मानसून में पेट दर्द, उल्टी और ऐंठन को न लें हल्के में, हो सकता है 'Stomach Flu', पढ़ें बचाव का सही तरीका
नमी और उमस भरे मौसम के चलते इन दिनों स्टमक फ्लू (गैस्ट्रोएंटेराइटिस) के मामले अधिक देखे जा रहे हैं। ...और पढ़ें

मानसून में स्टमक फ्लू से रहें सावधान (Picture Courtesy: Freepik)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। तेज गर्मी और लू के बाद बारिश के चलते भले ही तापमान में कमी आ गई हो, पर यह मौसम में नई तरह की मुसीबतें लेकर आता है। एक ग्लास पानी भी सेहत के लिए बड़ी मुसीबत बन सकता है। नेशनल सेंटर फार डिजीज कंट्रोल के अनुसार, देश में जलजनित बीमारियां जन स्वास्थ्य के लिए एक बड़ी चुनौती हैं।
यही कारण है कि एनसीडीसी निरंतर खास तौर पर वर्षा के दिनों में जन जागरूकता कार्यक्रमों के जरिये साफ-सफाई और स्वच्छ पेय जल, खानपान संबंधी दिशा-निर्देश जारी करता है। स्वच्छ पेय जल जरूरी है, पर इसके साथ-साथ आपको अपने खानपान को लेकर भी उतना ही सजग रहना चाहिए, अन्यथा इन दोनों को लेकर की जाने वाली छोटी सी भी लापरवाही आपको स्टमक फ्लू का आसान शिकार बना सकती है।
बारिश के मौसम में चटपटे खानपान का स्वाद और अधिक बढ़ जाता है। लोग खुले में बिकने वाले खानपान के प्रति अधिक आकर्षित हो जाते हैं, पर यही आदत बन जाती है मुसीबत, क्योंकि अधिकांशत: इसी मौसम में पेट से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ाने का कारण इनका सेवन होता है।
इन्हीं दिनों में लोग फूड प्वाइजनिंग के भी अधिक शिकार होते हैं। हालांकि फूड प्वाइजनिंग होने पर इसके लक्षण तुरंत दिखने लगते हैं, तो वहीं स्टमक फ्लू को ठीक से उभरने में थोड़ा समय लगता है। स्टमक फ्लू सामान्य तौर पर नोरावायरस के कारण होता है, जबकि फूड प्वाइजनिंग का कारण विषाक्त भोजन है।
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बता दें कि स्टमक फ्लू पेट से जुड़ा एक गंभीर संक्रमण है, जिससे डिहाइड्रेशन और इससे उपजी जटिल समस्याएं जैसे मांसपेशियों में ऐंठन, रक्तचाप में भारी कमी के साथ मानसिक भ्रम आदि जैसी जटिल स्थिति भी पैदा हो सकती है।
क्या हैं इसके प्रमुख कारण?
इस मौसम में स्टमक फ्लू (गैस्ट्रोएंटेराइटिस) का खतरा अत्यधिक बढ़ने के पीछे अनेक कारण हैं। इसमें सबसे पहला है, गर्म व उमस भरे मौसम में यह बीमारी फैलाने वाले बैक्टीरिया व वायरस का तेजी से पनपना।
दरअसल, उमस व नमी अनेक प्रकार के सूक्ष्म जीवाणु को पनपने के लिए आदर्श परिस्थितियां उपलब्ध कराती हैं। यदि स्टमक फ्लू का संक्रमण अधिक गंभीर होता है तो यह पाचन तंत्र के अलावा शरीर के दूसरे अंगों को भी प्रभावित कर सकता है।
वर्षा जल का गलत प्रयोग
अक्सर देखा जाता है कि संग्रहित वर्षा जल या जब बारिश हो रही हो तो खेतों काम करने वाले लोग फल और सब्जियां उसमें धो लेते हैं। बारिश के इस मौसम में यह तरीका सही नहीं है। इस मौसम में फल व सब्जियों के उगाने, बाजार तक लाने या संग्रह करने के दौरान पेस्टिसाइड छिड़काव के साथ इन पर सूक्ष्म जीवों के पनपने की आशंका अधिक होती है। ऐसे में बेहतर होगा कि उन्हें थोड़ी देर पानी में विनेगर डालकर भिगो दें।
रसोई में स्वच्छता है बहुत जरूरी
स्टमक फ्लू का संक्रमण कच्चे यानी रा पदार्थों से भी फैल सकता है, इसलिए ध्यान रहे कि खाद्य सुरक्षा का अर्थ केवल रसोई घर तक राशन लाने का सीमित नहीं है। यह आपके रसोई घर में रखे सब्जी काटने वाले चापिंग बोर्ड, चाकू, हाथ या किचन प्लेटफार्म से भी हो सकता है।
इसलिए बर्तनों को अच्छी तरह धोने के साथ-साथ खाना तैयार करने के लिए उपयोग किए जाने वाले साधनों को भी अच्छी तरह धो लें व इन्हें सुखाकर रखें। इसके साथ ही पके हुए खाने को लंबे समय तक बाहर खुला न छोड़ें। बचे हुए खाने के फ्रीज में लंबे समय रखने के बाद उन्हें बार-बार गर्म कर खाने से भी बचना चाहिए।
अंकुरित अनाज का कैसे करें सेवन?
यदि आप नाश्ते में या किसी भी समय सेहत के हवाले से अंकुरित अनाजों का प्रयोग अच्छा मानते हैं तो इस मौसम में थोड़ा सावधान रहें। नमी भरे मौसम में अंकुरित अनाज पर बैक्टीरिया पनपने की आशंका कई गुना अधिक रहती है। ऐसे में इनको भिगोकर सेवन करने के बजाय इन्हें पकाकर खाएं। इससे जोखिम कम हो सकता है।
हाथ धोना क्यों है जरूरी?
हाथ धोना सामान्य लगता है पर यह संक्रमण से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है। फोन, दरवाजे के हैंडल, करेंसी नोट, सार्वजनिक वाहनों व ऐसे कई स्थानों से आप खाना खाने से पहले गुजरते है। संक्रमण इनमें से कहीं से भी आपके खानपान तक पहुंच सकते हैं।
इसलिए खाने तैयार करने से लेकर खाना खाने तक हाथ अच्छी तरह धोना चाहिए। इसी तरह, शौच के बाद, पालतू जानवरों या गार्डनिंग के बाद भी हाथ धोना न भूलें।
सजगता है बचाव का सरल तरीका
इस मौसम में अत्यधिक नमी के कारण भी प्यास भी सामान्य दिनों की अपेक्षा लगती है। अपेक्षाकृत अधिक पानी व पेय पदार्थों का सेवन किया जाता है। चूंकि बारिश के दिनों में पेय जलों के स्रोतों के संक्रमित होने की आशंका होती है, इसलिए बीमार होने का खतरा भी उसी अनुरूप अधिक होता है। बारिश के दिनों में जलस्रोतों में सीवेज व दूषित पानी के मिलावट की आशंका होती है। इन सबसे अनभिज्ञ रहने के कारण मरीजों की संख्या में बढ़ोत्तरी हो जाती है। सजगता के अभाव में बैक्टीरिया, वायरस व फंगस पानी व खानपान के जरिए शरीर में प्रवेश करते हैं और गंभीर बीमारियों का कारण बनते हैं। ऐसे में बचाव का सबसे बेहतर तरीका है कि आप दिनचर्या में छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखें। जैसे, जिस पानी को लेकर आशंका हो या जिनसे दुर्गंध आ रही हो उनका सेवन न करें। बाहर खुले में बिकने वाले भोजन के बजाय घर का बना ताजा खाना खाएं। ऐसा करने से आप संक्रमण के साथ डिहाइड्रेशन व किडनी की समस्या से अपना व अपनों का बचाव कर सकते हैं।
डॉ. अनिल अरोड़ा, वरिष्ठ गैस्ट्रोइंटेरेलाजिस्ट, सर गंगाराम अस्पताल, नई दिल्ली
इन बातों का रहे ध्यान
- सड़क किनारे बिकने वाले खानपान, कटे हुए फल आदि लंबे समय तक खुला रखने के कारण दूषित व संक्रमित होने की आशंका अधिक होती है।
- गेहूं व संसाधित किए हुए अनाजों का प्रयोग तभी करें जब उनके स्टोर करने का तरीका सही हो। इन दिनों इनमें फंगस होने की आशंका रहती है।
- डायरिया या दस्त हो रहा तो इस दौरान स्वच्छता के साथ हाइड्रेशन का ध्यान रखना जरूरी है। इस दौरान हल्का भोजन करें।
स्टमक फ्लू के लक्षण
- पेट में मरोड़ व ऐंठन होना
- निरंतर या रुक-रुक कर उल्टी
- सिर दर्द व हल्का बुखार
- अत्यधिक कमजोरी या डिहाइड्रेशन होना आदि