नाइट शिफ्ट सिर्फ आपको ही नहीं, आपकी आने वाली पीढ़ी को भी कर रही है बीमार; डॉक्टर ने दी चेतावनी
बदलते वर्क कल्चर की वजह से अब दिन के साथ-साथ लोग रात में भी काम करते हैं। हालांकि, नाइट शिफ्ट में काम करना सेहत के लिए काफी हानिकारक साबित होता है। ...और पढ़ें

क्या आप भी करते हैं नाइट शिफ्ट? तो आने वाली पीढ़ी के लिए हो सकता है खतरनाक (Picture Credit- AI Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। आज के समय में वर्किंग कल्चर बदल चुका है। जब हममें से ज्यादातर लोग रात में आराम से सो रहे होते हैं, तब बहुत से लोग अपनी नाइट शिफ्ट वाली जॉब की वजह से जाग रहे होते हैं। अस्पताल, कॉल सेंटर, फैक्टरी और डिलीवरी बॉय पूरी रात काम करते हैं, जिससे उनका स्लीप साइकिल बिगड़ जाता है। रात में जागकर काम करना सिर्फ नींद पर ही, बल्कि पूरी सेहत पर बुरा असर डाल सकता है।
डॉ. अरुणकुमार उल्लगड्डी (कंसल्टेंट कार्डियोलॉजिस्ट, नारायणा हेल्थ सिटी) बताते हैं कि नाइट शिफ्ट में काम करने से न सिर्फ थकान और तनाव होता है, बल्कि शरीर का नेचुरल क्लॉक भी बिगड़ जाता है। इससे दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। हैरान करने वाली बात यह है कि इसका बुरा असर सिर्फ हम पर नहीं, बल्कि हमारी आने वाली पीढ़ियों की सेहत पर भी पड़ सकता है।
शरीर के बॉडी क्लॉक से खिलवाड़ पड़ सकता है भारी

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एक्सपर्ट बताते हैं कि हमारे शरीर में एक सर्केडियन रिदम होती है, जो दिन-रात के हिसाब से काम करती है। रात में जागना और दिन में सोना इस नेचुरल साइकिल को बिगाड़ देता है। नाइट शिफ्ट में काम करना करोड़ों साल पुराने नेचुरल इवोल्यूशन के खिलाफ लड़ने जैसा है। इससे कॉर्टिसोल नामक स्ट्रेस हार्मोन रिलीज होता है।
यह स्ट्रेस न सिर्फ हमें चिड़चिड़ा या थका हुआ बनाता है, बल्कि कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम और इम्यून रिस्पॉन्स को भी कमजोर करता है। वहीं, रात में लगातार काम करने वालों को धूप कम मिलती है, जिससे विटामिन-डी की कमी हो सकती है। यह हड्डियों की कमजोरी और थकान का कारण बनती है।
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थकान दूर करने के लिए सिगरेट का सहारा
थकान गायब करने और काम पर फोकस करने के लिए नाइट शिफ्ट करने वाले अक्सर सिगरेट जैसी चीजों का सहारा लेते हैं। धीरे-धीरे यह एक आदत बन जाती है, जो कुछ देर के लिए स्ट्रेस से राहत दिलाती है। निकोटीन की वजह से खून की नसें सिकुड़ जाती है और ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है। इससे नींद की कमी से होने वाला नुकसान और भी जानलेवा हो जाता है।
नींद की कमी शरीर के पूरे सिस्टम पर प्रभाव डालती है। गहरी नींद के दौरान दिमाग टॉक्सिन को बाहर निकालता है और सर्कुलर डैमेज को खुद से ठीक करता है। दिन के शोर और रोशनी की वजह से यह प्रोसेस स्लो और छोटा हो जाता है, जिससे नींद अधूरी रह जाती है और शरीर में सूजन आ जा सकती है। यह सभी चीजें शरीर को अंदर से कमजोर कर देती हैं।
जेनेटिक पर कैसे हो रहा है असर?

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हमारी खराब लाइफस्टाइल और स्ट्रेस सिर्फ हमें नहीं, बल्कि हमारी आने वाली पीढ़ियों को भी बीमार बना सकती है। कम नींद, सिगरेट और गलत खानपान से हमारे DNA में बदलाव आ सकता है। अगर माता-पिता शारीरिक रूप से स्वस्थ नहीं हैं, तो इसका सीधा असर बच्चों की सेहत पर पड़ता है।
आने वाली जनरेशन में जन्म से ही मोटापा, टाइप-2 डायबिटीज और दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इतना ही नहीं, कमजोर नर्वस सिस्टम की वजह से बच्चे तनाव भी नहीं झेल पाएंगे।
रेगुलर मेडिकल चेकअप जरूरी
बीमारियों से बचने के लिए सलाद खाना या जिम जाना सिर्फ काफी नहीं है, इसके लिए अपनी सेहत के प्रति जागरूक होना भी जरूरी है। हेल्दी लाइफस्टाइल के लिए स्ट्रेस फ्री रहना जरूरी है, लेकिन आज के समय में ऐसा होना थोड़ा मुश्किल है। इसीलिए रेगुलर मेडिकल चेकअप कराना हर किसी के लिए बहुत जरूरी हो गया है।
इसके लिए हेल्थ स्क्रीनिंग एक बेहतरीन तरीका है। इससे हाई कोलेस्ट्रॉल, शुरुआती स्टेज का हाइपरटेंशन और फैटी लिवर जैसी छिपी हुई बीमारियों का जल्दी पता लगाया जा सकता है, जिससे भविष्य में होने वाले गंभीर खतरों को समय रहते रोका जा सके।