शारीरिक ही नहीं, दिमागी विकास के लिए भी वरदान है मां का दूध; बच्चे को ADHD से देता है सुरक्षा
मां का दूध नवजात शिशु के शारीरिक ही नहीं, दिमागी विकास के लिए भी अमृत समान है। ...और पढ़ें

लंबे समय तक स्तनपान कराने से सुरक्षित रहता है बच्चों का दिमागी विकास (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
प्रेट्र, नई दिल्ली। हम सब यह अच्छी तरह जानते हैं कि मां का दूध किसी भी नवजात शिशु के लिए बिल्कुल अमृत के समान होता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह आपके बच्चे के दिमागी विकास को सुरक्षित रखने में भी एक अहम भूमिका निभाता है?
हाल ही में हुए एक नए शोध से यह शानदार जानकारी सामने आई है कि अगर बच्चे को शुरुआती छह महीने तक स्तनपान कराया जाए, तो तीन से आठ साल की उम्र में उसे 'एडीएचडी' होने का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है। आइए डिटेल में समझते हैं कि यह शोध क्या कहता है।
क्या है ADHD और कहां हुआ यह शोध?
यह बड़ा और महत्वपूर्ण शोध नॉर्वे के 37,600 परिवारों पर किया गया है, लेकिन आगे बढ़ने से पहले यह जानना जरूरी है कि आखिर एडीएचडी यानी अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर है क्या?
दरअसल, यह एक 'न्यूरोडेवलपमेंटल स्थिति' है। अगर आसान शब्दों में कहें, तो इस स्थिति से प्रभावित बच्चे किसी भी एक चीज पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते हैं और उनके अंदर काफी बेचैनी देखने को मिलती है। इस स्थिति के लक्षण आमतौर पर बचपन के शुरुआती दिनों में ही सामने आने लगते हैं।
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मां के दूध में छिपे हैं दिमागी विकास के राज
छोटे शिशुओं के लिए मां का दूध ही पोषण का सबसे मुख्य स्रोत होता है। शोध में यह बात स्पष्ट हुई है कि मां के दूध में कुछ ऐसे बेहतरीन तत्व मौजूद होते हैं, जो बच्चे के शारीरिक और दिमागी विकास के लिए बेहद जरूरी हैं।
मां के दूध में मिलने वाले इन खास तत्वों में शामिल हैं:
- लॉन्ग-चेन फैटी एसिड
- अमीनो एसिड
- एंटीबॉडी
- फायदेमंद बैक्टीरिया
बर्गन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता इस बात को गहराई से समझने में जुटे हैं कि मां का दूध शिशु के दिमागी विकास और उसके इम्यून सिस्टम पर किस तरह से अपना असर डालता है।
जितने ज्यादा समय तक स्तनपान, उतना कम खतरा
इस पूरी स्टडी के दौरान शिशुओं को कई महीनों तक सिर्फ और सिर्फ मां का दूध पिलाया गया। इसके बाद, सिर्फ स्तनपान कराने और बच्चे में एडीएचडी के लक्षण विकसित होने के खतरे के बीच के संबंध की बारीकी से जांच की गई।
बर्गन यूनिवर्सिटी के बायोमेडिसिन डिपार्टमेंट की साइकियाट्रिस्ट डॉ. बेरिट स्क्रेटींग सोलबर्ग ने इस शोध के शानदार नतीजों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया, "हमने अपनी जांच में यह पाया कि शिशु को जितने अधिक समय तक सिर्फ मां का दूध पिलाया गया, उन बच्चों में आगे चलकर एडीएचडी के लक्षण उतने ही कम नजर आए।"