मरती हुई कोशिकाएं बना सकती हैं आपके दिमाग को सुपरचार्ज्ड! जानिए क्या कहती है नई स्टडी
आमतौर पर शरीर में Cell Death का नाम सुनते ही हमारे दिमाग में खतरे या किसी गंभीर बीमारी का ख्याल आता है, लेकिन विज्ञान की दुनिया से एक बेहद चौंकाने वाल ...और पढ़ें

जानिए कैसे 'कोशिका मृत्यु' बढ़ा सकती है आपकी याददाश्त (Image Source: AI-Generated)

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प्रेट्र, नई दिल्ली। अक्सर हम सोचते हैं कि शरीर में कोशिकाओं का मरना एक बुरी बात है और यह किसी बीमारी का संकेत है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक खास तरह की कोशिका मृत्यु आपके दिमाग को एकदम फिट और स्वस्थ रखने में मदद कर सकती है?
जी हां, आयरन और ऑक्सीडेटिव तनाव से जुड़ी यह प्रक्रिया हमारे मस्तिष्क के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकती है। आइए जानते हैं कि वैज्ञानिकों की इस नई रिसर्च में क्या-क्या चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं।

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याददाश्त और नए न्यूरॉन्स का अद्भुत संतुलन
शोधकर्ताओं के अनुसार, यह खास कोशिका मृत्यु हमारे दिमाग के 'हिप्पोकैम्पस' वाले हिस्से में एक अहम भूमिका निभाती है। आपको बता दें कि हिप्पोकैम्पस दिमाग का वह क्षेत्र है जो हमारी याददाश्त और कुछ नया सीखने की क्षमता के लिए सबसे जरूरी माना जाता है। जब इस हिस्से में नए न्यूरॉन्स बनते हैं, तो यह कोशिका मृत्यु वहां एक सही संतुलन बनाए रखने में काफी मददगार साबित होती है।
आखिर क्या है 'फेरोप्टोसिस'?
ऑस्ट्रेलिया की क्वींसलैंड यूनिवर्सिटी के क्वींसलैंड ब्रेन इंस्टीट्यूट की असिस्टेंट प्रोफेसर तारा वाकर ने इस विषय पर अहम जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि कोशिका मृत्यु के इस खास प्रकार को विज्ञान की भाषा में 'फेरोप्टोसिस' कहा जाता है।
आमतौर पर, यह प्रक्रिया लगभग हर उस गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारी में पहचानी गई है जहां दिमाग की कोशिकाएं तेजी से मर रही होती हैं, जैसे:
- अल्जाइमर
- पार्किंसंस रोग
- स्ट्रोक
हालांकि, वैज्ञानिक यह जानना चाहते थे कि बीमारियों के अलावा, क्या यह प्रक्रिया एक स्वस्थ दिमाग के सामान्य कामकाज में भी कोई भूमिका निभाती है?
चूहों पर हुई रिसर्च से सामने आई सच्चाई
इस रहस्य को सुलझाने के लिए शोधकर्ताओं ने वयस्क चूहों में 'न्यूरोजेनेसिस' की प्रक्रिया पर अपना ध्यान केंद्रित किया। न्यूरोजेनेसिस वह प्रक्रिया है जिसके जरिए हिप्पोकैम्पस के अंदर मौजूद न्यूरल स्टेम सेल बंटते हैं, विकसित होते हैं और अंततः नए न्यूरॉन्स का रूप ले लेते हैं। यही नए जन्म लेने वाले न्यूरॉन्स हमारी सीखने की क्षमता और याददाश्त को मजबूत बनाए रखते हैं।
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बढ़ती उम्र के साथ क्यों कमजोर होती है याददाश्त?
क्वींसलैंड यूनिवर्सिटी की ही एक अन्य रिसर्च फेलो एलिसन कार्लाइल ने इस प्रक्रिया को और आसान शब्दों में समझाया। उन्होंने बताया कि न्यूरोजेनेसिस में कमी आना और दिमाग की कार्यक्षमता का घटना, दरअसल उम्र बढ़ने का ही एक स्वाभाविक हिस्सा है। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, नए न्यूरॉन्स बनने की यह रफ्तार धीमी पड़ जाती है।
रिसर्च का सबसे चौंकाने वाला परिणाम
इस अध्ययन का सबसे दिलचस्प हिस्सा तब सामने आया जब शोधकर्ताओं ने उम्रदराज चूहों पर एक प्रयोग किया। इन चूहों को कुछ ऐसे खास यौगिक दिए गए जिनका काम 'फेरोप्टोसिस' की प्रक्रिया को ब्लॉक करना या रोकना था।
परिणामस्वरूप, वैज्ञानिकों ने देखा कि इन उम्रदराज चूहों के दिमाग में:
- नए न्यूरॉन्स का उत्पादन काफी बेहतर हो गया।
- कुछ नया सीखने और याददाश्त से जुड़े कामों में उनका प्रदर्शन पहले से कहीं ज्यादा शानदार रहा।
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