8 घंटे सोकर भी पूरी नहीं होती नींद? डॉक्टर ने बताया उम्र के मुताबिक रोजाना कितना सोना है सही
कई लोग 8 घंटे सोने के बाद भी थकान महसूस करते हैं, जबकि कुछ कम नींद में भी तरोताजा रहते हैं। डॉक्टर ज्ञानेंद्र अग्रवाल बताते हैं कि 8 घंटे की नींद एक औ ...और पढ़ें

क्या 8 घंटे की नींद सिर्फ एक मिथक है (Picture Credit- AI Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। रात को जल्दी सोने के बाद भी कई बार मुझे सुबह उठने पर थकान सी महसूस होती थी। अलार्म लगाकर 8 घंटे पूरा सोने के बाद भी शरीर में भारीपन महसूस होता था। दूसरी तरफ, मेरी ही टीम की एक मेंबर सिर्फ 6-7 घंटे की नींद के बाद भी दिनभर एकदम तरोताजा और एनर्जी से भरपूर नजर आती हैं।
अक्सर ऐसा होता देख मेरे मन में एक ही सवाल आता था कि बचपन से ही हमें सिखाया जाता है कि हेल्दी रहने के लिए "रोजाना 8 घंटे सोना जरूरी है"। लेकिन क्या यह नियम हर किसी पर एक जैसा लागू होता है? अपने इसी सवाल का जवाब जानने के लिए मैं पहुंची मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, नोएडा में रेस्पिरेटरी और क्रिटिकल केयर के सीनियक डायरेक्टर डॉ. ज्ञानेंद्र अग्रवाल के पास और जाना कि क्या सच में 8 घंटे की नींद जरूरी है या यह सिर्फ एक मिथक है।
परफेक्ट स्लीप का असली साइंस
डॉक्टर बताते हैं कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में नींद से जुड़ी इस पुरानी धारणा को समझना बहुत जरूरी है। असल में, 8 घंटे की नींद का यह नियम एक औसत आंकड़ा है, कोई पत्थर की लकीर नहीं। आपके शरीर को हकीकत में कितने घंटों की नींद चाहिए और एक परफेक्ट स्लीप का असली विज्ञान क्या है, इस बारे में जानना ज्यादा जरूरी है।
उम्र के साथ बदलती है नींद की जरूरत
विशेषज्ञों और 'नेशनल स्लीप फाउंडेशन' के मुताबिक, हर इंसान के लिए नींद का कोई एक फिक्स नियम नहीं हो सकता। यह आपकी उम्र और शरीर की जरूरत पर निर्भर करता है। उम्र के मुताबिक नींद की जरूरत निम्न हो सकती है-
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- नवजात शिशु (0-3 महीने): 14 से 17 घंटे
- बच्चे (6-13 साल): 9 से 11 घंटे
- किशोर (14-17 साल): 8 से 10 घंटे
- वयस्क (18-64 साल): 7 से 9 घंटे
- बुजुर्ग (65+ साल): 7 से 8 घंटे
साफ है कि वयस्कों के लिए 7 से 9 घंटे का समय आदर्श माना गया है। आपका शरीर 7 घंटे में भी अपनी थकावट मिटा सकता है या उसे 9 घंटे भी लग सकते हैं। नींद पूरी होने का सबसे बड़ा संकेत यह है कि आप सुबह बिना अलार्म के फ्रेश उठें और दिनभर आपको सुस्ती न लगे।
घंटों से ज्यादा जरूरी है 'नींद की क्वालिटी'
डॉक्टर बताते हैं कि सिर्फ 8 घंटे बिस्तर पर आंखें बंद किए पड़े रहना काफी नहीं है। अगर आप रात भर करवटें बदल रहे हैं, बार-बार आंख खुल रही है या बेचैनी हो रही है, तो वे 8 घंटे बेमानी हैं। अच्छी सेहत के लिए 'डीप स्लीप' (गहरी नींद) बहुत जरूरी है। इसी गहरी नींद के दौरान हमारा शरीर अपनी अंदरूनी टूट-फूट की मरम्मत करता है, दिमाग शांत होता है और इम्युनिटी मजबूत होती है।
कम या ज्यादा सोने के नुकसान
नींद के साथ कोई भी समझौता सेहत पर भारी पड़ सकता है। लगातार 6 घंटे से कम सोने पर दिल की बीमारियां, मोटापा, शुगर और डिप्रेशन का खतरा काफी बढ़ जाता है। काम में फोकस नहीं रहता और स्वभाव चिड़चिड़ा हो जाता है।
वहीं, दूसरी तरफ 10 या 11 घंटे से ज्यादा सोना भी ठीक नहीं है। हद से ज्यादा सोना शरीर में सुस्ती, सिरदर्द और मोटापे को न्योता देता है। यह किसी छिपी हुई स्वास्थ्य समस्या का संकेत भी हो सकता है।
हेल्दी और सुकून भरी नींद के आसान टिप्स
- अपने शरीर की जरूरत को समझें। रोजाना 7 से 9 घंटे की नींद का टारगेट रखें।
- सोने और सुबह उठने का एक समय तय करें और छुट्टी वाले दिन पर भी इसे न बदलें।
- सोने से कम से कम 1 घंटा पहले अपने फोन, लैपटॉप और टीवी स्क्रीन से दूरी बना लें।
- रात के समय चाय, कॉफी और बहुत भारी खाना खाने से बचें।
- सोते समय कमरे में अंधेरा रखें, ताकि नींद में खलल न पड़े।
निष्कर्ष
8 घंटे की नींद कोई मिथक या अंधविश्वास नहीं है, लेकिन यह हर किसी के लिए एक फिक्स नियम भी नहीं है। सही पैमाना यह है कि आप उतनी नींद लें, जिससे अगले दिन आप खुद को एक्टिव, खुश और पूरी तरह से फोकस्ड महसूस करें। इसलिए, अपनी नींद का हिसाब घड़ी से नहीं, बल्कि अपने शरीर की आवाज सुनकर लगाएं।