पैनिक डिसऑर्डर में दवाओं से ज्यादा फायदेमंद है 'हाई-इंटेंसिटी एक्सरसाइज'? पढ़ें क्या कहती है रिसर्च
क्या आप जानते हैं कि पैनिक डिसऑर्डर जैसी समस्या से निपटने के लिए सिर्फ दवाइयां या पुरानी थेरेपी ही नहीं, बल्कि दौड़ने का एक खास तरीका भी बहुत काम आ सक ...और पढ़ें

पैनिक डिसऑर्डर में पारम्परिक थेरेपी से ज्यादा असरदार है यह खास व्यायाम (Image Source: AI-Generated)
HighLights
हाई-इंटेंसिटी एक्सरसाइज पैनिक डिसऑर्डर के इलाज में दवाओं से ज्यादा प्रभावी
ब्राजील में 102 वयस्कों पर 12 हफ्तों का बिना दवा किया गया अध्ययन
हाई-इंटेंसिटी एक्सरसाइज पारंपरिक थेरेपी और स्ट्रेचिंग से बेहतर साबित हुई
प्रेट्र, नई दिल्ली। क्या पैनिक डिसऑर्डर का इलाज बिना दवाओं के, सिर्फ एक्सरसाइज के जरिए संभव है? क्या 'दौड़ने' का एक खास तरीका सालों पुरानी थेरेपी को मात दे सकता है? जी हां, एक नए अध्ययन ने इन सवालों का जवाब 'हां' में दिया है। शोधकर्ताओं ने पाया है कि पैनिक डिसऑर्डर से निपटने के लिए एक खास 'हाई-इंटेंसिटी' वाली एक्सरसाइज न सिर्फ ट्रेडिशनल इलाज से ज्यादा कारगर है, बल्कि यह शरीर को कई अन्य फायदे भी पहुंचाती है।

(Image Source: AI-Generated)
क्या है हाई-इंटेंसिटी एक्सरसाइज?
यह कोई साधारण एक्सरसाइज नहीं है, बल्कि इसे हाई-इंटेंसिटी एक्सरसाइज कहा जाता है। इसमें आपको लगातार घंटों मेहनत नहीं करनी होती, बल्कि थोड़े समय के लिए दौड़ना होता है और फिर आराम करना या पैदल चलना होता है। इस प्रक्रिया को कई राउंड में दोहराया जाता है। मजे की बात यह है कि यह एक्सरसाइज न सिर्फ पैनिक डिसऑर्डर में मदद करती है, बल्कि कम समय में शरीर की चर्बी घटाने और मांसपेशियों को मजबूत बनाने में भी बेहद प्रभावी है।
ब्राजील में हुआ यह अनोखा अध्ययन
इस तथ्य को साबित करने के लिए ब्राजील के शोधकर्ताओं ने एक विशेष अध्ययन किया। शोधकर्ता रिकार्डो विलियम मुओत्री के नेतृत्व में हुए इस शोध में पैनिक डिसऑर्डर से जूझ रहे 102 वयस्क पुरुषों और महिलाओं को शामिल किया गया। इस पूरे परीक्षण को 12 हफ्तों तक चलाया गया और सबसे खास बात यह थी कि इस दौरान किसी भी समूह के लोगों को कोई भी दवा नहीं दी गई थी, ताकि एक्सरसाइज के असली असर को देखा जा सके।
कैसे किया गया यह परीक्षण?
प्रतिभागियों को दो अलग-अलग समूहों में बांटा गया था और उन्हें हर हफ्ते एक्सरसाइज के तीन सेशन पूरे करने थे।
- पहला समूह (दौड़ने वाला): इस समूह के लोगों ने सत्र की शुरुआत मसल स्ट्रेच से की। इसके बाद उन्हें 15 मिनट तक पैदल चलना था। फिर असली कसरत शुरू हुई, जिसमें उन्हें 30 सेकंड के लिए बहुत तेज गति से दौड़ना था और उसके बाद 4.5 मिनट का आराम करना था। यह प्रक्रिया एक से छह बार दोहराई गई और अंत में फिर से 15 मिनट पैदल चलकर सेशन पूरा किया गया।
- दूसरा समूह (स्ट्रेचिंग वाला): दूसरे समूह के मरीजों ने दौड़ने की बजाय सिर्फ शरीर के अलग-अलग हिस्सों जैसे बांह, कंधे, गर्दन, चेहरे और पीठ की मांसपेशियों को स्ट्रेच करने वाला व्यायाम किया।
दौड़ना रहा ज्यादा प्रभावी
12 हफ्तों के बाद नतीजों ने साबित कर दिया कि पैदल चलने के दौरान बीच-बीच में 30 सेकंड की तेज दौड़ को शामिल करना, केवल स्ट्रेचिंग या पारंपरिक थेरेपी की तुलना में कहीं अधिक असरदार था। यह अध्ययन पैनिक डिसऑर्डर के मरीजों के लिए उम्मीद की एक नई किरण लेकर आया है।