिवार का खर्च चलाने लगे। टोटो के अलावा ये दूसरे का खेत लेकर खेती भी करते हैं।
खबरें और भी
अभी भी है हौसला, साइकिल मिले तो दिखा देंगे दम
हबीबुर शेख का कहना है कि मेरे पास इतने पैसे नहीं है कि मैं सात लाख की साइकिल खरीद सकूं। इसलिए इस खेल से बाहर हो गया। लेकिन अभी भी अगर मुझे नयी साइकिल मिलती है तो मैं अपना दम दिखा दूंगा।
वह कहते हैं- मैंने हमेशा अपना बेस्ट दिया है राष्ट्रीय स्तर तक भी पहुंचा हूं, लेकिन सिर्फ एक अच्छी साइकिल के कारण ही पीछे हट जाता हूं।
यह भी पढ़ें- CUJ के वैज्ञानिकों का कमाल! संध्या मालती फूल से बना डाला सोलर सेल, बहुत सस्ती और सुरक्षित होगी सौर ऊर्जा
यह भी पढ़ें- हर महीने 1 करोड़ का जुर्माना भर रहे रांची के लोग, फिर भी बकाया ₹180 करोड़; स्कूटी पर निकला ₹1.10 लाख का चालान
यह भी पढ़ें- 7 लाख की साइकिल से 17 लाख वालों को टक्कर, इक्विपमेंट की कमी से टूट रहा झारखंड के खिलाड़ियों का सपना