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    14 साल के बच्चे को आया हार्ट अटैक! 3 लक्षणों को न करें इग्नोर; डॉक्टर ने दी चेतावनी

    Updated: Sat, 09 May 2026 07:07 PM (IST)

    हाल ही में 14 साल के बच्चे की हार्ट अटैक से मौत के बाद बच्चों में दिल के दौरे के बढ़ते खतरे पर चिंता जताई गई है। डॉक्टर अतुल सुरेंद्रप्रभु ने बताया कि ...और पढ़ें

    बच्चों में हार्ट अटैक का खतरा (Picture Credit- Freepik)

    बच्चों में हार्ट अटैक का खतरा (Picture Credit- Freepik)

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    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

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    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। हाल ही में एक खबर सामने आई, जिसमें एक 14 साल के बच्चे की हार्ट अटैक से मौत हो गई। इस खबर के सामने आते ही हर कोई हैरान रह गया, क्योंकि इतनी छोटी उम्र में हार्ट अटैक होना काफी चिंता का विषय है। 

    ऐसे में इस बारे में विस्तार से जानने के लिए हमने नारायणा हेल्थ सिटी, बेंगलुरु में पीडियाट्रिक/कॉन्जेनिटल कार्डियोलॉजिस्ट और इलेक्ट्रोफिजियोलॉजिस्ट डॉ. अतुल सुरेंद्रप्रभु से बातचीत ती और जाना क्यों और कैसे बच्चों में बढ़ रहा है हार्ट अटैक का खतरा- 

    क्या कहते हैं डॉक्टर?

    डॉक्टर बताते हैं कि ऐसे मामले दुर्लभ हैं, लेकिन ये हमें याद दिलाते हैं कि "बच्चों में हार्ट डिजीज के लक्षण कभी भी सामान्य नहीं होते"। खेल के दौरान सीने में दर्द, बेहोशी या धड़कन तेज होने जैसे लक्षणों को इग्नोर नहीं करना चाहिए और तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए, न कि गूगल पर सर्च करना चाहिए। 

    क्या बच्चों को भी दिल का दौरा पड़ सकता है?

    हां, लेकिन यह बहुत दुर्लभ है। जब हम वयस्कों में हार्ट अटैक की बात करते हैं, तो इसका मतलब आमतौर पर कोलेस्ट्रॉल के कारण कोरोनरी आर्टरीज में रुकावट होता है। बच्चों में, कोरोनरी आर्टरी डिजीज की वजह से मायोकार्डियल इन्फार्क्शन (हार्ट अटैक) आने के मामले काफी असामान्य है। 

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    अक्सर, बच्चों में जो हार्ट अटैक जैसा दिखता है, वह असल में पहले से मौजूद किसी हेल्थ कंडीशन जैसे कॉन्जेनिटल हार्ट डिफेक्ट, कोरोनरी आर्टरीज की एब्नॉर्मेलिटी, कार्डियोमायोपैथी, लॉन्ग क्यूटी (Long QT) सिंड्रोम जैसे दिल की अनियमित की धड़कन (arrhythmias) या मायोकार्डिटिस के कारण अचानक होने वाला कार्डियक अरेस्ट होता है। ये बिना किसी चेतावनी के अचानक दिल की धड़कन रोक सकते हैं।

    बच्चों में दिल के दौरे के बढ़ते मामलों का क्या कारण है?

    डॉक्टर बताते हैं कि जहां बुजुर्गों में लाइफस्टाइल फैक्टर जैसे डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, स्मोकिंग, मोटापा, तनाव और इनएक्टिव लाइफस्टाइल शामिल है। वहीं, युवाओं और किशोरों में, इसके बढ़ते मामलों के पीछे 3 चीजें जुड़ी हुई हैं:-

    • सही समय पर पहचान- ज्यादा जागरूकता और स्क्रीनिंग इन मामलों को पकड़ लेती है, जो पहले छूट जाते थे।
    • जम्न से होने वाली या जेनेटिक बीमारी- जैसे हाइपरट्रॉफिक कार्डियोमायोपैथी या असामान्य कोरोनरी आर्टरीज, जो पहली बार खेल या तनाव के दौरान सामने आती हैं।
    • जीवनशैली में बदलाव- खराब नींद, एनर्जी ड्रिंक्स, नशीले पदार्थों का सेवन, वेपिंग, बहुत ज्यादा, और स्कूली बच्चों में भी उच्च तनाव का स्तर। कोविड के बाद मायोकार्डिटिस भी एक दुर्लभ लेकिन वास्तविक कारक रहा है।

    क्या हैं इसके प्रमुख कारण और रिस्क फैक्टर?

    • स्ट्रक्चरल हार्ट डिफेक्ट, अब्नॉर्मल कोरोनरी हार्ट डिजीज, मारफन सिंड्रोम या जेनेटिक बीमारी, क्यूटी सिंड्रोम आदि।
    • छाती पर गंभीर चोट जिससे कोमोशियो कॉर्डिस (commotio cordis) होता है, नशीले पदार्थों का इस्तेमाल, बहुत ज्यादा फिजिकल एक्टिविटी करना है, जिससे निदान न की गई हेल्थ कंडीशन भी खतरनाक हो सकती है।
    • इसके अलावा 20-40 साल के युवाओं में, डायबिटीज, धूम्रपान, मोटापा, फैमिली हिस्ट्री और तनाव के कारण समय से पहले कोरोनरी आर्टरी डिजीज अब पहले की तुलना में ज्यादा आम है।

    इसे रोकने के क्या तरीके है?

    • बच्चों के लिए: बेहोशी, दौरे, शारीरिक मेहनत के दौरान सीने में दर्द, या 50 वर्ष से कम उम्र में अचानक मौत की फैमिली हिस्ट्री वाले किसी भी बच्चे को कार्डियक डिजीज की समय पर पहचान के लिए ईसीजी (ECG), इको (echo) की जरूरत होती है।
    • प्री- स्पोट्स चेकअप: प्रतिस्पर्धी खेलों से पहले बेसिक चेकअप छिपी हुई हेल्थ कंडीशन को पकड़ सकती है।
    • जागरूकता: स्कूलों में सीपीआर (CPR) सिखाएं। खतरे के संकेतों को पहचानें और धड़कन बढ़ने या बेहोशी को नजरअंदाज न करें।
    • लाइफस्टाइल में सुधार: रेगुलर एक्सरसाइज, संतुलित आहार, तंबाकू/वेपिंग से परहेज, एनर्जी ड्रिंक्स को सीमित करें, स्ट्रेस मैनेज करें।
    • रिस्क फैक्टर्स पर कंट्रोल: अगर फैमिली हिस्ट्री है,  तो 20 साल की उम्र से बीपी, शुगर, कोलेस्ट्रॉल की जांच कराएं।
    • पूरी नींद लें: रोजाना 7-9 घंटे की नींद जरूर लें। नींद की कमी दिल से जुड़ी बीमारियों के खतरे को बढ़ाती है।

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