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    स्वाद से समझौता किए बिना थाली से कैसे घटाएं नमक? शेफ ने बताया हेल्दी ईटिंग का सीक्रेट फॉर्मूला

    Updated: Sun, 17 May 2026 07:00 AM (IST)

    आइए इस आर्टिकल में शेफ अजय चोपड़ा से जानते हैं कि कैसे हम अपने खाने का जायका बरकरार रखते हुए भी डाइट से नमक की मात्रा को कम कर सकते हैं। ...और पढ़ें

    स्वाद से समझौता किए बिना कैसे कम करें नमक? (Image Source: AI-Generated)

    स्वाद से समझौता किए बिना कैसे कम करें नमक? (Image Source: AI-Generated) 

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    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

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    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आज 17 मई को World Hypertension Day मनाया जा रहा है, जिसका मुख्य उद्देश्य हाई बीपी जैसी साइलेंट किलर बीमारी के प्रति लोगों को जागरूक करना है। भारत में हाइपरटेंशन के बढ़ते मामलों का एक बड़ा कारण हमारे भोजन में सोडियम यानी नमक की अधिक मात्रा है।

    जी हां, भारतीय रसोई में एक आम नजारा देखने को मिलता है- सब्जी या दाल पकने के बाद उसे चखना और फिर ऊपर से चुटकी भर नमक और डाल देना। जी हां, हम भारतीयों के लिए नमक सिर्फ एक मसाला नहीं है, बल्कि यह खाने को मुकम्मल करने का आखिरी तरीका है।

    यही कारण है कि जब सेहत के नाम पर "कम नमक" खाने की सलाह दी जाती है, तो वह अक्सर बेअसर साबित होती है। आखिर हम अपने प्रियजनों के लिए बड़े प्यार से खाना बनाते हैं। अगर नमक कम करने से खाने का मजा ही छिन जाए, तो कोई भी उस बदलाव को लंबे समय तक नहीं अपनाना चाहेगा।

    Low sodium diet

    (Image Source: AI-Generated) 

    WHO की सीमा 5 ग्राम, हम खा रहे हैं 8 ग्राम नमक

    आज के समय में हमारे लिए यह समझना बहुत जरूरी है कि हम अंजाने में जरूरत से ज्यादा नमक खा रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, एक स्वस्थ इंसान को दिन भर में 5 ग्राम (2000 मिलीग्राम सोडियम) से कम नमक खाना चाहिए, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि भारत में लोग रोजाना औसतन 8 ग्राम नमक खा रहे हैं। सबसे बड़ी परेशानी यह है कि यह एक्स्ट्रा सॉल्ट सिर्फ हमारे नमकदानी से नहीं आता, बल्कि यह हमारे मनपसंद अचार, पापड़, चटनी और बाहर के स्वादिष्ट खानों में छिपकर हमारे शरीर में पहुंचता है। हमें लगता है कि हम घर का सादा और संतुलित खाना खा रहे हैं, लेकिन सोडियम का स्तर धीरे-धीरे बढ़ता जाता है।

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    खाने की महक और तीखापन खोए बिना कैसे घटाएं नमक?

    शेफ अजय चोपड़ा जैसे विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में नमक कम करने की मुहिम तभी सफल होगी जब हम 'स्वाद' को इस चर्चा के केंद्र में रखेंगे। नमक हमारे खाने की महक को निखारता है और स्वाद को तीखापन देता है। अगर आप रेसिपी में सिर्फ नमक कम कर देंगे, तो खाना एकदम फीका और अधूरा लगेगा। इसका असली समाधान नमक को सिर्फ हटाना नहीं, बल्कि उसकी जगह खाने में एक नया 'गहरापन' लाना है।

    यहीं पर 'उमामी' नाम का स्वाद हमारे काम आता है। उमामी खाने में एक तरह का लजीज और भरपूर स्वाद लाता है, जो प्राकृतिक रूप से टमाटर, मशरूम और खमीर वाली चीजों में पाया जाता है।

    खाने में 38% सोडियम घटा सकता है MSG

    कम नमक वाले खाने को स्वादिष्ट बनाने में एमएसजी एक बेहतरीन और व्यावहारिक विकल्प साबित हो सकता है। अगर खाने में नमक की मात्रा घटाकर थोड़ी मात्रा में MSG मिलाया जाए, तो स्वाद बिल्कुल वैसा ही रहता है और शरीर में जाने वाला सोडियम 38% तक कम हो जाता है। भारतीय खाने में इसका इस्तेमाल इसलिए भी एकदम सटीक बैठता है क्योंकि हमारे यहां मसालों और धीमी आंच पर पकाने के तरीके से पहले ही खाने में बहुत स्वाद होता है।

    भारत के मशहूर रिसर्च संस्थान 'CSIR–CFTRI' ने भी अपने एक अध्ययन में इसे साबित किया है। उन्होंने आमतौर पर खाए जाने वाले भारतीय व्यंजनों में नमक और MSG के सही मिश्रण का इस्तेमाल किया और पाया कि खाने के स्वाद को बिगाड़े बिना व्यंजनों में 22 से 32% तक सोडियम कम किया जा सकता है।

    रोज के खाने में धीरे-धीरे नमक कम करने का सही तरीका

    इसकी शुरुआत उन चीजों से करें जो घर में रोज बनती हैं- जैसे दाल, खिचड़ी, सूप, और ग्रेवी वाली सब्जियां। नमक को एक झटके में कम करने के बजाय धीरे-धीरे कम करें ताकि आपके परिवार को इसका पता भी न चले और उनकी जीभ को नए स्वाद की आदत पड़ जाए। उमामी स्वाद बढ़ाने वाली चीजों का इस्तेमाल करें। इससे आपकी दाल और ग्रेवी का स्वाद और भी निखर कर आएगा।

    सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियानों को भी यह समझना होगा कि सेहतमंद खाने का मतलब 'सजा' जैसा खाना नहीं है। कुकिंग स्कूलों और रेस्तरां को भी आगे आकर ऐसी तकनीकें सिखानी चाहिए जिनसे कम नमक में भी खाना लजीज बन सके। भारतीय भोजन की सबसे बड़ी खासियत ही उसका बेहतरीन 'संतुलन' है। जिस तरह हम मसालों, बनावट और तीखेपन को संतुलित करते हैं, उसी तरह हम सोडियम को भी बैलेंस कर सकते हैं। जब खाने का स्वाद बरकरार रहेगा, तभी सेहत से जुड़े बदलाव स्थायी और सफल बन पाएंगे।

    References:

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