कहीं आपको तो नहीं साइलेंट हार्ट अटैक का खतरा? अब पलक झपकते ही AI पकड़ लेगा बीमारी
नई रिसर्च के अनुसार, AI बेस्ड ईसीजी व्याख्या मानक तरीकों की तुलना में ऑक्लूसिव मायोकार्डियल इन्फार्क्शन का पता लगाने में ज्यादा सटीक है। ...और पढ़ें

नॉर्मल ECG रिपोर्ट के बाद भी आ सकता है हार्ट अटैक? (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
एएनआई, सोफिया एंटीपोलिस (फ्रांस)। दुनिया में हार्ट अटैक के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। ईसीजी की व्याख्या करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर आधारित आक्लूसिव मायोकार्डियल इन्फार्शन (एमआई) का पता लगाने में मानक तरीकों से बेहतर प्रदर्शन किया। यूरोपियन सोसाइटी ऑफ कार्डियोलाजी (ईएससी) की एक शाखा, एसोसिएशन फार एक्यूट कार्डियोवैस्कुलर केयर (एसीवीसी) के सम्मेलन ईएससी एक्यूट कार्डियोवैस्कुलर केयर 2026 में पेश किए गए एक अध्ययन के अनुसार यह जानकारी सामने आई।

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मरीज की कोरोनरी धमनी में रुकावट
जिन मरीजों में एक्यूट कोरोनरी सिंड्रोम एलिवेशन इन्फार्शन है (एसीएस) का शक होता है, उनके ईएससी में खास बदलाव जिसे एसटी एलिवेशन कहते हैं, इस बात का संकेत होता है कि मरीज की कोरोनरी धमनी में रुकावट हो सकती है। इस तरह के हार्ट अटैक एसटी मायोकार्डियल (एसईएमआई) के नाम से जाना जाता और हार्ट में खून का बहाव फिर से शुरू करने के लिए इसमें तुरंत परक्यूटेनियस कोरोनरी इंटरवेंशन की जरूरत होती है। जिन मरीजों में एसटी एलिवेशन नहीं होता, उनमें सीने में दर्द का कारण कम निश्चित हो सकता है।
इटली के सेंट्रल हास्पिटल बोलजानो के डॉक्टर फेडेरिको नानी ने समझाया कि कई रोगियों में जिनमें एसटी वृद्धि नहीं होती है, आक्लूसिव एमआई होता है, लेकिन डाक्टरों के लिए इसे जल्दी व सटीक रूप से पहचानना कठिन हो सकता है, जिससे इमरजेंसी उपचार में देरी होती है। हमने यह जांचा कि क्या प्रारंभिक ईसीजी की एआई आधारित व्याख्या आक्लूसिव एमआई का पता लगाने की सटीकता में सुधार कर सकती है।"
1,490 मरीजों पर किया अध्ययन
इस सिंगल सेंटर संभावित अध्ययन में 1,490 मरीज शामिल थे, जिनमें एसीएस के लक्षण थे, लेकिन शुरुआती ईसीजी में एसटी एलिवेशन नहीं था। इनकी औसत उम्र 63 साल थी और इनमें से 42 प्रतिशत महिलाएं थीं। डाक्टरों ने शुरुआती ईसीजी की जांच की, कार्डियक बायोमार्कर ट्रोपोनिन के लेवल की जांच की और जरूरत पड़ने पर ईएससी गाइडलाइंस के आधार पर आक्लूसिव एमआइ का पता लगाने के लिए कोरोनरी एंजियोग्राफी की। शुरुआती ईसीजी की जांच एक स्मार्टफोन आधारित सीई सर्टिफाइड एआई ईसीजी एल्गोरिदम द्वारा भी की गई।
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42 प्रतिशत मामलों में आक्लूसिव एमआई की सही पहचान की
एआई आधारित ईसीजी व्याख्या ने 1,382 मरीजों में आक्लूसिव एमआइ की संभावना को खारिज कर दिया और 108 मरीजों (7 प्रतिशत) में इसका पता लगाया। एआई आधारित तरीके ने 84 प्रतिशत मामलों में आब्सट्रक्टिव एमआई की। इसकी की सही पहचान संवेदनशीलता 77 प्रतिशत, विशिष्टता 99 प्रतिशत व नकारात्मक भविष्यवाणी मूल्य 98 प्रतिशत थी। इसमें 27 झूठे नकारात्मक (2 प्रतिशत) और 17 झूठे सकारात्मक (1 प्रतिशत) मामले सामने आए। 1,207 मरीजों में ट्रोपोनिन के स्तर के आधार पर आक्लूसिव एमआइ की संभावना को खारिज कर दिया गया व 283 मरीजों की कोरोनरी एंजियोग्राफी की गई, ताकि निदान की पुष्टि या उसे खारिज किया जा सके। ईसीजी व्याख्या ने 42 प्रतिशत मामलों में आक्लूसिव एमआइ की सही पहचान की।
डॉक्टर नानी ने निष्कर्ष निकाला कि यह सरल, सुलभ एआई आधारित दृष्टिकोण एसटी वृद्धि के बिना रोगियों में आक्लूसिव एमआइ की पहचान में पारंपरिक निदान की तुलना में बेहतर सटीकता प्रदर्शित करता है।
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