शरीर के दूसरे हिस्सों में चुपचाप जड़ें जमा रहा ब्रेस्ट कैंसर, 25% मामलों में हड्डियों पर सीधा हमला
भारत में ब्रेस्ट कैंसर की स्थिति को लेकर एक नई रिपोर्ट सामने आई है। ...और पढ़ें

भारत में ब्रेस्ट कैंसर का बढ़ता खतरा: 13% मरीजों के अन्य अंगों तक फैली बीमारी (Image Source: Freepik)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। कैंसर का नाम सुनते ही मन में एक डर बैठ जाता है, लेकिन क्या हो अगर यह बीमारी चुपचाप शरीर के दूसरे हिस्सों में भी अपनी जड़ें जमाने लगे?
भारत में Breast Cancer की स्थिति पर एक बेहद चिंताजनक और आंखें खोलने वाली रिपोर्ट सामने आई है। 'द लांसेट रीजनल हेल्थ साउथईस्ट एशिया' जर्नल में पब्लिश एक रिसर्च के अनुसार, कैंसर से जूझ रही हजारों भारतीय महिलाओं में यह बीमारी अपनी शुरुआती जगह तक सीमित नहीं रही।
जी हां, आंकड़ों ने खुलासा किया है कि लगभग 13 प्रतिशत मामलों में ब्रेस्ट कैंसर शरीर के अन्य अंगों तक फैल चुका था। यानी एक ऐसी गंभीर स्थिति जिसे मेडिकल भाषा में 'मेटास्टेसिस' कहा जाता है।

(Image Source: Freepik)
हड्डियों को हो रहा है सबसे ज्यादा नुकसान
आईसीएमआर के बेंगलुरु स्थित राष्ट्रीय एनसीडी महामारी विज्ञान संस्थान द्वारा यह अध्ययन किया गया है। इसमें 'राष्ट्रीय कैंसर रजिस्ट्री कार्यक्रम' के तहत साल 2009 से 2020 के बीच 76,356 महिलाओं के डेटा को बारीकी से परखा गया। जांच में पाया गया कि लगभग 13 फीसदी महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर शरीर के बाकी हिस्सों में फैल चुका था।
बता दें, जब यह कैंसर फैलता है, तो सबसे ज्यादा असर हड्डियों पर पड़ता है। मेटास्टेसिस के कुल मामलों में से 25.1% (2,487 महिलाओं) में कैंसर हड्डियों तक पहुंच चुका था।
इसके अलावा, आंकड़ों से यह भी साफ हुआ कि 2009-2014 के शुरुआती वर्षों के मुकाबले, 2015-2020 के बीच कैंसर के फैलने का जोखिम ज्यादा दर्ज किया गया।
उम्र नहीं, ट्यूमर की स्थिति है असली वजह
आमतौर पर यह माना जाता है कि मरीज की ज्यादा उम्र या उसे पहले से मौजूद दूसरी बीमारियां कैंसर को तेजी से फैलाती हैं, लेकिन रिसर्च ने इस धारणा को बदल दिया है:
- ट्यूमर की प्रकृति: कैंसर का फैलना मुख्य रूप से मरीज की उम्र पर निर्भर नहीं करता, बल्कि यह ट्यूमर के स्वभाव पर निर्भर करता है।
- आकार और ग्रेड: अगर ट्यूमर का साइज 3 सेंटीमीटर से ज्यादा बड़ा है या उसका ग्रेड हाई है, तो बीमारी के फैलने का रिस्क काफी बढ़ जाता है। इसके अलावा लिम्फ नोड्स और ब्लड वेसल्स तक कैंसर का पहुंचना इसे खतरनाक बनाता है।
- दूसरी बीमारियां: केवल अन्य बीमारियां होने से यह खतरा नहीं बढ़ता। हालांकि, मेनोपॉज के बाद की महिलाओं या 'ल्यूमिनल बी' जैसी खास श्रेणियों में, अगर कई स्वास्थ्य समस्याएं एक साथ मौजूद हों, तो मेटास्टेसिस का जोखिम थोड़ा ज्यादा हो सकता है।

खबरें और भी
(Image Source: Freepik)
सरकारी और प्राइवेट हॉस्पिटल के आंकड़ों में बड़ा अंतर
स्टडी में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर एक अहम पैटर्न भी सामने आया। प्राइवेट, एनजीओ और सामान्य अस्पतालों में इलाज कराने वाले मरीजों में, शुरुआती जांच के दौरान कैंसर फैलने की दर कम पाई गई। वहीं, सरकारी और विशेष कैंसर केंद्रों में इसके मामले ज्यादा थे।
शोधकर्ताओं के अनुसार, यह कोई संयोग नहीं है बल्कि हमारे हेल्थकेयर सिस्टम की सच्चाई है। यह दिखाता है कि अलग-अलग जगहों पर जांच सुविधाओं तक लोगों की पहुंच, सही समय पर इलाज मिलने और इंफ्रास्ट्रक्चर में कितनी भारी असमानता है।
बचाव और सुधार के लिए विशेषज्ञों के सुझाव
कैंसर को इस गंभीर स्तर तक पहुंचने से रोकने के लिए, शोधकर्ताओं ने स्वास्थ्य व्यवस्था में कुछ बुनियादी बदलाव करने की सलाह दी है:
- कम्युनिटी स्क्रीनिंग: समाज के निचले और ग्रामीण स्तर पर ब्रेस्ट कैंसर की जांच सुविधाओं को तेजी से बढ़ाया जाना चाहिए।
- सिंपल रेफरल प्रक्रिया: प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और जिला अस्पतालों से मरीजों को बिना किसी देरी के, सीधे कैंसर स्पेशलिस्ट या विशेष केंद्रों तक भेजने की प्रक्रिया को आसान बनाया जाए।
- राष्ट्रीय योजनाओं को बढ़ावा: देश भर में चल रहे स्वास्थ्य कार्यक्रमों का विस्तार किया जाए ताकि बीमारी की पहचान शुरुआती स्टेज में ही हो सके।
इन सुधारों को अपनाकर न केवल बीमारी को जल्दी पकड़ा जा सकता है, बल्कि भारत में मेटास्टेटिक ब्रेस्ट कैंसर के बढ़ते बोझ को भी काफी हद तक कम किया जा सकता है।