तरबूज नेचुरल है या इंजेक्शन वाला? इन तरीकों से बस 2 मिनट में करें मिलावट की पहचान
केमिकल से पका तरबूज सेहत के लिए काफी नुकसानदेह है। कुछ आसान तरीकों से घर पर केमिकली पके तरबूज की पहचान कर सकते हैं। ...और पढ़ें

केमिकल से पका तरबूज सेहत को पहुंचाता है नुकसान (Picture Courtesy: Freepik)

समय कम है?
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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। तपती गर्मी में तरबूज से बेहतर कुछ नहीं लगता, लेकिन बाजार में बिकने वाला हर तरबूज आपकी सेहत के लिए फायदेमंद नहीं होता।
मुनाफा कमाने के चक्कर में कई दुकानदार तरबूज को जल्दी पकाने के लिए कैल्शियम कार्बाइड या एरिथ्रोसिन जैसे खतरनाक केमिकल्स का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे तरबूज आपकी सेहत के लिए जहर हैं, लेकिन आप कुछ आसान टिप्स से केमिकली पके तरबूजों की पहचान कर सकते हैं। आइए जानें कैसे।
टिश्यू पेपर टेस्ट
तरबूज का एक टुकड़ा काटें और एक साफ सफेद टिश्यू पेपर को पल्प पर रगड़ें। अगर टिश्यू पर गहरा लाल या गुलाबी रंग आ जाए, तो समझ लें कि इसमें आर्टिफिशियल कलर मिलाया गया है। प्राकृतिक तरबूज का रंग टिश्यू पर इस तरह नहीं चढ़ता।
पानी का टेस्ट
तरबूज का एक छोटा टुकड़ा लें और उसे एक गिलास पानी में डाल दें। अगर पानी तुरंत गहरा लाल या गुलाबी होने लगे, तो इसमें मिलावट है। प्राकृतिक तरबूज का जूस पानी में इतनी जल्दी और इतने गहरे रंग में नहीं घुलता।
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(Picture Courtesy: Freepik
फील्ड स्पॉट देखें
प्राकृतिक रूप से पका तरबूज बाहर से थोड़ा मटमैला या गहरे हरे रंग का होता है। सबसे जरूरी पहचान है फील्ड स्पॉट यानी वह हिस्सा जहां तरबूज जमीन पर रखा होता है। अगर यह हिस्सा हल्का पीला है, तो तरबूज प्राकृतिक रूप से पका हुआ है। अगर पूरा तरबूज एक समान चमक रहा है और उस पर कोई पीला धब्बा नहीं है, तो समझ जाइए उसे केमिकल से चमकाया गया हो सकता है।
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बीजों की बनावट
प्राकृतिक रूप से पके तरबूज के बीज गहरे काले या भूरे और पूरी तरह विकसित होते हैं। अगर तरबूज अंदर से बहुत लाल है लेकिन उसके बीज सफेद, कच्चे या अविकसित हैं, तो इसका मतलब है कि उसे इंजेक्शन देकर जबरदस्ती लाल किया गया है।
चमक और बनावट
अगर काटने पर तरबूज जरूरत से ज्यादा चमकीला दिखे और उसमें बीच में कहीं भी रंग का बदलाव न हो, तो यह केमिकल से पकाया हो सकता है। प्राकृतिक तरबूज में रंग थोड़ा असमान हो सकता है।
केमिकल वाला तरबूज सेहत को कैसे पहुंचाता है नुकसान?
- पाचन तंत्र में गड़बड़ी- केमिकल वाले फल खाने से पेट में तेज दर्द, उल्टी, दस्त और फूड पॉइजनिंग की समस्या हो सकती है।
- किडनी और लिवर पर असर- हमारे शरीर के ये दो अंग खून से टॉक्सिन्स साफ करते हैं। केमिकल्स के कारण लिवर सेल्स डैमेज हो सकते हैं और लंबे समय में किडनी फेलियर का कारण बन सकते हैं।