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    हवा-पानी ही नहीं, दिल की धमनियों तक पहुंच रहा माइक्रोप्लास्टिक; सिगरेट पीने वालों को 6 गुना ज्यादा खतरा

    Updated: Mon, 20 Jul 2026 09:06 AM (IST)

    माइक्रोप्लास्टिक अब दिल की धमनियों तक पहुंच गए हैं, जिससे सेहत से जुड़ी गंभीर चिंताएं बढ़ गई हैं। ...और पढ़ें

    सिगरेट के धुएं से सीधे आपके दिल तक पहुंच रहा माइक्रोप्लास्टिक (Image Source: AI-Generated)

    सिगरेट के धुएं से सीधे आपके दिल तक पहुंच रहा माइक्रोप्लास्टिक (Image Source: AI-Generated) 

    HighLights

    1. मानव हृदय की धमनियों में अब सूक्ष्म प्लास्टिक मिले

    2. धूम्रपान करने वालों को 6 गुना अधिक जोखिम

    3. सिगरेट सूक्ष्म प्लास्टिक कणों का वाहक हो सकती है

    द कन्वरसेशन, लंदन। माइक्रोप्लास्टिक आज दुनिया के सामने बड़ी पर्यावरणीय चुनौतियों में से एक है। ये समुद्रों, पीने के पानी, समुद्री भोजन और हमारी सांसों की हवा में तो पहले ही मिल चुके हैं। अब ये मानव शरीर के लगभग हर हिस्से- प्लेसेंटा से लेकर मस्तिष्क तक में भी पाए जा रहे हैं। इटली के शोधकर्ताओं द्वारा ‘यूरोपियन हार्ट जर्नल’ में प्रकाशित एक नए अध्ययन ने इस सूची में एक और अंग जोड़ दिया है-हृदय को रक्त पहुंचाने वाली कोरोनरी धमनियां।

    microplastic

    (Image Source: AI-Generated) 

    धूमपान से अधिक खतरा

    शोधकर्ताओं ने पाया कि धूमपान करने वाले लोगों में, धूमपान न करने वालों की तुलना में हृदय को रक्त पहुंचाने वाली धमनियों में सूक्ष्म प्लास्टिक और अति सूक्ष्म प्लास्टिक कण पाए जाने की आशंका छह गुना अधिक थी। इसके विपरीत, जो लोग न तो धूमपान करते थे और न ही अधिक प्रदूषित माहौल में रहते थे, उनमें केवल 12.5 प्रतिशत लोगों के रक्त में ऐसे कण मिले। ये निष्कर्ष केवल धूमपान के एक और दुष्प्रभाव की पुष्टि नहीं करते, बल्कि नए निष्कर्ष सामने रखते हैं कि सिगरेट शायद सूक्ष्म प्लास्टिक कणों को शरीर के भीतर पहुंचाने का एक प्रभावी माध्यम भी हो सकता है।

    सिगरेट का अधिक योगदान

    तंबाकू के धुएं में हजारों ऐसे रसायन होते हैं, जो शरीर में सूजन बढ़ाते हैं, रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं, रक्त के थक्के बनने की आशंका बढ़ाते हैं और धमनियों में वसा जमा होने को तेज करते हैं। सिगरेट के धुएं में अत्यंत सूक्ष्म कण बड़ी मात्रा में होते हैं, जो फेफड़ों के भीतर तक पहुंच जाते हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि सांस के जरिये अंदर गए सूक्ष्म प्लास्टिक और अति सूक्ष्म प्लास्टिक इन्हीं कणों के साथ फेफड़ों की ‘एल्वियोली’ को पार कर पहले की तुलना में आसानी से रक्त प्रवाह में प्रवेश कर सकते हैं।

    इसका यह अर्थ नहीं है कि रक्त में मिले सभी प्लास्टिक कण सीधे सिगरेट से आए हों, हालांकि अधिकांश सिगरेट फिल्टर प्लास्टिक आधारित सेलूलोज एसीटेट से बने होते हैं और उनका भी कुछ योगदान हो सकता है। दरअसल, धूमपान करने वाले लोग पहले से ही उस हवा में मौजूद सूक्ष्म प्लास्टिक कणों को सांस के जरिये अंदर लेते हैं, जो सिंथेटिक कपड़ों के रेशों, टायरों के घिसने, खराब हो चुकी प्लास्टिक पैकेजिंग और अनेक अन्य पर्यावरणीय स्रोतों से उत्पन्न होते हैं।

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    किया गया अध्ययन

    अध्ययन में 61 ऐसे मरीजों को शामिल किया गया, जिनकी कोरोनरी एंजियोग्राफी की जा रही थी। शोधकर्ताओं ने तीन समूहों की तुलना की। हाल में हार्ट अटैक झेल चुके लोग, स्थिर कोरोनरी धमनी रोग वाले मरीज और सामान्य कोरोनरी धमनियों वाले लोग। हार्ट अटैक झेल चुके 84 प्रतिशत मरीजों के रक्त में सूक्ष्म प्लास्टिक और अति सूक्ष्म प्लास्टिक कण मिले।

    वहीं, दीर्घकालिक कोरोनरी धमनी रोग वाले मरीजों में यह आंकड़ा 40 प्रतिशत और सामान्य कोरोनरी धमनियों वाले लोगों में 32 प्रतिशत रहा। हार्ट अटैक वाले मरीजों में प्लास्टिक के पालिमर भी अधिक मात्रा में मिले, जिनमें पैकेजिंग में इस्तेमाल होने वाला पालीएथिलीन सबसे अधिक मिला। जिन मरीजों के रक्त में प्लास्टिक कण मिले, उनमें सूजन के संकेतक भी अधिक थे।

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