Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    घुटनों के दर्द की असली वजह कहीं आपका बढ़ता मोटापा तो नहीं? एक्सपर्ट समझा रहे हैं साइंस

    Updated: Sat, 07 Mar 2026 11:43 AM (IST)

    मोटापा जोड़ों के दर्द और ऑस्टियोआर्थराइटिस का प्रमुख कारण है, जिससे घुटनों और कूल्हों पर 4 गुना ज्यादा दबाव पड़ता है। ...और पढ़ें

    बढ़ता वजन डाल रहा है जोड़ों पर दबाव? (Image Source: AI-Generated)

    बढ़ता वजन डाल रहा है जोड़ों पर दबाव? (Image Source: AI-Generated) 

    timer icon

    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। मैक्स अस्पताल, गुरुग्राम के सीनियर डायरेक्टर - मस्कुलोस्केलेटल साइंसेज एंड ऑर्थोपेडिक्स, डॉ. चंदीप सिंह के मुताबिक, हमारा बढ़ता हुआ वजन हमारे जोड़ों के लिए एक खामोश खतरे की तरह काम करता है। आइए, इस आर्टिकल में डिटेल में समझते हैं कि कैसे आपका वजन आपके जोड़ों को प्रभावित करता है और आप इससे कैसे राहत पा सकते हैं।

    joint pain

    (Image Source: AI-Generated) 

    घुटनों में दर्द और ऑस्टियोआर्थराइटिस का असली कारण

    हाल ही के अध्ययनों से एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या सामने आई है। जिन लोगों का बॉडी मास इंडेक्स (BMI) 30 से ज्यादा है, उनके कूल्हों और घुटनों पर सामान्य वजन वाले लोगों की तुलना में चार गुना तक ज्यादा दबाव पड़ता है। यह अतिरिक्त दबाव जोड़ों के घिसने की प्रक्रिया को बहुत तेज कर देता है, जिससे ऑस्टियोआर्थराइटिस जैसी बीमारी होती है। भारत के शहरी इलाकों में यह समस्या अब बहुत आम होती जा रही है।

    'फ्रेमिंघम हार्ट स्टडी' के अनुसार, ज्यादा BMI वाले लोगों में घुटने के ऑस्टियोआर्थराइटिस होने का खतरा चार से पांच गुना ज्यादा होता है, जबकि मोटापे के कारण कूल्हे के ऑस्टियोआर्थराइटिस का जोखिम दोगुना हो जाता है। इसके अलावा, शरीर में जमा अतिरिक्त चर्बी ऐसे केमिकल्स छोड़ती है जो सूजन पैदा करते हैं। ये रसायन कार्टिलेज (जोड़ों के बीच की गद्दी) को तेजी से नष्ट करते हैं, जो उम्र बढ़ने के साथ एक गंभीर चक्र बन जाता है।

    भारतीय शहरों में 40 की उम्र में ही दिखने लगे हैं लक्षण

    गुरुग्राम जैसे शहरों में लगातार बैठकर काम करने, ज्यादा कैलोरी वाला खाना खाने और शारीरिक गतिविधि की कमी के कारण लोग जल्दी इस बीमारी का शिकार हो रहे हैं। अब 40 वर्ष की उम्र के आस-पास ही लोग जोड़ों में तकलीफ की शिकायत कर रहे हैं।

    खबरें और भी

    इसके शुरुआती लक्षणों में शामिल हैं:

    • ज्यादा देर बैठने के बाद जोड़ों में अकड़न होना।
    • सीढ़ियां चढ़ने में परेशानी महसूस होना।
    • लगातार रहने वाला दर्द, जो आपकी रात की नींद भी खराब कर सकता है।
    • छोटे बदलाव से मिल सकती है बड़ी राहत

    अच्छी खबर यह है कि वजन में थोड़ा सा भी सुधार आपको जोड़ों के दर्द से बड़ी राहत दिला सकता है। अपने शरीर के वजन का मात्र 5 से 10% कम करने से घुटने का दर्द काफी हद तक कम हो सकता है।

    शोध बताते हैं कि कम किया गया हर एक किलो वजन, घुटने के दर्द को लगभग 5% तक कम कर सकता है। उदाहरण के लिए, अगर किसी व्यक्ति का वजन 100 किलो है और वह 10 किलो वजन घटा लेता है, तो उसका जोड़ों का दर्द आधा हो सकता है।

    best BMI for healthy joints

    (Image Source: AI-Generated) 

    लाइफस्टाइल में करें ये आसान सुधार

    • डाइट में बदलाव: अपनी डाइट में साबुत अनाज, दालें और ताजी सब्जियों को शामिल करें। तला हुआ खाना और मीठे ड्रिंक्स पीने से बचें। अपने खान-पान पर नजर रखने के लिए आप एआई बेस्ड ऐप्स की मदद भी ले सकते हैं।
    • हल्की एक्सरसाइज: जोड़ों को सुरक्षित रखने के लिए ऐसी कसरत करें जिसमें झटके न लगें। स्विमिंग, साइकिल चलाना, तेज चलना या कुर्सी पर बैठकर किया जाने वाला योग इसके लिए बेहतरीन हैं। दीवार के सहारे बैठना या रेजिस्टेंस बैंड का इस्तेमाल करने से भी जोड़ों को मजबूती मिलती है।

    हर हफ्ते 1 किलो कम करना है सबसे सुरक्षित

    • कठोर फर्श पर चलने या खड़े होने से जोड़ों पर पड़ने वाले झटके को कम करने के लिए कुशन वाले मैट का इस्तेमाल करें।
    • अचानक से नहीं, बल्कि धीरे-धीरे वजन घटाने का लक्ष्य रखें। हर हफ्ते 0.5 से 1 किलो वजन कम करना एक सुरक्षित तरीका है।
    • अगर आप लंबे समय तक बैठकर काम करते हैं, तो अकड़न से बचने के लिए हर घंटे खड़े होने या स्ट्रेचिंग करने का ब्रेक जरूर लें।

    डॉक्टर से कब मिलें?

    अगर लाइफस्टाइल में ये सारे बदलाव करने के बाद भी जोड़ों का दर्द कम नहीं हो रहा है, तो आपको किसी अच्छे ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए। शुरुआती इलाज में ये विकल्प शामिल हो सकते हैं:

    • जोड़ों को मजबूत और सुरक्षित बनाने के लिए टार्गेटेड फिजियोथेरेपी।
    • दर्द से राहत के लिए कॉर्टिकोस्टेरॉइड या हयालूरोनिक एसिड के इंजेक्शन।

    मिनिमली इनवेसिव प्रक्रियाएं, जैसे रोबोटिक नी रिप्लेसमेंट। जब वजन घटाने के साथ इस तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है, तो इसके परिणाम बहुत बेहतर होते हैं।

    आज ही उठाएं अपना पहला कदम

    सबसे पहले अपना बीएमआई निकालें। इसे निकालने का तरीका बहुत आसान है- अपने वजन (किलोग्राम में) को अपनी लंबाई (मीटर स्क्वायर में) से भाग दें। अगले तीन से छह महीनों में अपना 5 से 10% वजन कम करने का एक रियलिस्टिर टारगेट सेट करें। जरूरत पड़ने पर सही डाइट, एक्सरसाइज और मेडिकल विकल्पों के लिए किसी विशेषज्ञ से अपनी व्यक्तिगत योजना बनवाएं।

    यह भी पढ़ें- हल्के में न लें बच्चों का बढ़ता वजन? नई रिसर्च में सामने आया हार्ट और डायबिटीज का सीधा कनेक्शन

    यह भी पढ़ें- नॉर्मल BMI के झांसे में न आएं! अब 'वेस्ट-टू-हाइट रेशियो' बताएगा सेहत की असली सच्चाई