लोहड़ी की अग्नि में क्यों डाले जाते हैं 'रेवड़ी-फुल्ले'... क्या इन रस्मों का असली मतलब जानते हैं आप?
उत्तर भारत के सबसे लोकप्रिय त्योहारों में से एक, लोहड़ी केवल नाच-गाने का ही सीमित नहीं है, बल्कि यह एक समृद्ध परंपरा का प्रतीक भी है (Significance of ...और पढ़ें

सिर्फ शगुन नहीं है लोहड़ी की अग्नि में 'फुल्ले' डालना, वजह जानकर आप भी करेंगे इस रस्म का सम्मान (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। मकर संक्रांति से ठीक एक दिन पहले आने वाला लोहड़ी का त्योहार फसल की कटाई से जुड़ा है। यह सर्दियों के सबसे छोटे दिनों के अंत और लंबे, गर्म दिनों की शुरुआत का प्रतीक है। लोहड़ी के दौरान आग जलाना और उसमें खाने की चीजें डालना एक आम दृश्य है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि हम ऐसा क्यों करते हैं (Significance of Lohri Bonfire Rituals)? आइए, विस्तार से समझते हैं।

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अग्नि में आहुति का महत्व
लोहड़ी की जलती अग्नि में पॉपकॉर्न, मूंगफली, रेवड़ी और गुड़ जैसी चीजें डालने का एक विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। यह कार्य प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने का एक तरीका है। माना जाता है कि ऐसा करके लोग अपने बीते हुए कल को पीछे छोड़ते हैं और नई उम्मीदों के साथ नए साल को गले लगाते हैं। अग्नि के चारों ओर इकट्ठा होकर लोग अपने जीवन में समृद्धि और खुशहाली के लिए आशीर्वाद मांगते हैं।
शुभता और फसल का आशीर्वाद
पुरानी मान्यताओं के अनुसार, अग्नि देवता को रेवड़ी, मूंगफली और फुल्ले यानी पॉपकॉर्न अर्पित करना जीवन में 'गुड लक' या सौभाग्य लेकर आता है। चूंकि, यह त्योहार खेती और फसल से जुड़ा है, इसलिए इन खाद्य पदार्थों को आग में डालना प्राकृतिक तत्वों के प्रति सम्मान दिखाने का एक रूप है। किसान और आम लोग प्रार्थना करते हैं कि अग्नि देवता आने वाले कृषि मौसम में उन पर अपनी कृपा बनाए रखें।

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जीवन चक्र और वसंत का स्वागत
यह परंपरा जीवन के चक्र को भी दर्शाती है- सर्दियों की विदाई और वसंत के साथ नई फसलों का आगमन। इतिहास बताता है कि जब ये खाने की चीजें आग में चटकती हैं, तो उनकी आवाज सर्दियों के प्रकोप के टूटने और गर्मी के आगमन का संकेत देती है। यह एक तरह से जीवन में गर्माहट के लौटने का जश्न है।
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सेहत का खजाना है लोहड़ी का पॉपकॉर्न
लोहड़ी पर खाए जाने वाले पॉपकॉर्न सिनेमा हॉल के बटर वाले पॉपकॉर्न से काफी अलग और सेहतमंद होते हैं। यह कम कैलोरी वाला स्नैक फाइबर और पॉलीफेनोल्स से भरपूर होता है, जो शरीर को बीमारियों से बचाने में मदद करता है। यह लो-फैट और कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट का अच्छा स्रोत है। त्योहार के बाद, आप इन पॉपकॉर्न को और ज्यादा पौष्टिक बनाने के लिए उन्हें मसालों, तेल, सोया या कढ़ी पत्ते के साथ भून सकते हैं।
प्रेम और एकता का प्रतीक
कुल मिलाकर, लोहड़ी स्वास्थ्य, प्रेम और एकजुटता का संगम है। लोग अलाव के चारों ओर भंगड़ा और गिद्दा जैसे लोक नृत्य करते हैं और पारंपरिक गीत गाते हैं। आग में भोग लगाने के अलावा, एक-दूसरे को गजक, रेवड़ी, मूंगफली और तिल से बनी मिठाइयां बांटना आपसी प्यार और भाईचारे को दर्शाता है।