सुबह की चाय के बिना आपका दिन भी लगता है अधूरा? सिर्फ एक आदत या दिमाग का है कोई खेल
कई लोगों के लिए सुबह चाय पिए बिना दिन शुरू करना मुश्किल होता है। यह सिर्फ एक आदत नहीं, इसके पीछे साइकोलॉजी से जुड़े कारण हैं।

क्यों कुछ लोगों के लिए जरूरी होती है सुबह की पहली चाय? (Picture Courtesy: Freepik)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। सुबह की पहली किरण के साथ अगर घर में चाय के उबलने की खुशबू और बर्तनों की खनखनाहट न सुनाई दे, तो कई लोगों का दिन अधूरा सा लगता है। कई लोगों के लिए सुबह की चाय सिर्फ एक मामूली ड्रिंक नहीं है, बल्कि एक इमोशन है।
कई लोगों को आपने यह भी कहते हुए सुना होगा कि जब तक उनके गले से चाय की पहली घूंट नीचे नहीं उतरती, तब तक उनकी नींद पूरी तरह नहीं खुलती। ऐसे में क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर ऐसा क्यों होता है? क्यों कुछ लोगों के दिन की शुरुआत बिना चाय के मुमकिन ही नहीं होती? आइए डॉ. मीनाक्षी जैन (साइकायट्रिस्ट, अमृता हॉस्पिटल, फरीदाबाद) से जानें इसके पीछे छिपे कारण।
दिमाग को रूटीन पसंद है
डॉ. जैन के अनुसार, सुबह की चाय हमारे दिमाग के लिए एक साइकोलॉजिकल सिग्नल की तरह काम करती है। यह संकेत दिमाग को बताता है कि नया दिन शुरू हो चुका है और अब एक्टिव होने का समय है।
दरअसल, हमारा दिमाग रूटीन यानी आदतों को बहुत पसंद करता है। जब कोई व्यक्ति सालों तक रोज सुबह उठकर सबसे पहले चाय पीता है, तो समय के साथ चाय की खुशबू, उसका गाढ़ापन, गर्माहट और स्वाद दिमाग में एक खास जगह बना लेते हैं। दिमाग इन सभी चीजों को अलर्टनेस, कंफर्ट और मानसिक रूप से दिन का सामना करने की तैयारी के साथ जोड़ लेता है।
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(Picture Courtesy: Freepik)
आदतों से बंधा है दिमाग
मनोविज्ञान में एक टर्म होता है जिसे कंडीशन रिस्पांस कहा जाता है। जब आप सालों तक किसी एक आदत को दोहराते हैं, तो आपका दिमाग उस चीज की उम्मीद करने लगता है। अगर कोई व्यक्ति सालों से हर सुबह की शुरुआत चाय के कप के साथ कर रहा है, तो उसका दिमाग सुबह होते ही खुद-ब-खुद चाय की मांग करने लगता है।
दिलचस्प बात यह है कि चाय में मौजूद कैफीन जब तक आपके खून में घुलकर अपना असर दिखाना शुरू करता है, उससे पहले ही चाय बनाने और उसे कप में डालने की प्रक्रिया ही आपके दिमाग को एक सुकून, फोकस और मानसिक स्थिरता का एहसास करा देता है। यानी सिर्फ चाय को सामने देखना और उसकी पहली चुस्की लेना ही आपके तनाव को कम करने के लिए काफी होता है।
ज्यादा निर्भरता सही नहीं
चाय पीना और उससे तरोताजा महसूस करना एक अच्छा एहसास है, लेकिन इसपर पूरी तरह से निर्भर हो जाना सही नहीं है। अगर आपको किसी दिन सुबह चाय न मिले और आप बहुत थकान, चिड़चिड़ापन, घबराहट या तेज सिरदर्द महसूस करने लगें, तो यह एक चेतावनी है।
इससे पता चलता है कि आप चाय में मौजूद कैफीन के डिपेंडेंट हो चुके हैं। आपकी नींद की क्वालिटी अच्छी नहीं है, जिसे छुपाने के लिए आप कैफीन का सहारा ले रहे हैं, आप क्रोनिक स्ट्रेस या एक अनहेल्दी लाइफस्टाइल के जाल में फंसे हैं।
कैसे लें चाय का सही मजा?
चाय का आनंद जरूर लें, लेकिन माइंडफुलनेस के साथ। चाय को अपनी गहरी और अच्छी नींद, भरपूर पानी और संतुलित खान-पान का विकल्प न बनने दें। चाय आपके दिमाग को कुछ समय के लिए तरोताजा जरूर कर सकती है, लेकिन शरीर को असली एनर्जी केवल भरपूर आराम, मानसिक शांति और स्वस्थ जीवनशैली से ही मिलती है।
