क्या आप भी धीरे-धीरे चलते हैं? पैरों की कमजोरी नहीं, बल्कि हियरिंग लॉस का हो सकता है संकेत
क्या आप भी धीमी गति से चलने को सिर्फ बुढ़ापे या कमजोर घुटनों से जोड़कर देखते हैं। दरअसल, धीमी गति से चलना कानों से जुड़ा भी हो सकता है। ...और पढ़ें

धीमी चाल' का सीधा कनेक्शन आपके कानों से है! (Picture Courtesy: Freepik)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। अक्सर धीमी गति से चलने को लोग बढ़ती उम्र का असर या घुटनों से जुड़ी परेशानी से जोड़कर देखते हैं, लेकिन हाल ही में हुई एक नई रिसर्च कुछ ही बताती है। इस रिसर्च में यह बात सामने आई है कि आपके चलने की धीमी रफ्तार की वजह आपके सुनने की कमजोर क्षमता भी हो सकती है।
57,000 लोगों पर हुई बड़ी स्टडी
यनीवर्सिटी ऑफ मिशिगन ने एक दिग्गज टेक कंपनी के साथ मिलकर एक रिसर्च की। इस स्टडी के दौरान 57 हजार से ज्यादा आईफोन यूजर्स के डेटा का विश्लेषण किया गया। इस जांच में यह चौंकाने वाला सच सामने आया कि जिन लोगों की सुनने की क्षमता कमजोर थी, उनकी चलने की गति सामान्य सुनने वाले लोगों के मुकाबले काफी धीमी पाई गई।
पैर ही नहीं, कान और दिमाग भी हैं जिम्मेदार
रिसर्चर्स का कहना है कि हमारा चलना सिर्फ पैरों की ताकत पर निर्भर नहीं करता। सामान्य रूप से चलने-फिरने के लिए हमारे कान और दिमाग भी बहुत अहम भूमिका निभाते हैं। दरअसल, कान में होने वाली कोई भी समस्या हमारे शरीर के बैलेंस को बिगाड़ सकती है।
जब हम सड़क या रास्ते पर चलते हैं, तो हम सिर्फ देखकर नहीं, बल्कि अपने आसपास की आवाजों और खुद के कदमों की आहट को सुनकर भी अपना बैलेंस बनाए रखते हैं।
सेहत का बड़ा संकेत
इस स्टडी से जुड़े एक्सपर्ट्स का मानना है कि व्यक्ति के चलने की गति उसके शरीर की सेहत का छठा सबसे अहम संकेत होती है। अगर कोई व्यक्ति तेज और पूरी तरह बैलेंस तरीके से चल रहा है, तो यह इस बात का संकेत है कि उसका दिल, फेफड़े, मांसपेशियां और नर्वस सिस्टम बिल्कुल सही तरीके से काम कर रहे हैं।
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कम सुनाई देने से दिमाग पर पड़ता है असर
डॉक्टर्स के मुताबिक, जब किसी व्यक्ति को कम सुनाई देने लगता है, तो उसका दिमाग आसपास की आवाजों को समझने के लिए जरूरत से ज्यादा मेहनत करने लगता है। दिमाग पर बढ़ने वाले इस एक्स्ट्रा दबाव के कारण शरीर की दूसरी एक्टिविटीज पर असर होता है, जिसका सीधा प्रभाव व्यक्ति की चाल और उसके शरीर के बैलेंस पर पड़ता है।
इसके अलावा, जब व्यक्ति को अपने कदमों की आहट और आसपास की आवाजें साफ सुनाई नहीं देतीं, तो उसका चलने का आत्मविश्वास कम हो जाता है। यही वजह है कि वह अनजाने में ही बहुत संभलकर और धीरे-धीरे चलने लगता है।
नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी
सुनने की इस समस्या का असर केवल धीमी चाल तक ही सीमित नहीं रहता। कई अन्य स्टडी में यह भी देखा गया है कि हियरिंग लॉस का सीधा कनेक्शन डिमेंशिया, डिप्रेशन, अकेलेपन और चलते-फिरते समय अचानक गिर जाने के बढ़ते खतरे से भी जुड़ा हुआ है।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर आपको भी पहले के मुकाबले अपनी चाल में अचानक धीमापन महसूस हो रहा है, या सुनने में कोई दिक्कत आ रही है, तो इसे बिल्कुल भी नजरअंदाज न करें।