स्क्रीन टाइम छीन रहा है आंखों की नमी! 'डिजिटल आई स्ट्रेन' से बचने के लिए अपनाएं डॉक्टर के बताए 5 उपाय
ज्यादा स्क्रीन टाइम 'आई बर्नआउट' या 'डिजिटल आई स्ट्रेन' का कारण बनता है, जिससे आंखों में सूखापन, जलन और थकान महसूस होती है। ...और पढ़ें

स्क्रीन टाइम छीन रहा है आपकी आंखों की नमी; जानिए क्या है 'आई बर्नआउट' और इससे बचने का तरीका (Image Source: AI-Generated)
HighLights
लंबे स्क्रीन टाइम से होता है 'आई बर्नआउट' या डिजिटल आई स्ट्रेन
आंखों की थकान से बचने के लिए 20-20-20 नियम अपनाएं
उचित दूरी, रोशनी और पलकें झपकाना आंखों के लिए फायदेमंद
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आज के इस डिजिटल जमाने में हमारा ज्यादातर वक्त कंप्यूटर, लैपटॉप या मोबाइल की स्क्रीन के सामने ही गुजरता है। खासकर अगर आप ऑफिस में काम करते हैं, तो 8 घंटे या उससे ज्यादा समय तक स्क्रीन को घूरना आपकी दिनचर्या का एक आम हिस्सा बन चुका होगा।
क्या आपको पता है कि यह आदत सिर्फ आपके काम को ही नहीं, बल्कि आपकी आंखों की सेहत को भी बुरी तरह प्रभावित कर रही है? लंबे समय तक स्क्रीन देखने से होने वाली इस परेशानी को मेडिकल भाषा में 'आई बर्नआउट'या 'डिजिटल आई स्ट्रेन' कहा जाता है।
आइए जानते हैं कि आखिर यह समस्या क्या है और ग्वालियर के रतन ज्योति नेत्रालय के संस्थापक, निदेशक और सर्जन डॉ. पुरेंद्र भसीन इससे बचाव के लिए क्या सलाह दे रहे हैं।

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क्या होता है आंखों के साथ?
जब हम स्क्रीन पर लगातार टकटकी लगाए रहते हैं, तो हमारी पलकें झपकने की रफ्तार सामान्य से काफी कम हो जाती है। पलकें कम झपकने का सीधा असर आंखों की नमी पर पड़ता है और वे तेजी से सूखने लगती हैं। इसके कारण आंखों में सूखापन, तेज जलन, खुजली और भारीपन महसूस होने लगता है। कई बार तो ऐसा लगता है मानो आंखों में रेत के कण चले गए हों या आंखें बुरी तरह थक चुकी हों।
कैसे पहचानें 'आई बर्नआउट' के लक्षण?
शुरुआत में इसे पहचानना थोड़ा मुश्किल हो सकता है, लेकिन आपकी बॉडी इसके कई संकेत देती है:
- आंखों का लाल होना और धुंधला दिखाई देना।
- बार-बार सिरदर्द सताता है।
- गर्दन और कंधों में लगातार दर्द बने रहना।
- स्क्रीन पर फोकस करने में दिक्कत होना।
- लंबे समय तक काम करने के बाद आंखों में दर्द या तेज रोशनी का चुभना।
अगर आप इन संकेतों को नजरअंदाज करते हैं, तो आपकी परेशानी और काम करने की क्षमता दोनों पर बुरा असर पड़ सकता है।
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कितना बड़ा है यह खतरा?
राहत की बात यह है कि आई बर्नआउट से आमतौर पर आंखों को कोई हमेशा के लिए नुकसान नहीं पहुंचता, लेकिन यह आपकी रोजमर्रा की जिंदगी और कार्यक्षमता को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है।
लगातार दबाव पड़ने से आंखों की थकान बढ़ती है, काम में ध्यान लगाना मुश्किल हो जाता है और बार-बार ब्रेक लेने का मन करता है। जिन लोगों को पहले से ही 'ड्राई आई सिंड्रोम' या नजर की समस्या है, उनके लिए यह स्थिति और भी ज्यादा गंभीर हो सकती है।
'आई बर्नआउट' से बचाव के कारगर उपाय
डॉ. पुरेंद्र भसीन के अनुसार, इस समस्या से बचने के लिए अपनी दिनचर्या में कुछ छोटे-छोटे बदलाव करना बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है:
- जादुई 20-20-20 नियम: काम के दौरान हर 20 मिनट के बाद कम से कम 20 सेकंड का ब्रेक लें और 20 फीट दूर रखी किसी भी चीज को देखें। यह आसान सा काम आंखों की मांसपेशियों को आराम देता है और फोकस करने वाले स्ट्रेस को कम करता है।
- दूरी और रोशनी: स्क्रीन और अपनी आंखों के बीच एक सही दूरी बनाकर रखें। साथ ही, जिस कमरे में आप काम कर रहे हैं, वहां रोशनी की पर्याप्त व्यवस्था होनी चाहिए।
- ब्राइटनेस सेट करें: अपने आस-पास के माहौल के हिसाब से ही स्क्रीन की ब्राइटनेस को एडजस्ट करें, ताकि आंखों पर चुभन न हो।
- पलकें झपकाते रहें: काम के बीच-बीच में जानबूझकर अपनी पलकें झपकाते रहने की आदत डालें ताकि आंखों की नमी बरकरार रहे।
- खान-पान और नींद: भरपूर मात्रा में पानी पिएं और पर्याप्त नींद लें। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह लेकर लुब्रिकेटिंग आई ड्रॉप्स का इस्तेमाल भी किया जा सकता है।
अगर ये सारे उपाय करने के बाद भी आपको धुंधलापन, आंखों में तेज दर्द या सिरदर्द जैसी शिकायतें लंबे समय तक बनी रहती हैं, तो बिना देर किए किसी नेत्र विशेषज्ञ से अपनी आंखों की जांच जरूर करवाएं।