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    कहीं आप भी 'हीट स्ट्रोक' को नॉर्मल बुखार तो नहीं समझ रहे? डॉक्टर ने बताया असली फर्क

    Updated: Fri, 29 May 2026 06:00 PM (IST)

    गर्मी में लोग अक्सर हीट स्ट्रोक को सामान्य बुखार समझ लेते हैं, जो एक गंभीर गलती हो सकती है। ...और पढ़ें

    बुखार है या हीटस्ट्रोक? ऐसे पहचानें दोनों का फर्क (Image Source: AI-Generated)

    बुखार है या हीटस्ट्रोक? ऐसे पहचानें दोनों का फर्क (Image Source: AI-Generated)

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    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

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    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। गर्मियों के मौसम में तेज धूप और बढ़ते तापमान से लोगों का हाल बेहाल होने लगता है। इन दिनों शरीर का तापमान बढ़ना भी आम बात है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि कई बार लोग खतरनाक 'हीट स्ट्रोक' को सिर्फ एक मामूली बुखार समझकर नजरअंदाज कर देते हैं? जी हां, यह एक बड़ी भूल हो सकती है।

    आइए, एशियन हॉस्पिटल के इंटरनल मेडिसिन विभाग के एसोसिएट डायरेक्टर और हेड, डॉ. सुनील राणा से जानते हैं कि दोनों में क्या अंतर है और आप सही समय पर इनकी पहचान कैसे कर सकते हैं।

    Heat stroke vs fever

    (Image Source: AI-Generated)

    बुखार आखिर क्या है?

    बुखार असल में हमारे शरीर का एक प्राकृतिक डिफेंस सिस्टम है। जब शरीर में कोई वायरस, बैक्टीरिया या अन्य बीमारी हमला करती है, तो उससे लड़ने के लिए शरीर अपना तापमान बढ़ा देता है। इसमें शरीर का तापमान सामान्य 98.6°F (37°C) से ऊपर चला जाता है। बुखार आने पर आपको ठंड लग सकती है, शरीर में दर्द हो सकता है, कमजोरी महसूस हो सकती है और सिरदर्द जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

    हीट स्ट्रोक क्या है?

    दूसरी तरफ, हीट स्ट्रोक कोई आम बीमारी नहीं, बल्कि एक 'मेडिकल इमरजेंसी' है। यह तब होता है जब आप बहुत देर तक तेज धूप या भयंकर गर्मी में रहते हैं और आपका शरीर अपने तापमान को नियंत्रित नहीं कर पाता। इस स्थिति में शरीर का कूलिंग सिस्टम फेल होने लगता है और तापमान तेजी से 104°F (40°C) या उससे भी ज्यादा हो जाता है। अगर समय पर ध्यान न दिया जाए, तो यह दिमाग, हृदय और शरीर के दूसरे अंगों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।

    इन 4 लक्षणों से समझें बुखार और हीट स्ट्रोक का अंतर

    भले ही दोनों स्थितियों में शरीर गर्म होता है, लेकिन कुछ खास संकेतों से आप इन्हें आसानी से अलग पहचान सकते हैं:

    • बीमारी का कारण: बुखार हमेशा किसी इन्फेक्शन या बीमारी की वजह से आता है, जबकि हीट स्ट्रोक अत्यधिक गर्मी और तेज धूप में लंबे समय तक रहने के कारण होता है।
    • पसीना और त्वचा: बुखार में मरीज को अक्सर ठंड लगती है और पसीना भी आ सकता है। वहीं हीट स्ट्रोक में त्वचा एकदम गर्म, लाल और सूखी पड़ जाती है (हालांकि, ज्यादा मेहनत या एक्सरसाइज की वजह से होने वाले हीटस्ट्रोक में पसीना आ सकता है)।
    • मानसिक स्थिति: सामान्य बुखार में इंसान का दिमाग पूरी तरह सतर्क रहता है, लेकिन हीट स्ट्रोक में मरीज को चक्कर आना, भ्रम होना, बोलने में परेशानी, बेचैनी या फिर बेहोशी छाने लगती है।
    • तापमान बढ़ने की रफ्तार: बुखार में शरीर का तापमान धीरे-धीरे बढ़ता है, जबकि हीट स्ट्रोक में शरीर अचानक से बहुत ज्यादा गर्म हो जाता है।

    Causes of high fever in summer

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    (Image Source: AI-Generated)

    डॉक्टर की क्या है चेतावनी?

    डॉक्टर बताते हैं कि गर्मियों में तेज बुखार को हमेशा साधारण वायरल मान लेना सही नहीं है। वह कहते हैं, "अगर कोई व्यक्ति तेज धूप में रहा हो और उसे बहुत अधिक शरीर गर्म लग रहा हो, चक्कर आ रहे हों, उलझन हो या बेहोशी जैसे लक्षण हों, तो यह हीटस्ट्रोक हो सकता है। ऐसी स्थिति में तुरंत मेडिकल सहायता लेना जरूरी है क्योंकि देरी जानलेवा साबित हो सकती है।"

    डॉ. राणा के मुताबिक, दोनों ही स्थितियों में तापमान बढ़ता है लेकिन हीट स्ट्रोक में यह कंट्रोल से बाहर हो जाता है। शुरुआती पहचान और मरीज की तुरंत कूलिंग करने से जान बचाई जा सकती है।

    हीट स्ट्रोक का शक होने पर तुरंत उठाएं ये कदम

    अगर आपको किसी में हीट स्ट्रोक के लक्षण दिखें, तो बिल्कुल घबराएं नहीं बल्कि तुरंत ये उपाय करें:

    • मरीज को तुरंत किसी ठंडी जगह या छांव में लेकर जाएं।
    • तंग कपड़ों को ढीला कर दें ताकि शरीर को हवा लग सके।
    • शरीर पर ठंडे पानी की पट्टियां रखें या गीले कपड़े से पोछें।
    • मरीज को पंखे या एयर कूलिंग/एसी में रखें।
    • लक्षण गंभीर लगने पर बिना देरी किए तुरंत अस्पताल पहुंचाएं।

    बचाव ही है सबसे बेहतर उपाय

    डॉक्टर की सलाह है कि इस भयंकर गर्मी में अपना बचाव करने के लिए दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच धूप में बाहर निकलने से बचें। दिन भर पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं और हल्के, ढीले-ढाले कपड़े पहनें। इसके अलावा घर के बच्चों और बुजुर्गों का इस मौसम में विशेष ध्यान रखें, क्योंकि सही समय पर पहचान और बचाव ही आपको किसी भी बड़ी परेशानी से दूर रख सकता है।

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