ऑफिस के रूटीन टास्क भी लग रहे हैं बोझ? एक्सपर्ट ने बताया 'हीटवेव' कैसे बना रही है बर्नआउट का शिकार
गर्मी के मौसम में बढ़ती हीटवेव फिजिकल ही नहीं, बल्कि मेंटल हेल्थ पर भी गहरा असर डाल रही है, जिससे कर्मचारियों में चिड़चिड़ापन बढ़ रहा है। ...और पढ़ें

हीटवेव और मेंटल हेल्थ: क्यों दफ्तर के काम के बीच तेजी से बर्नआउट का शिकार हो रहे हैं कर्मचारी? (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। अक्सर जब हम गर्मी के मौसम की बात करते हैं, तो हमारे दिमाग में सबसे पहले पसीने से भीगा सफर, डिहाइड्रेशन, थकान या लू लगने जैसी शारीरिक परेशानियां ही आती हैं, लेकिन क्या आपका ध्यान कभी मेंटल हेल्थ की ओर जाता है?
जी हां, ग्लोबल वार्मिंग के इस दौर में लंबी होती गर्मियां एक नई समस्या को जन्म दे रही हैं, जो हमारे शरीर से ज्यादा हमारे दिमाग और दफ्तर में हमारे बर्ताव से जुड़ी है।

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सिर्फ मौसम नहीं, दिमागी सेहत का भी है मसला
अब भीषण गर्मी सिर्फ कुछ महीनों की शारीरिक परेशानी नहीं रह गई है। अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने वाले लोग बता रहे हैं कि ज्यादा तापमान में उनका ध्यान भटकता है, वे जल्दी चिड़चिड़े हो जाते हैं और उन्हें घबराहट महसूस होती है। साथ ही, काम करने की प्रेरणा भी कम हो जाती है।
भारत जैसे देशों में स्थिति और भी चिंताजनक है। तपते शहर, हवा की कमी वाले कमरे, भीड़ से भरे वाहन, बिजली की आवाजाही और ऑफिस के लंबे घंटे मिलकर कर्मचारियों पर ऐसा भारी बोझ डाल रहे हैं जो उन्हें सीधे 'इमोशनल बर्नआउट' की तरफ धकेल रहा है।
गर्मी में दिमाग क्यों हार मान लेता है?
हमारा शरीर एक निश्चित तापमान में ही बेहतरीन ढंग से काम कर पाता है। जब बाहर बहुत ज्यादा गर्मी होती है, तो शरीर अपने तापमान को स्थिर रखने के लिए पसीना बहाता है और ब्लड सर्कुलेशन के साथ-साथ दिल की धड़कन भी बढ़ा देता है। इस पूरी जद्दोजहद में शरीर की बहुत ज्यादा ऊर्जा खर्च होती है, जिसका सीधा असर हमारे दिमाग और नर्वस सिस्टम पर पड़ता है।
खबरें और भी
रिसर्च साबित करती हैं कि ज्यादा तापमान हमारी याददाश्त, रिएक्शन टाइम और भावनाओं पर काबू रखने की क्षमता को कमजोर कर देता है। यही कारण है कि मामूली रूटीन काम करने के बाद भी कर्मचारी मानसिक रूप से खुद को थका हुआ महसूस करते हैं और उनका धैर्य जल्दी जवाब दे जाता है।

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नींद की कमी और बढ़ता मानसिक दबाव
शहरों की गर्म रातें लोगों को चैन की नींद नहीं सोने देतीं। अधूरी नींद अगले दिन के मूड, स्ट्रेस झेलने की ताकत और फैसले लेने की क्षमता को बुरी तरह बिगाड़ देती है। अगर आप पहले से ही किसी प्रोजेक्ट की डेडलाइन, आर्थिक तंगी या ऑफिस के किसी विवाद से जूझ रहे हैं, तो यह गर्मी आपके इस तनाव को कई गुना बढ़ा सकती है।
पर्यावरण और हमारे दिमाग का सीधा नाता है। आप चाहे दफ्तर में काम करते हों, अस्पताल में हों या बाहर मेहनत-मजदूरी कर रहे हों-आपके आस-पास का माहौल आपके मूड को तय करता है, और आपका मूड आपके काम की गुणवत्ता को प्रभावित करता है।

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क्या कहती हैं एक्सपर्ट?
एशियन हॉस्पिटल की क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट डॉ. दीपिका शर्मा समझाती हैं कि गर्मी से लड़ने में शरीर इतनी ऊर्जा लगा देता है कि मानसिक थकान, डिहाइड्रेशन और नींद खराब होना लाजिमी है।
कई बार कर्मचारियों को खुद पता नहीं होता कि उनकी बेचैनी, अकारण गुस्से या लगातार थकान के पीछे का असली कारण यह लगातार पड़ने वाली गर्मी है। डॉ. शर्मा चेतावनी देती हैं कि वर्कप्लेस पर मेंटल हेल्थ का मतलब सिर्फ 'काम के प्रेशर' से नहीं है, बल्कि असुविधाजनक वातावरण भी तनाव का एक बड़ा कारण है।
क्या है समाधान?
डॉ. दीपिका की सलाह है कि कर्मचारियों की मेंटल हेल्थ और प्रोडक्टिविटी को बेहतर बनाए रखने के लिए कुछ जरूरी कदम उठाए जाने चाहिए:
- पीने के लिए हर समय पर्याप्त पानी उपलब्ध हो।
- काम के दौरान आराम के लिए छोटे-छोटे ब्रेक दिए जाएं।
- कार्यस्थल पर वेंटिलेशन और ठंडक का पूरा इंतजाम हो।
- कर्मचारियों को काम के घंटों में थोड़ी सहूलियत दी जाए।
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