सिर्फ खान-पान नहीं, Genes भी तय करते हैं कितने साल जिएंगे आप; नई रिसर्च में 50% हिस्सेदारी का खुलासा
हम सभी अक्सर सोचते हैं कि हमारी उम्र कितनी लंबी होगी और यह किन चीजों पर निर्भर करती है। आमतौर पर माना जाता है कि हमारा खान-पान और जीवनशैली ही सब कुछ ह ...और पढ़ें

जीवनकाल तय करने में जेनेटिक्स का होता है 50% रोल (Image Source: AI-Generated)
HighLights
जीन्स जीवनकाल का लगभग 50% हिस्सा तय करते हैं
यह नई रिसर्च पुरानी मान्यताओं को चुनौती देती है
अध्ययन में बाहरी मृत्यु कारणों को बाहर रखा गया
प्रेट्र, नई दिल्ली। हम सभी लंबी और स्वस्थ जिंदगी जीने के लिए क्या कुछ नहीं करते। अच्छा खान-पान, व्यायाम और बीमारियों से बचाव- हमारा पूरा ध्यान इन्हीं चीजों पर रहता है, लेकिन क्या हो अगर आपको पता चले कि आपकी उम्र की डोर का एक बड़ा हिस्सा आपके हाथ में नहीं, बल्कि आपके शरीर के भीतर छिपे जीन्स के हाथ में है?
एक नए और चौंकाने वाले अध्ययन ने यह खुलासा किया है कि हम कितने साल जिएंगे, यह हमारी जीवनशैली से ज्यादा हमारे जेनेटिक्स पर निर्भर करता है। बता दें, विज्ञान का यह नया दावा पुरानी सभी मान्यताओं को बदलने वाला है।

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50 प्रतिशत भूमिका जेनेटिक्स की
इजरायल के 'वेइजमैन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस' और स्वीडन के 'कैरोलिंस्का इंस्टीट्यूट' के शोधकर्ताओं ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया है। उनके अनुसार, किसी भी व्यक्ति के जीवनकाल का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा उसके जेनेटिक्स द्वारा निर्धारित होता है। इसका सीधा मतलब यह है कि हम कितने साल जिएंगे, इसमें आधा योगदान हमारे जीन का होता है, जो हमें अपने माता-पिता से मिलते हैं।
पुरानी धारणाओं से अलग है यह शोध
यह नया अध्ययन इसलिए भी खास है क्योंकि यह पुराने आंकड़ों को चुनौती देता है। पहले के अध्ययनों में अनुमान लगाया गया था कि जीवनकाल में जेनेटिक्स का योगदान केवल 15 से 33 प्रतिशत के बीच होता है, जिसे सामान्य तौर पर 20-25 प्रतिशत माना जाता था। लेकिन नए शोध ने साबित किया है कि जेनेटिक्स की भूमिका पहले के अनुमानों की तुलना में कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।
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कैसे किया गया यह अध्ययन?
इस निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए शोधकर्ताओं ने एक विशेष 'गणितीय मॉडल' का उपयोग किया। यह शोध प्रतिष्ठित 'साइंस' पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।
इस मॉडल की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि इसने मृत्यु के बाहरी कारणों को आनुवंशिकता के अनुमानों से अलग कर दिया। शोधकर्ताओं ने दुर्घटनाओं और संक्रमण जैसी बाहरी वजहों से होने वाली मौतों को इस गणना से बाहर रखा। इसी वजह से वे जीन के वास्तविक प्रभाव को इतनी सटीकता से मापने में सफल रहे।
भविष्य के लिए क्यों है महत्वपूर्ण?
शोधकर्ताओं का मानना है कि बुढ़ापे पर होने वाले अनुसंधानों के लिए मानव जीवनकाल की आनुवंशिकता को समझना अत्यंत जरूरी है। हालांकि, लंबी उम्र पर जीन के प्रभाव को मापना अभी भी वैज्ञानिकों के लिए एक चुनौती बना हुआ है, लेकिन इस नए अध्ययन ने यह साफ कर दिया है कि हमारी उम्र में हमारे जीन एक बहुत बड़ा रोल निभाते हैं।