कहीं आप तो नहीं खा रहे 'एनालॉग पनीर', जिस पर 2 राज्यों ने लगाया बैन? सेहत के लिए होता है धीमा जहर
अगर आप भी रेस्टोरेंट में जाकर पनीर की डिशेज बड़े चाव से खाते हैं, तो यह खबर आपके काम की है। ...और पढ़ें

असली के नाम पर बिक रहा है सिंथेटिक पनीर (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र सरकार ने एक बेहद अहम फैसला लेते हुए राज्य में एनालॉग पनीर को बनाने, स्टोर करने और बेचने पर एक साल की सख्त पाबंदी लगा दी है। बता दें, इसे 'नॉन-डेयरी' या सिंथेटिक पनीर भी कहा जाता है।
ऐसे में, अब से कोई भी होटल, क्लाउड किचन, रेस्टोरेंट या कैटरर्स इस मिलावटी पनीर का इस्तेमाल अपनी डिशेज में नहीं कर पाएंगे। जाहिर है, आपके मन में भी यह सवाल उठ रहा होगा कि आखिर एनालॉग पनीर होता क्या है और सरकार को क्यों लगाना पड़ा है इसपर बैन। आइए, विस्तार से इस आर्टिकल में जानते हैं।

(Image Source: AI-Generated)
क्या होता है 'एनालॉग' पनीर?
यह पनीर सिर्फ दिखने और छूने में असली जैसा लगता है, लेकिन इसे पूरी तरह दूध से नहीं बनाया जाता। जी हां, इसे तैयार करने के लिए पाम ऑयल, वेजिटेबल फैट, स्टार्च, मिल्क सॉलिड्स, प्लांट प्रोटीन, स्टेबलाइजर्स, आर्टिफिशियल फ्लेवर और एसिड का एक मिश्रण तैयार किया जाता है। चूंकि इसमें न तो दूध का फैट होता है और न ही प्रोटीन, इसलिए इसका न्यूट्रिशन असली पनीर से बिल्कुल अलग होता है।
सेहत के लिए कितना सुरक्षित है एनालॉग पनीर?
FDA की टेस्टिंग के परिणाम साफ तौर पर दिखाते हैं कि यह सिंथेटिक पनीर सेहत के लिए एक बड़ा जोखिम है। जिन 308 सैंपल्स की जांच हुई, उनमें से 30 को लैब ने पूरी तरह से 'असुरक्षित' घोषित किया है।
खबरें और भी
चूंकि इस पनीर में असली दूध का फैट और प्रोटीन इस्तेमाल नहीं होता, इसलिए इसका न्यूट्रिशनल प्रोफाइल असली पनीर से बहुत अलग होता है। सस्ते वनस्पति तेलों और आर्टिफिशियल स्टेबलाइजर्स के लगातार सेवन से सेहत से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं।
इसके अलावा, खुले में बिना सही पैकेजिंग और बिल के बिकने वाले इस पनीर के सोर्स का पता न चल पाना, इसकी सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करता है, जो सीधे तौर पर ग्राहकों की सेहत के साथ एक बड़ा खिलवाड़ है।
असली पनीर बताकर धोखा करते हैं दुकानदार
असली और ब्रांडेड पनीर बाजार में 400 से 500 रुपये प्रति किलो मिलता है। वहीं, रेहड़ी-पटरी पर यह एनालॉग पनीर मात्र 150 रुपये प्रति किलो में आसानी से मिल जाता है और अक्सर इसे 'असली पनीर' बताकर ही बेचा जाता है।
होटलों और रेस्टोरेंट्स की मनमानी पर लगेगी लगाम
FDA के इस आदेश में विशेष रूप से खाने-पीने की सर्विस देने वालों पर शिकंजा कसा गया है। दरअसल, कई होटल, कैटरर्स और क्लाउड किचन ग्राहकों को बिना बताए अपनी डिशेज में यह सस्ता नॉन-डेयरी पनीर परोस रहे थे। न तो मेन्यू में, न बिल पर और न ही किसी बोर्ड पर इसकी कोई जानकारी दी जाती थी। ग्राहक इसे असली पनीर ही समझते थे। FDA ने इसे सीधे तौर पर अनुचित व्यापार और फूड बिजनेस ऑपरेटर्स की जिम्मेदारियों का उल्लंघन माना है।
असली पनीर बेचने के लिए भी नियम हुए सख्त
एफडीए ने साफ कर दिया है कि असली पनीर बेचने के लिए भी नियमों का सख्ती से पालन करना होगा। मिल्क फैट के आधार पर पनीर को तीन हिस्सों में बांटा गया है:
- फुल-फैट या रेगुलर पनीर (न्यूनतम 50% मिल्क फैट): इसे सीलबंद पैकेट या खुला, दोनों तरह से बेचा जा सकता है।
- मीडियम फैट पनीर (20-50% मिल्क फैट): इसे केवल उचित लेबल वाले सीलबंद पैकेट में ही बेचना अनिवार्य है।
- लो-फैट पनीर (20% तक मिल्क फैट): इसे भी सिर्फ सीलबंद पैकेट में, सही लेबलिंग के साथ ही बेचा जा सकेगा।
इसलिए, अब से अगर कोई भी विक्रेता बिना सही लेबलिंग के पनीर बेचता पाया जाता है, तो उसे मिसब्रांडेड माना जाएगा। ऐसे मामलों में FSS एक्ट की अलग-अलग धाराओं के तहत कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।